Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَا جَرَمَ — निस्संदेह, यह सत्य है।
- تَدْعُونَنِي — तुम मुझे बुला रहे हो (अर्थात् आमंत्रित कर रहे हो)।
- لَيْسَ لَهُ دَعْوَةٌ — उसके लिए कोई पुकार/स्वीकृति नहीं है, अर्थात् वह किसी की पुकार का उत्तर नहीं दे सकता।
- مَرَدَّنَا — हमारा लौटना, हमारा अंतिम पड़ाव।
- الْمُسْرِفِينَ — हद से गुज़रने वाले, अत्याचारी, सीमा का उल्लंघन करने वाले (यहाँ अर्थ: मुशरिक और पापी)।
- أَصْحَابُ النَّارِ — आग (जहन्नम) के साथी, अर्थात् उसमें हमेशा रहने वाले।
विस्तृत तफ़सीर:
यह आयत उस सच्चे ईमानवाले की ज़ुबानी है जो फ़िरऔन की क़ौम के सामने सच्चाई का ऐलान कर रहा था। वह अपनी क़ौम को समझा रहा है कि तुम मुझे जिस चीज़ की ओर बुला रहे हो — यानी मूर्तियों और झूठे माबूदों की इबादत की ओर — वह वास्तव में ऐसी चीज़ें हैं जिनके पास न तो दुनिया में कोई अधिकार है और न ही आख़िरत में। वे न तो किसी की पुकार सुनती हैं, न किसी की मदद कर सकती हैं, और न ही किसी को अपनी ओर बुलाने की कोई हैसियत रखती हैं। वे तो बेजान पत्थर और मूर्तियाँ हैं, जिनसे न कोई फ़ायदा होता है और न नुक़सान।
फिर वह ईमानवाला कहता है: "हम सबका लौटना अल्लाह की ओर है" — यानी मरने के बाद हम सब उसी की तरफ़ लौटकर जाएँगे, और वही हमारे साथ इंसाफ़ का फ़ैसला करेगा। वह हर एक को उसके कर्मों का पूरा बदला देगा — नेकी का बदला नेकी से और बुराई का बदला बुराई से।
और अंत में वह कहता है: "जो लोग हद से गुज़र गए — यानी जिन्होंने अल्लाह के साथ शिर्क किया, उसकी आयतों को झुठलाया, और ज़मीन पर फ़साद फैलाया — वही लोग जहन्नम के साथी हैं।" यानी वे उस आग में हमेशा रहने वाले हैं, और उनका ठिकाना बहुत बुरा है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा ईमान वही है जो सिर्फ़ अल्लाह पर हो — जो सब कुछ सुनता है, देखता है, और हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है। जो लोग अल्लाह के सिवा दूसरों को पुकारते हैं, वे दरअसल उन चीज़ों को पुकारते हैं जो न सुन सकती हैं, न देख सकती हैं, न मदद कर सकती हैं। कितनी बड़ी बेबसी है कि इंसान अपनी ज़रूरत के वक़्त उनसे मदद माँगे जो ख़ुद किसी काम की नहीं!
यह आयत हमें यह भी याद दिलाती है कि हमारी मंज़िल अल्लाह की तरफ़ है। इस दुनिया की ज़िंदगी कुछ दिनों की है, लेकिन आख़िरत हमेशा की है। जो लोग इस सच्चाई को भूलकर अपनी मनमानी करते हैं, हद से गुज़र जाते हैं, और अल्लाह के हुक्मों को नहीं मानते — उनका अंजाम जहन्नम की आग है। लेकिन जो लोग अल्लाह की तरफ़ लौटते हैं, तौबा करते हैं, और उसकी इबादत में जुट जाते हैं — उनके लिए जन्नत की ख़ुशख़बरी है।
आओ हम सब अपने दिलों को सिर्फ़ अल्लाह से जोड़ें, उसी से मदद माँगें, और उसी की राह पर चलें — क्योंकि सच्ची कामयाबी उसी की राह में है।
📜 आयत 41-45 — सूरा ग़ाफिर
अनुवाद — ग़ाफिर 43
सूरा ग़ाफिर आयत 43 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक तुम जिस चीज़ की तरफ़ मुझे बुलाते हो वह…सूरा आयत 43/85 — सूरा ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ग़ाफिर सुनें, सूरा ग़ाफिर अनुवाद, सूरा ग़ाफिर mp3, सूरा ग़ाफिर pdf. आयत 41–45. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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