अश-शूरा · 25/53
अनुवाद उच्चारण — अश-शूरा
وَهُوَ الَّذِي يَقْبَلُ التَّوْبَةَ عَنْ عِبَادِهِ وَيَعْفُو عَنِ السَّيِّئَاتِ وَيَعْلَمُ مَا تَفْعَلُونَ ۝٢٥
Wa Huwal lazee yaqbalut tawbata `an `ibaadihee wa ya`foo `anis saiyiaati wa ya`lamu maa taf`aloon
📖 हिंदी अर्थ
और वही तो है जो अपने बन्दों की तौबा क़ुबूल करता है और गुनाहों को माफ़ करता है और तुम लोग जो कुछ भी करते हो वह जानता है

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَقْبَلُ التَّوْبَةَ: तौबा (पश्चाताप) को स्वीकार करता है।
  • عَنْ عِبَادِهِ: अपने बंदों की ओर से।
  • يَعْفُو عَنِ السَّيِّئَاتِ: बुराइयों को माफ कर देता है।
  • يَعْلَمُ مَا تَفْعَلُونَ: वह जानता है जो कुछ तुम करते हो।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला वही है जो अपने बंदों की तौबा को स्वीकार करता है। जब कोई बंदा अपने गुनाहों पर पछतावा करते हुए, सच्चे दिल से उसकी ओर लौटता है—चाहे वह कुफ्र (अविश्वास) से लौटे या गुनाहों से—तो अल्लाह उसकी तौबा को कबूल करता है और उस पर अपनी रहमत की बारिश करता है। यह अल्लाह का बड़ा ही उदार स्वभाव है कि वह अपने बंदों के पश्चाताप को स्वीकार करता है, चाहे उनके गुनाह कितने ही बड़े क्यों न हों।

इसके बाद अल्लाह फरमाता है कि वह बुराइयों को माफ कर देता है। यानी जब बंदा तौबा करता है, तो अल्लाह उसके पिछले गुनाहों को मिटा देता है और उन्हें उसके खिलाफ दर्ज नहीं करता। यह अल्लाह की असीम दया और कृपा है कि वह अपने बंदों की गलतियों को न केवल माफ करता है, बल्कि उन्हें पूरी तरह मिटा भी देता है, जैसे वे कभी हुए ही न हों।

फिर अल्लाह फरमाता है: "और वह जानता है जो कुछ तुम करते हो।" यानी अल्लाह को तुम्हारे हर अच्छे और बुरे काम का पूरा ज्ञान है। उससे कोई भी चीज़ छिपी नहीं है—न तुम्हारे दिलों के राज़, न तुम्हारे अमल (कर्म)। वह सब कुछ देखता और जानता है, और वही तुम्हें तुम्हारे कर्मों का बदला देगा। यह बात हमें याद दिलाती है कि हमें हमेशा अच्छे काम करने चाहिए और बुराई से बचना चाहिए, क्योंकि अल्लाह सब कुछ देख रहा है।

दावत और नसीहत:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें अल्लाह की रहमत की सबसे बड़ी खुशखबरी देती है। अल्लाह का दरवाजा तौबा के लिए हमेशा खुला है। चाहे आपने कितने ही गुनाह किए हों, जब आप सच्चे दिल से अल्लाह की ओर लौटेंगे, तो वह आपकी तौबा ज़रूर कबूल करेगा। निराशा और मायूसी शैतान का हथियार है, जो हमें अल्लाह की रहमत से दूर रखना चाहता है। लेकिन अल्लाह की रहमत उसके गज़ब से कहीं बड़ी है।

तो आइए, हम सब अपने गुनाहों से तौबा करें, अल्लाह की ओर लौटें, और अपने जीवन को उसकी रज़ा (प्रसन्नता) के अनुसार ढालें। याद रखें, अल्लाह हमारे हर अमल को जानता है, और वही हमें उसका बदला देगा। अच्छाई की ओर बढ़ें, और अल्लाह की रहमत और माफी के साये में जीवन बिताएं। अल्लाह हम सबको तौबा करने की तौफीक दे और हमारे गुनाहों को माफ फरमाए। आमीन।



