ग़ाफिर · 10/85
अनुवाद उच्चारण — ग़ाफिर
إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا يُنَادَوْنَ لَمَقْتُ اللَّهِ أَكْبَرُ مِن مَّقْتِكُمْ أَنفُسَكُمْ إِذْ تُدْعَوْنَ إِلَى الْإِيمَانِ فَتَكْفُرُونَ ۝١٠
Innal lazeena kafaroo yunaadawna lamaqtul laahi akbaru mim maqtikum anfusakum iz tud`awna ilal eemaani fatakfuroon
📖 हिंदी अर्थ
(हाँ) जिन लोगों ने कुफ्र एख्तेयार किया उनसे पुकार कर कह दिया जाएगा कि जितना तुम (आज) अपनी जान से बेज़ार हो उससे बढ़कर ख़ुदा तुमसे बेज़ार था जब तुम ईमान की तरफ बुलाए जाते थे तो कुफ्र करते थे
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لَمَقْتُ اللهِ: अल्लाह का अत्यधिक क्रोध और नफ़रत।
  • مَقْتِكُمْ: तुम्हारा अपने आप से घृणा करना।
  • تُدْعَوْنَ: तुम्हें बुलाया जाता था।

तफ़सीर:

निश्चय ही जिन लोगों ने कुफ़्र किया (अल्लाह और उसके रसूलों को नहीं माना), उन्हें क़ियामत के दिन जब वे जहन्नम में प्रवेश करेंगे और अपने बुरे कर्मों को देखकर स्वयं अपनी आत्मा से घृणा करने लगेंगे, उस समय उन्हें पुकारा जाएगा। उनसे कहा जाएगा: "अल्लाह की ओर से तुम पर जो क्रोध और घृणा है, वह उस घृणा से कहीं बड़ी है जो आज तुम अपनी आत्मा से कर रहे हो।"

यह इसलिए है कि दुनिया में जब तुम्हें ईमान लाने के लिए बुलाया जाता था — रसूलों और किताबों के माध्यम से — तो तुम इनकार करते थे और कुफ़्र पर अड़े रहते थे। तुमने अल्लाह की नेमतों को ठुकराया, उसके रसूलों को झुठलाया, और उसके साथ दूसरों को साझी बनाया। आज जब तुम अपने अंजाम को देख रहे हो और अपनी ही आत्मा को कोस रहे हो, तो यह समझ लो कि अल्लाह का क्रोध तुम पर उससे कहीं अधिक है।

यह वह क्षण है जब पश्चाताप का कोई लाभ नहीं, और न ही कोई बचाव संभव है। यह पुकार उन्हें उनके कुफ़्र और हठ के परिणाम की याद दिलाती है — कि उन्होंने सत्य को सुनकर भी उसे अस्वीकार किया, और जब उन्हें राह दिखाई गई तो उन्होंने अंधकार को चुना।

नसीहत और दावत:

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि अल्लाह की ओर से बुलावा कितनी बड़ी रहमत है। जब हमें ईमान की दावत दी जाती है, तो यह हमारे लिए सबसे बड़ा सम्मान और अवसर है। हमें चाहिए कि हम इस दावत को कभी हल्के में न लें, बल्कि इसे क़बूल करके अल्लाह की मुहब्बत और रहमत के हक़दार बनें। जो लोग इस दावत को ठुकराते हैं, वे आख़िरत में अपनी ही आत्मा से घृणा करेंगे — लेकिन तब बहुत देर हो चुकी होगी।

आज हमारे पास मौका है कि हम अल्लाह की तरफ़ लौटें, अपने गुनाहों से तौबा करें, और उसके रसूल ﷺ की सुन्नत पर चलें। अल्लाह की रहमत उसके क्रोध से कहीं बड़ी है, और वह अपने बंदों की तौबा क़बूल करने वाला है। हमें चाहिए कि हम इस दुनिया में ही उस रास्ते को अपनाएँ जो हमें उसकी रज़ा तक पहुँचाए, ताकि उस दिन हमें शर्मिंदगी और पश्चाताप का सामना न करना पड़े।

🎧 सुनें

📜 आयत 8-12 — ग़ाफिर

8رَبَّنَا وَأَدْخِلْهُمْ جَنَّاتِ عَدْنٍ الَّتِي وَعَدتَّهُمْ وَمَن صَلَحَ مِنْ آبَائِهِمْ وَأَزْوَاجِهِمْ وَذُرِّيَّاتِهِمْ ۚ إِنَّكَ أَنتَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
ऐ हमारे पालने वाले इन को सदाबहार बाग़ों में जिनका तूने उन से वायदा किया है दाख़िल कर और उनके बाप दादाओं और उनकी बीवीयों और उनकी औलाद में से जो लोग नेक हो उनको (भी बख्श दें) बेशक तू ही ज़बरदस्त (और) हिकमत वाला है
9وَقِهِمُ السَّيِّئَاتِ ۚ وَمَن تَقِ السَّيِّئَاتِ يَوْمَئِذٍ فَقَدْ رَحِمْتَهُ ۚ وَذَٰلِكَ هُوَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ
और उनको हर किस्म की बुराइयों से महफूज़ रख और जिसको तूने उस दिन ( कयामत ) के अज़ाबों से बचा लिया उस पर तूने बड़ा रहम किया और यही तो बड़ी कामयाबी है
10إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا يُنَادَوْنَ لَمَقْتُ اللَّهِ أَكْبَرُ مِن مَّقْتِكُمْ أَنفُسَكُمْ إِذْ تُدْعَوْنَ إِلَى الْإِيمَانِ فَتَكْفُرُونَ
(हाँ) जिन लोगों ने कुफ्र एख्तेयार किया उनसे पुकार कर कह दिया जाएगा कि जितना तुम (आज) अपनी जान से बेज़ार हो उससे बढ़कर ख़ुदा तुमसे बेज़ार था जब तुम ईमान की तरफ बुलाए जाते थे तो कुफ्र करते थे
11قَالُوا رَبَّنَا أَمَتَّنَا اثْنَتَيْنِ وَأَحْيَيْتَنَا اثْنَتَيْنِ فَاعْتَرَفْنَا بِذُنُوبِنَا فَهَلْ إِلَىٰ خُرُوجٍ مِّن سَبِيلٍ
वह लोग कहेंगे कि ऐ हमारे परवरदिगार तू हमको दो बार मार चुका और दो बार ज़िन्दा कर चुका तो अब हम अपने गुनाहों का एक़रार करते हैं तो क्या (यहाँ से) निकलने की भी कोई सबील है
12ذَٰلِكُم بِأَنَّهُ إِذَا دُعِيَ اللَّهُ وَحْدَهُ كَفَرْتُمْ ۖ وَإِن يُشْرَكْ بِهِ تُؤْمِنُوا ۚ فَالْحُكْمُ لِلَّهِ الْعَلِيِّ الْكَبِيرِ
ये इसलिए कि जब तन्हा ख़ुदा पुकारा जाता था तो तुम ईन्कार करते थे और अगर उसके साथ शिर्क किया जाता था तो तुम मान लेते थे तो (आज) ख़ुदा की हुकूमत है जो आलीशान (और) बुर्ज़ुग है
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अनुवाद — ग़ाफिर 10

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Tuesday, August 18, 2026

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