ग़ाफिर · 44/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
فَسَتَذْكُرُونَ مَا أَقُولُ لَكُمْ ۚ وَأُفَوِّضُ أَمْرِي إِلَى اللَّهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ بَصِيرٌ بِالْعِبَادِ ۝٤٤
Fasatazkuroona maaa aqoolu lakum; wa ufawwidu amreee ilal laah; innallaaha baseerum bil`ibaad
📖 हिंदी अर्थ
तो जो मैं तुमसे कहता हूँ अनक़रीब ही उसे याद करोगे और मैं तो अपना काम ख़ुदा ही को सौंपे देता हूँ कुछ शक नहीं की ख़ुदा बन्दों ( के हाल ) को ख़ूब देख रहा है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَسَتَذْكُرُونَ – तो तुम जल्द ही याद करोगे।
  • أُفَوِّضُ – मैं सौंपता हूँ।
  • بَصِيرٌ – सब कुछ देखने वाला, पूर्ण ज्ञान रखने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब उस ईमानवाले व्यक्ति ने अपनी क़ौम को नसीहत दी और उन्हें अल्लाह के अज़ाब से डराया, लेकिन उन्होंने उसकी बात मानने से इनकार कर दिया और उसकी नसीहत को ठुकरा दिया, तो उसने उनसे कहा: "तुम जल्द ही उस बात को याद करोगे जो मैं तुमसे कह रहा हूँ।" यानी जब अल्लाह का अज़ाब तुम पर आ जाएगा और तुम मुसीबत में घिर जाओगे, तो तुम्हें मेरी यह नसीहत याद आएगी, और तुम पछताओगे कि काश हमने उसकी बात मान ली होती। लेकिन उस वक़्त पछतावा किसी काम न आएगा।

फिर उसने कहा: "मैं अपना मामला अल्लाह को सौंपता हूँ।" यानी मैं अपने सारे काम अल्लाह के हवाले करता हूँ, उसी पर भरोसा करता हूँ, और उसी से मदद माँगता हूँ। मुझे तुम्हारे नुक़्सान पहुँचाने का कोई डर नहीं, क्योंकि मेरा भरोसा उस ज़ात पर है जो सब कुछ देखती और जानती है।

उसने यह भी कहा: "बेशक अल्लाह अपने बंदों को देखने वाला है।" यानी अल्लाह तआला अपने बंदों के हालात से पूरी तरह वाक़िफ है। वह जानता है कि कौन सच्चा है और कौन झूठा, कौन नेक है और कौन बुरा। उससे किसी का कोई काम छिपा नहीं है। वह हर इंसान को उसके कर्मों का पूरा बदला देगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई पर डटे रहना चाहिए, चाहे लोग मानें या न मानें। एक सच्चा मोमिन वही है जो अल्लाह पर पूरा भरोसा रखे और उसी को अपना कार्यभार सौंप दे। जब हम अपने मामले अल्लाह को सौंप देते हैं, तो हमें किसी इंसान का डर नहीं रहता। अल्लाह हर चीज़ देखता है, हमारी नीयतें जानता है, और हमारे अच्छे कर्मों का अज्र ज़रूर देगा। यही वह भरोसा है जो मोमिन को हर मुश्किल में ताक़त देता है। आइए हम भी अपने जीवन के हर मामले को अल्लाह के सुपुर्द करें और उसी पर भरोसा रखें — यही कामयाबी की कुंजी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 42-46 — ग़ाफिर

42تَدْعُونَنِي لِأَكْفُرَ بِاللَّهِ وَأُشْرِكَ بِهِ مَا لَيْسَ لِي بِهِ عِلْمٌ وَأَنَا أَدْعُوكُمْ إِلَى الْعَزِيزِ الْغَفَّارِ
तुम मुझे बुलाते हो कि मै ख़ुदा के साथ कुफ्र करूं और उस चीज़ को उसका शरीक बनाऊ जिसका मुझे इल्म में भी नहीं, और मैं तुम्हें ग़ालिब (और) बड़े बख्शने वाले ख़ुदा की तरफ बुलाता हूँ
43لَا جَرَمَ أَنَّمَا تَدْعُونَنِي إِلَيْهِ لَيْسَ لَهُ دَعْوَةٌ فِي الدُّنْيَا وَلَا فِي الْآخِرَةِ وَأَنَّ مَرَدَّنَا إِلَى اللَّهِ وَأَنَّ الْمُسْرِفِينَ هُمْ أَصْحَابُ النَّارِ
बेशक तुम जिस चीज़ की तरफ़ मुझे बुलाते हो वह न तो दुनिया ही में पुकारे जाने के क़ाबिल है और न आख़िरत में और आख़िर में हम सबको ख़ुदा ही की तरफ लौट कर जाना है और इसमें तो शक ही नहीं कि हद से बढ़ जाने वाले जहन्नुमी हैं
44فَسَتَذْكُرُونَ مَا أَقُولُ لَكُمْ ۚ وَأُفَوِّضُ أَمْرِي إِلَى اللَّهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ بَصِيرٌ بِالْعِبَادِ
तो जो मैं तुमसे कहता हूँ अनक़रीब ही उसे याद करोगे और मैं तो अपना काम ख़ुदा ही को सौंपे देता हूँ कुछ शक नहीं की ख़ुदा बन्दों ( के हाल ) को ख़ूब देख रहा है
45فَوَقَاهُ اللَّهُ سَيِّئَاتِ مَا مَكَرُوا ۖ وَحَاقَ بِآلِ فِرْعَوْنَ سُوءُ الْعَذَابِ
तो ख़ुदा ने उसे उनकी तद्बीरों की बुराई से महफूज़ रखा और फिरऔनियों को बड़े अज़ाब ने ( हर तरफ ) से घेर लिया
46النَّارُ يُعْرَضُونَ عَلَيْهَا غُدُوًّا وَعَشِيًّا ۖ وَيَوْمَ تَقُومُ السَّاعَةُ أَدْخِلُوا آلَ فِرْعَوْنَ أَشَدَّ الْعَذَابِ
और अब तो कब्र में दोज़ख़ की आग है कि वह लोग (हर) सुबह व शाम उसके सामने ला खड़े किए जाते हैं और जिस दिन क़यामत बरपा होगी (हुक्म होगा) फिरऔन के लोगों को सख्त से सख्त अज़ाब में झोंक दो
ग़ाफिरकुरान सूची
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मक्कीRevelation
44आयत

अनुवाद — ग़ाफिर 44

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Tuesday, August 18, 2026

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