Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- لَمَقْتُ اللهِ: अल्लाह का अत्यधिक क्रोध और नफ़रत।
- مَقْتِكُمْ: तुम्हारा अपने आप से घृणा करना।
- تُدْعَوْنَ: तुम्हें बुलाया जाता था।
तफ़सीर:
निश्चय ही जिन लोगों ने कुफ़्र किया (अल्लाह और उसके रसूलों को नहीं माना), उन्हें क़ियामत के दिन जब वे जहन्नम में प्रवेश करेंगे और अपने बुरे कर्मों को देखकर स्वयं अपनी आत्मा से घृणा करने लगेंगे, उस समय उन्हें पुकारा जाएगा। उनसे कहा जाएगा: "अल्लाह की ओर से तुम पर जो क्रोध और घृणा है, वह उस घृणा से कहीं बड़ी है जो आज तुम अपनी आत्मा से कर रहे हो।"
यह इसलिए है कि दुनिया में जब तुम्हें ईमान लाने के लिए बुलाया जाता था — रसूलों और किताबों के माध्यम से — तो तुम इनकार करते थे और कुफ़्र पर अड़े रहते थे। तुमने अल्लाह की नेमतों को ठुकराया, उसके रसूलों को झुठलाया, और उसके साथ दूसरों को साझी बनाया। आज जब तुम अपने अंजाम को देख रहे हो और अपनी ही आत्मा को कोस रहे हो, तो यह समझ लो कि अल्लाह का क्रोध तुम पर उससे कहीं अधिक है।
यह वह क्षण है जब पश्चाताप का कोई लाभ नहीं, और न ही कोई बचाव संभव है। यह पुकार उन्हें उनके कुफ़्र और हठ के परिणाम की याद दिलाती है — कि उन्होंने सत्य को सुनकर भी उसे अस्वीकार किया, और जब उन्हें राह दिखाई गई तो उन्होंने अंधकार को चुना।
नसीहत और दावत:
यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि अल्लाह की ओर से बुलावा कितनी बड़ी रहमत है। जब हमें ईमान की दावत दी जाती है, तो यह हमारे लिए सबसे बड़ा सम्मान और अवसर है। हमें चाहिए कि हम इस दावत को कभी हल्के में न लें, बल्कि इसे क़बूल करके अल्लाह की मुहब्बत और रहमत के हक़दार बनें। जो लोग इस दावत को ठुकराते हैं, वे आख़िरत में अपनी ही आत्मा से घृणा करेंगे — लेकिन तब बहुत देर हो चुकी होगी।
आज हमारे पास मौका है कि हम अल्लाह की तरफ़ लौटें, अपने गुनाहों से तौबा करें, और उसके रसूल ﷺ की सुन्नत पर चलें। अल्लाह की रहमत उसके क्रोध से कहीं बड़ी है, और वह अपने बंदों की तौबा क़बूल करने वाला है। हमें चाहिए कि हम इस दुनिया में ही उस रास्ते को अपनाएँ जो हमें उसकी रज़ा तक पहुँचाए, ताकि उस दिन हमें शर्मिंदगी और पश्चाताप का सामना न करना पड़े।
📜 आयत 8-12 — सूरा ग़ाफिर
अनुवाद — ग़ाफिर 10
सूरा ग़ाफिर आयत 10 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (हाँ) जिन लोगों ने कुफ्र एख्तेयार किया उनसे पुकार कर…सूरा आयत 10/85 — सूरा ग़ाफिर غافر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ग़ाफिर सुनें, सूरा ग़ाफिर अनुवाद, सूरा ग़ाफिर mp3, सूरा ग़ाफिर pdf. आयत 8–12. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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