ग़ाफिर · 9/85
अनुवाद उच्चारण — सूरा ग़ाफिर
وَقِهِمُ السَّيِّئَاتِ ۚ وَمَن تَقِ السَّيِّئَاتِ يَوْمَئِذٍ فَقَدْ رَحِمْتَهُ ۚ وَذَٰلِكَ هُوَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ ۝٩
Wa qihimus saiyi-aat; wa man taqis saiyi-aati Yawma`izin faqad rahimtah; wa zaalika huwal fawzul `azeem
📖 हिंदी अर्थ
और उनको हर किस्म की बुराइयों से महफूज़ रख और जिसको तूने उस दिन ( कयामत ) के अज़ाबों से बचा लिया उस पर तूने बड़ा रहम किया और यही तो बड़ी कामयाबी है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَقِهِمُ: उन्हें बचा ले, उनसे दूर रख दे।
  • السَّيِّئَاتِ: बुराइयाँ, यहाँ अर्थ है बुरे कर्मों की सज़ा और उनके बुरे अंजाम।
  • يَوْمَئِذٍ: उस दिन (यानी क़ियामत के दिन)।
  • رَحِمْتَهُ: तूने उस पर रहम किया, उसे अपनी रहमत से नवाज़ा।
  • الْفَوْزُ الْعَظِيمُ: बड़ी कामयाबी, महान सफलता।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में मोमिन बंदे दुआ करते हैं कि "ऐ हमारे रब! हमें बुराइयों से बचा ले, हमारे गुनाहों की सज़ा हमसे दूर रख, और हमें उन अंजामों से महफ़ूज़ रख जो हमें रंज और अफ़सोस में डाल दें।" यह दुआ उन लोगों की है जो दुनिया में अल्लाह की इबादत करते हैं, उसकी रहमत की उम्मीद रखते हैं और उसके अज़ाब से डरते हैं।

फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिस शख्स को क़ियामत के दिन बुराइयों की सज़ा से बचा लिया गया, उस पर अल्लाह ने रहमत फ़रमा दी। यानी उसे जहन्नुम की आग से नजात मिल गई और वह जन्नत में दाख़िल हो गया। और यही सबसे बड़ी कामयाबी है — वह कामयाबी जिसके आगे दुनिया की हर कामयाबी बेमानी है।

यह वह फ़ौज़ है जिसका कोई हमसर (मुक़ाबिल) नहीं, क्योंकि यहाँ इंसान को वह नेअमत मिलती है जो कभी ख़त्म नहीं होती — अल्लाह की रज़ा, जन्नत की नेअमतें, और हमेशा की खुशियाँ।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह से दुआ करने का सबसे अफ़ज़ल तरीक़ा यह है कि हम उससे दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई माँगें। जो बंदा अल्लाह से बुराइयों से हिफ़ाज़त की दुआ करता है, अल्लाह उसे दुनिया में भी बुराइयों से बचाता है और आख़िरत में भी उसे जन्नत अता करता है। यही असली कामयाबी है — न कि दुनिया का माल और औलाद।

तो आओ, हम भी इस दुआ को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाएँ, और अल्लाह से यही माँगें कि "ऐ अल्लाह! हमें बुराइयों से बचा, हमारे गुनाह माफ़ कर, और हमें जन्नत अता फ़रमा।" यही वह रास्ता है जो हमें सच्ची कामयाबी तक पहुँचाता है। अल्लाह हम सबको इस तौफ़ीक़ अता करे। आमीन।



📜 आयत 7-11 — सूरा ग़ाफिर

7الَّذِينَ يَحْمِلُونَ الْعَرْشَ وَمَنْ حَوْلَهُ يُسَبِّحُونَ بِحَمْدِ رَبِّهِمْ وَيُؤْمِنُونَ بِهِ وَيَسْتَغْفِرُونَ لِلَّذِينَ آمَنُوا رَبَّنَا وَسِعْتَ كُلَّ شَيْءٍ رَّحْمَةً وَعِلْمًا فَاغْفِرْ لِلَّذِينَ تَابُوا وَاتَّبَعُوا سَبِيلَكَ وَقِهِمْ عَذَابَ الْجَحِيمِ
जो (फ़रिश्ते) अर्श को उठाए हुए हैं और जो उस के गिर्दा गिर्द (तैनात) हैं (सब) अपने परवरदिगार की तारीफ़ के साथ तसबीह करते हैं और उस पर ईमान रखते हैं और मोमिनों के लिए बख़शिश की दुआएं माँगा करते हैं कि परवरदिगार तेरी रहमत और तेरा इल्म हर चीज़ पर अहाता किए हुए हैं, तो जिन लोगों ने (सच्चे) दिल से तौबा कर ली और तेरे रास्ते पर चले उनको बख्श दे और उनको जहन्नुम के अज़ाब से बचा ले
8رَبَّنَا وَأَدْخِلْهُمْ جَنَّاتِ عَدْنٍ الَّتِي وَعَدتَّهُمْ وَمَن صَلَحَ مِنْ آبَائِهِمْ وَأَزْوَاجِهِمْ وَذُرِّيَّاتِهِمْ ۚ إِنَّكَ أَنتَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
ऐ हमारे पालने वाले इन को सदाबहार बाग़ों में जिनका तूने उन से वायदा किया है दाख़िल कर और उनके बाप दादाओं और उनकी बीवीयों और उनकी औलाद में से जो लोग नेक हो उनको (भी बख्श दें) बेशक तू ही ज़बरदस्त (और) हिकमत वाला है
9وَقِهِمُ السَّيِّئَاتِ ۚ وَمَن تَقِ السَّيِّئَاتِ يَوْمَئِذٍ فَقَدْ رَحِمْتَهُ ۚ وَذَٰلِكَ هُوَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ
और उनको हर किस्म की बुराइयों से महफूज़ रख और जिसको तूने उस दिन ( कयामत ) के अज़ाबों से बचा लिया उस पर तूने बड़ा रहम किया और यही तो बड़ी कामयाबी है
10إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا يُنَادَوْنَ لَمَقْتُ اللَّهِ أَكْبَرُ مِن مَّقْتِكُمْ أَنفُسَكُمْ إِذْ تُدْعَوْنَ إِلَى الْإِيمَانِ فَتَكْفُرُونَ
(हाँ) जिन लोगों ने कुफ्र एख्तेयार किया उनसे पुकार कर कह दिया जाएगा कि जितना तुम (आज) अपनी जान से बेज़ार हो उससे बढ़कर ख़ुदा तुमसे बेज़ार था जब तुम ईमान की तरफ बुलाए जाते थे तो कुफ्र करते थे
11قَالُوا رَبَّنَا أَمَتَّنَا اثْنَتَيْنِ وَأَحْيَيْتَنَا اثْنَتَيْنِ فَاعْتَرَفْنَا بِذُنُوبِنَا فَهَلْ إِلَىٰ خُرُوجٍ مِّن سَبِيلٍ
वह लोग कहेंगे कि ऐ हमारे परवरदिगार तू हमको दो बार मार चुका और दो बार ज़िन्दा कर चुका तो अब हम अपने गुनाहों का एक़रार करते हैं तो क्या (यहाँ से) निकलने की भी कोई सबील है
ग़ाफिरकुरान सूची
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9आयत

अनुवाद — ग़ाफिर 9

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Monday, September 28, 2026

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