अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَسَتَذْكُرُونَ – तो तुम जल्द ही याद करोगे।
- أُفَوِّضُ – मैं सौंपता हूँ।
- بَصِيرٌ – सब कुछ देखने वाला, पूर्ण ज्ञान रखने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब उस ईमानवाले व्यक्ति ने अपनी क़ौम को नसीहत दी और उन्हें अल्लाह के अज़ाब से डराया, लेकिन उन्होंने उसकी बात मानने से इनकार कर दिया और उसकी नसीहत को ठुकरा दिया, तो उसने उनसे कहा: "तुम जल्द ही उस बात को याद करोगे जो मैं तुमसे कह रहा हूँ।" यानी जब अल्लाह का अज़ाब तुम पर आ जाएगा और तुम मुसीबत में घिर जाओगे, तो तुम्हें मेरी यह नसीहत याद आएगी, और तुम पछताओगे कि काश हमने उसकी बात मान ली होती। लेकिन उस वक़्त पछतावा किसी काम न आएगा।
फिर उसने कहा: "मैं अपना मामला अल्लाह को सौंपता हूँ।" यानी मैं अपने सारे काम अल्लाह के हवाले करता हूँ, उसी पर भरोसा करता हूँ, और उसी से मदद माँगता हूँ। मुझे तुम्हारे नुक़्सान पहुँचाने का कोई डर नहीं, क्योंकि मेरा भरोसा उस ज़ात पर है जो सब कुछ देखती और जानती है।
उसने यह भी कहा: "बेशक अल्लाह अपने बंदों को देखने वाला है।" यानी अल्लाह तआला अपने बंदों के हालात से पूरी तरह वाक़िफ है। वह जानता है कि कौन सच्चा है और कौन झूठा, कौन नेक है और कौन बुरा। उससे किसी का कोई काम छिपा नहीं है। वह हर इंसान को उसके कर्मों का पूरा बदला देगा।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई पर डटे रहना चाहिए, चाहे लोग मानें या न मानें। एक सच्चा मोमिन वही है जो अल्लाह पर पूरा भरोसा रखे और उसी को अपना कार्यभार सौंप दे। जब हम अपने मामले अल्लाह को सौंप देते हैं, तो हमें किसी इंसान का डर नहीं रहता। अल्लाह हर चीज़ देखता है, हमारी नीयतें जानता है, और हमारे अच्छे कर्मों का अज्र ज़रूर देगा। यही वह भरोसा है जो मोमिन को हर मुश्किल में ताक़त देता है। आइए हम भी अपने जीवन के हर मामले को अल्लाह के सुपुर्द करें और उसी पर भरोसा रखें — यही कामयाबी की कुंजी है।
📜 आयत 42-46 — सूरा ग़ाफिर
अनुवाद — ग़ाफिर 44
सूरा ग़ाफिर आयत 44 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो जो मैं तुमसे कहता हूँ अनक़रीब ही उसे याद…सूरा आयत 44/85 — सूरा ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ग़ाफिर सुनें, सूरा ग़ाफिर अनुवाद, सूरा ग़ाफिर mp3, सूरा ग़ाफिर pdf. आयत 42–46. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 7, 2026
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