ग़ाफिर · 25/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
فَلَمَّا جَاءَهُم بِالْحَقِّ مِنْ عِندِنَا قَالُوا اقْتُلُوا أَبْنَاءَ الَّذِينَ آمَنُوا مَعَهُ وَاسْتَحْيُوا نِسَاءَهُمْ ۚ وَمَا كَيْدُ الْكَافِرِينَ إِلَّا فِي ضَلَالٍ ۝٢٥
Falamuna jaaa`ahum bil haqqi min `indinaa qaaluq tulooo abnaaa`al lazeena aamanoo ma`ahoo wastahyoo nisaaa`ahum; wa maa kaidul kaafireena illaa fee dalaal
📖 हिंदी अर्थ
ग़रज़ जब मूसा उन लोगों के पास हमारी तरफ से सच्चा दीन ले कर आये तो वह बोले कि जो लोग उनके साथ ईमान लाए हैं उनके बेटों को तो मार डालों और उनकी औरतों को (लौन्डिया बनाने के लिए) ज़िन्दा रहने दो और काफ़िरों की तद्बीरें तो बे ठिकाना होती हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْحَقِّ (अल-हक़्क़): सत्य, स्पष्ट प्रमाण और चमत्कार।
  • وَاسْتَحْيُوا نِسَاءَهُمْ: उनकी स्त्रियों को जीवित रखो (अर्थात् उन्हें मत मारो, बल्कि उन्हें अपनी सेवा और दासत्व के लिए रख लो)।
  • كَيْدُ (कैद): चाल, योजना, षड्यंत्र।
  • ضَلَالٍ (ज़लाल): विनाश, विफलता, पथभ्रष्टता।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब मूसा (अलैहिस्सलाम) फ़िरऔन, हामान और क़ारून के पास हमारी ओर से स्पष्ट सत्य और चमत्कार लेकर आए, तो उन्होंने उसे स्वीकार करने के बजाय उसका विरोध किया और अत्याचार का रास्ता अपनाया। उन्होंने कहा: "जो लोग मूसा पर ईमान लाए हैं, उनके बेटों को मार डालो और उनकी स्त्रियों को जीवित रखो, ताकि वे अपमानित हों और हमारी सेवा करें।" यह वही पुरानी चाल थी जो फ़िरऔन ने मूसा (अलैहिस्सलाम) के जन्म के समय भी चली थी, लेकिन अल्लाह की योजना के आगे उसकी कोई चाल काम नहीं आई।

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि काफ़िरों की यह चाल और षड्यंत्र हमेशा विनाश और विफलता पर ही समाप्त होता है। उनका यह प्रयास कि वे सत्य के प्रकाश को बुझा दें और ईमानवालों की संख्या घटा दें, कभी सफल नहीं हो सकता। अल्लाह का फ़ैसला हमेशा सत्य के पक्ष में होता है, और उसका दीन ही सर्वोच्च रहता है।

दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य के रास्ते पर चलने वालों को चाहे कितनी भी कठिनाइयों और अत्याचारों का सामना करना पड़े, अल्लाह की मदद उनके साथ होती है। फ़िरऔन जैसे ज़ालिम हुक्काम की ताकत, चालें और षड्यंत्र — सब कुछ अल्लाह की इच्छा के आगे बेकार हो जाते हैं। ईमानवालों को चाहिए कि वे सत्य पर स्थिर रहें, क्योंकि अल्लाह ने वादा किया है कि सत्य की जीत अवश्य होगी। यह आयत हमें यह भी बताती है कि ज़ुल्म और सितम की कोई भी योजना स्थायी नहीं होती, और अल्लाह का दीन ही हमेशा सर्वोच्च रहता है। इसलिए हमें अपने ईमान पर भरोसा रखना चाहिए और अल्लाह पर पूरा यक़ीन करना चाहिए, क्योंकि वही सबसे अच्छा योजनाकार और सहायक है।

🎧 सुनें

📜 आयत 23-27 — ग़ाफिर

23وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا مُوسَىٰ بِآيَاتِنَا وَسُلْطَانٍ مُّبِينٍ
और हमने मूसा को अपनी निशानियाँ और रौशन दलीलें देकर
24إِلَىٰ فِرْعَوْنَ وَهَامَانَ وَقَارُونَ فَقَالُوا سَاحِرٌ كَذَّابٌ
फिरऔन और हामान और क़ारून के पास भेजा तो वह लोग कहने लगे कि (ये तो) एक बड़ा झूठा (और) जादूगर है
25فَلَمَّا جَاءَهُم بِالْحَقِّ مِنْ عِندِنَا قَالُوا اقْتُلُوا أَبْنَاءَ الَّذِينَ آمَنُوا مَعَهُ وَاسْتَحْيُوا نِسَاءَهُمْ ۚ وَمَا كَيْدُ الْكَافِرِينَ إِلَّا فِي ضَلَالٍ
ग़रज़ जब मूसा उन लोगों के पास हमारी तरफ से सच्चा दीन ले कर आये तो वह बोले कि जो लोग उनके साथ ईमान लाए हैं उनके बेटों को तो मार डालों और उनकी औरतों को (लौन्डिया बनाने के लिए) ज़िन्दा रहने दो और काफ़िरों की तद्बीरें तो बे ठिकाना होती हैं
26وَقَالَ فِرْعَوْنُ ذَرُونِي أَقْتُلْ مُوسَىٰ وَلْيَدْعُ رَبَّهُ ۖ إِنِّي أَخَافُ أَن يُبَدِّلَ دِينَكُمْ أَوْ أَن يُظْهِرَ فِي الْأَرْضِ الْفَسَادَ
और फिरऔन कहने लगा मुझे छोड़ दो कि मैं मूसा को तो क़त्ल कर डालूँ, और ( मैं देखूँ ) अपने परवरदिगार को तो अपनी मदद के लिए बुलालें (भाईयों) मुझे अन्देशा है कि (मुबादा) तुम्हारे दीन को उलट पुलट कर डाले या मुल्क में फसाद पैदा कर दें
27وَقَالَ مُوسَىٰ إِنِّي عُذْتُ بِرَبِّي وَرَبِّكُم مِّن كُلِّ مُتَكَبِّرٍ لَّا يُؤْمِنُ بِيَوْمِ الْحِسَابِ
और मूसा ने कहा कि मैं तो हर मुताकब्बिर से जो हिसाब के दिन (क़यामत पर ईमान नहीं लाता) अपने और तुम्हारे परवरदिगार की पनाह ले चुका हूं
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अनुवाद — ग़ाफिर 25

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Tuesday, August 18, 2026

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