📜 आयत 23-27 — अश-शूरा

23ذَٰلِكَ الَّذِي يُبَشِّرُ اللَّهُ عِبَادَهُ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ ۗ قُل لَّا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ أَجْرًا إِلَّا الْمَوَدَّةَ فِي الْقُرْبَىٰ ۗ وَمَن يَقْتَرِفْ حَسَنَةً نَّزِدْ لَهُ فِيهَا حُسْنًا ۚ إِنَّ اللَّهَ غَفُورٌ شَكُورٌ
यही (ईनाम) है जिसकी ख़ुदा अपने उन बन्दों को ख़ुशख़बरी देता है जो ईमान लाए और नेक काम करते रहे (ऐ रसूल) तुम कह दो कि मैं इस (तबलीग़े रिसालत) का अपने क़रातबदारों (अहले बैत) की मोहब्बत के सिवा तुमसे कोई सिला नहीं मांगता और जो शख़्श नेकी हासिल करेगा हम उसके लिए उसकी ख़ूबी में इज़ाफा कर देंगे बेशक वह बड़ा बख्शने वाला क़दरदान है
24أَمْ يَقُولُونَ افْتَرَىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا ۖ فَإِن يَشَإِ اللَّهُ يَخْتِمْ عَلَىٰ قَلْبِكَ ۗ وَيَمْحُ اللَّهُ الْبَاطِلَ وَيُحِقُّ الْحَقَّ بِكَلِمَاتِهِ ۚ إِنَّهُ عَلِيمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ
क्या ये लोग (तुम्हारी निस्बत कहते हैं कि इस (रसूल) ने ख़ुदा पर झूठा बोहतान बाँधा है तो अगर (ऐसा) होता तो) ख़ुदा चाहता तो तुम्हारे दिल पर मोहर लगा देता (कि तुम बात ही न कर सकते) और ख़ुदा तो झूठ को नेस्तनाबूद और अपनी बातों से हक़ को साबित करता है वह यक़ीनी दिलों के राज़ से ख़ूब वाक़िफ है
25وَهُوَ الَّذِي يَقْبَلُ التَّوْبَةَ عَنْ عِبَادِهِ وَيَعْفُو عَنِ السَّيِّئَاتِ وَيَعْلَمُ مَا تَفْعَلُونَ
और वही तो है जो अपने बन्दों की तौबा क़ुबूल करता है और गुनाहों को माफ़ करता है और तुम लोग जो कुछ भी करते हो वह जानता है
26وَيَسْتَجِيبُ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ وَيَزِيدُهُم مِّن فَضْلِهِ ۚ وَالْكَافِرُونَ لَهُمْ عَذَابٌ شَدِيدٌ
और जो लोग ईमान लाए और अच्छे अच्छे काम करते रहे उनकी (दुआ) क़ुबूल करता है फज़ल व क़रम से उनको बढ़ कर देता है और काफिरों के लिए सख्त अज़ाब है
27۞ وَلَوْ بَسَطَ اللَّهُ الرِّزْقَ لِعِبَادِهِ لَبَغَوْا فِي الْأَرْضِ وَلَٰكِن يُنَزِّلُ بِقَدَرٍ مَّا يَشَاءُ ۚ إِنَّهُ بِعِبَادِهِ خَبِيرٌ بَصِيرٌ
और अगर ख़ुदा ने अपने बन्दों की रोज़ी में फराख़ी कर दे तो वह लोग ज़रूर (रूए) ज़मीन से सरकशी करने लगें मगर वह तो बाक़दरे मुनासिब जिसकी रोज़ी (जितनी) चाहता है नाज़िल करता है वह बेशक अपने बन्दों से ख़बरदार (और उनको) देखता है
अश-शूराकुरान सूची
53आयत
मक्कीRevelation
25आयत

अनुवाद — अश-शूरा 25

सूरा अश-शूरा आयत 25 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और वही तो है जो अपने बन्दों की तौबा क़ुबूल…

सूरा आयत 25/53 — अश-शूरा الشورى (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शूरा सुनें, अश-शूरा अनुवाद, अश-शूरा mp3, अश-शूरा pdf. आयत 23–27. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए