ग़ाफिर · 43/85
अनुवाद उच्चारण — सूरा ग़ाफिर
لَا جَرَمَ أَنَّمَا تَدْعُونَنِي إِلَيْهِ لَيْسَ لَهُ دَعْوَةٌ فِي الدُّنْيَا وَلَا فِي الْآخِرَةِ وَأَنَّ مَرَدَّنَا إِلَى اللَّهِ وَأَنَّ الْمُسْرِفِينَ هُمْ أَصْحَابُ النَّارِ ۝٤٣
Laa jarama annamaa tad`oonanee ilaihi laisa lahoo da`watun fid dunyaa wa laa fil Aakhirati wa anna maraddanaaa ilal laahi wa annal musrifeenahum Ashaabun Naar
📖 हिंदी अर्थ
बेशक तुम जिस चीज़ की तरफ़ मुझे बुलाते हो वह न तो दुनिया ही में पुकारे जाने के क़ाबिल है और न आख़िरत में और आख़िर में हम सबको ख़ुदा ही की तरफ लौट कर जाना है और इसमें तो शक ही नहीं कि हद से बढ़ जाने वाले जहन्नुमी हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَا جَرَمَ — निस्संदेह, यह सत्य है।
  • تَدْعُونَنِي — तुम मुझे बुला रहे हो (अर्थात् आमंत्रित कर रहे हो)।
  • لَيْسَ لَهُ دَعْوَةٌ — उसके लिए कोई पुकार/स्वीकृति नहीं है, अर्थात् वह किसी की पुकार का उत्तर नहीं दे सकता।
  • مَرَدَّنَا — हमारा लौटना, हमारा अंतिम पड़ाव।
  • الْمُسْرِفِينَ — हद से गुज़रने वाले, अत्याचारी, सीमा का उल्लंघन करने वाले (यहाँ अर्थ: मुशरिक और पापी)।
  • أَصْحَابُ النَّارِ — आग (जहन्नम) के साथी, अर्थात् उसमें हमेशा रहने वाले।

विस्तृत तफ़सीर:

यह आयत उस सच्चे ईमानवाले की ज़ुबानी है जो फ़िरऔन की क़ौम के सामने सच्चाई का ऐलान कर रहा था। वह अपनी क़ौम को समझा रहा है कि तुम मुझे जिस चीज़ की ओर बुला रहे हो — यानी मूर्तियों और झूठे माबूदों की इबादत की ओर — वह वास्तव में ऐसी चीज़ें हैं जिनके पास न तो दुनिया में कोई अधिकार है और न ही आख़िरत में। वे न तो किसी की पुकार सुनती हैं, न किसी की मदद कर सकती हैं, और न ही किसी को अपनी ओर बुलाने की कोई हैसियत रखती हैं। वे तो बेजान पत्थर और मूर्तियाँ हैं, जिनसे न कोई फ़ायदा होता है और न नुक़सान।

फिर वह ईमानवाला कहता है: "हम सबका लौटना अल्लाह की ओर है" — यानी मरने के बाद हम सब उसी की तरफ़ लौटकर जाएँगे, और वही हमारे साथ इंसाफ़ का फ़ैसला करेगा। वह हर एक को उसके कर्मों का पूरा बदला देगा — नेकी का बदला नेकी से और बुराई का बदला बुराई से।

और अंत में वह कहता है: "जो लोग हद से गुज़र गए — यानी जिन्होंने अल्लाह के साथ शिर्क किया, उसकी आयतों को झुठलाया, और ज़मीन पर फ़साद फैलाया — वही लोग जहन्नम के साथी हैं।" यानी वे उस आग में हमेशा रहने वाले हैं, और उनका ठिकाना बहुत बुरा है।


दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा ईमान वही है जो सिर्फ़ अल्लाह पर हो — जो सब कुछ सुनता है, देखता है, और हर चीज़ पर क़ुदरत रखता है। जो लोग अल्लाह के सिवा दूसरों को पुकारते हैं, वे दरअसल उन चीज़ों को पुकारते हैं जो न सुन सकती हैं, न देख सकती हैं, न मदद कर सकती हैं। कितनी बड़ी बेबसी है कि इंसान अपनी ज़रूरत के वक़्त उनसे मदद माँगे जो ख़ुद किसी काम की नहीं!

यह आयत हमें यह भी याद दिलाती है कि हमारी मंज़िल अल्लाह की तरफ़ है। इस दुनिया की ज़िंदगी कुछ दिनों की है, लेकिन आख़िरत हमेशा की है। जो लोग इस सच्चाई को भूलकर अपनी मनमानी करते हैं, हद से गुज़र जाते हैं, और अल्लाह के हुक्मों को नहीं मानते — उनका अंजाम जहन्नम की आग है। लेकिन जो लोग अल्लाह की तरफ़ लौटते हैं, तौबा करते हैं, और उसकी इबादत में जुट जाते हैं — उनके लिए जन्नत की ख़ुशख़बरी है।

आओ हम सब अपने दिलों को सिर्फ़ अल्लाह से जोड़ें, उसी से मदद माँगें, और उसी की राह पर चलें — क्योंकि सच्ची कामयाबी उसी की राह में है।



📜 आयत 41-45 — सूरा ग़ाफिर

41۞ وَيَا قَوْمِ مَا لِي أَدْعُوكُمْ إِلَى النَّجَاةِ وَتَدْعُونَنِي إِلَى النَّارِ
और ऐ मेरी क़ौम मुझे क्या हुआ है कि मैं तुमको नजाद की तरफ बुलाता हूँ और तुम मुझे दोज़ख़ की तरफ बुलाते हो
42تَدْعُونَنِي لِأَكْفُرَ بِاللَّهِ وَأُشْرِكَ بِهِ مَا لَيْسَ لِي بِهِ عِلْمٌ وَأَنَا أَدْعُوكُمْ إِلَى الْعَزِيزِ الْغَفَّارِ
तुम मुझे बुलाते हो कि मै ख़ुदा के साथ कुफ्र करूं और उस चीज़ को उसका शरीक बनाऊ जिसका मुझे इल्म में भी नहीं, और मैं तुम्हें ग़ालिब (और) बड़े बख्शने वाले ख़ुदा की तरफ बुलाता हूँ
43لَا جَرَمَ أَنَّمَا تَدْعُونَنِي إِلَيْهِ لَيْسَ لَهُ دَعْوَةٌ فِي الدُّنْيَا وَلَا فِي الْآخِرَةِ وَأَنَّ مَرَدَّنَا إِلَى اللَّهِ وَأَنَّ الْمُسْرِفِينَ هُمْ أَصْحَابُ النَّارِ
बेशक तुम जिस चीज़ की तरफ़ मुझे बुलाते हो वह न तो दुनिया ही में पुकारे जाने के क़ाबिल है और न आख़िरत में और आख़िर में हम सबको ख़ुदा ही की तरफ लौट कर जाना है और इसमें तो शक ही नहीं कि हद से बढ़ जाने वाले जहन्नुमी हैं
44فَسَتَذْكُرُونَ مَا أَقُولُ لَكُمْ ۚ وَأُفَوِّضُ أَمْرِي إِلَى اللَّهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ بَصِيرٌ بِالْعِبَادِ
तो जो मैं तुमसे कहता हूँ अनक़रीब ही उसे याद करोगे और मैं तो अपना काम ख़ुदा ही को सौंपे देता हूँ कुछ शक नहीं की ख़ुदा बन्दों ( के हाल ) को ख़ूब देख रहा है
45فَوَقَاهُ اللَّهُ سَيِّئَاتِ مَا مَكَرُوا ۖ وَحَاقَ بِآلِ فِرْعَوْنَ سُوءُ الْعَذَابِ
तो ख़ुदा ने उसे उनकी तद्बीरों की बुराई से महफूज़ रखा और फिरऔनियों को बड़े अज़ाब ने ( हर तरफ ) से घेर लिया
ग़ाफिरकुरान सूची
85आयत
मक्कीअवतरण स्थान
43आयत

अनुवाद — ग़ाफिर 43

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Friday, October 2, 2026

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