अश-शूरा · 26/53
अनुवाद उच्चारण — सूरा अश-शूरा
وَيَسْتَجِيبُ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ وَيَزِيدُهُم مِّن فَضْلِهِ ۚ وَالْكَافِرُونَ لَهُمْ عَذَابٌ شَدِيدٌ ۝٢٦
Wa yastajeebul lazeena aamanoo wa `amilu saalihaati wa yazeeduhum min fadlih; wal kaafiroona lahum `azaabun shadeed
📖 हिंदी अर्थ
और जो लोग ईमान लाए और अच्छे अच्छे काम करते रहे उनकी (दुआ) क़ुबूल करता है फज़ल व क़रम से उनको बढ़ कर देता है और काफिरों के लिए सख्त अज़ाब है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَسْتَجِيبُ: स्वीकार करता है, उत्तर देता है।
  • الَّذِينَ آمَنُوا: वे लोग जो ईमान लाए।
  • عَمِلُوا الصَّالِحَاتِ: अच्छे कर्म किए।
  • مِن فَضْلِهِ: अपने अनुग्रह और कृपा से।
  • عَذَابٌ شَدِيدٌ: कठोर एवं भयंकर यातना।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने उन बंदों की दुआएँ स्वीकार करता है जो उस पर ईमान रखते हैं और अपने जीवन को उसकी आज्ञा के अनुसार ढालते हैं। यह ईमान केवल ज़ुबान का दावा नहीं, बल्कि दिल का यक़ीन और अच्छे कर्मों से प्रमाणित होता है। जब ये लोग अल्लाह से दुआ करते हैं, तो वह उनकी पुकार सुनता है और उनकी ज़रूरतें पूरी करता है।

यह अल्लाह का अत्यंत अनुग्रह है कि वह न केवल उनकी दुआएँ स्वीकार करता है, बल्कि उनके अच्छे कर्मों के बदले में उन्हें और अधिक देता है—जो उन्होंने माँगा भी नहीं होता। वह उन्हें अपनी ओर से तौफ़ीक़ (सफलता), हिदायत (मार्गदर्शन), और अज्र (प्रतिफल) में वृद्धि प्रदान करता है। यह उसकी असीम दया और कृपा का प्रमाण है कि वह अपने नेक बंदों को उनकी उम्मीद से भी बढ़कर देता है।

इसके विपरीत, जो लोग अल्लाह और उसके रसूल को नकारते हैं और उसकी आयतों को झुठलाते हैं, उनके लिए क़ियामत के दिन एक ऐसा कठोर और दर्दनाक अज़ाब तैयार है जिसकी कोई मिसाल नहीं। यह अज़ाब उनके कुफ्र और अवज्ञा का न्यायसंगत परिणाम होगा।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत और उसकी पकड़ दोनों असीम हैं। जो लोग उसकी ओर रुजू करते हैं, वह उन्हें अपनी रहमत से नवाज़ता है, और जो उससे मुँह मोड़ते हैं, वे अपने लिए केवल अफ़सोस और यातना का सामान करते हैं। आइए हम अपने जीवन को ईमान और अच्छे कर्मों से सजाएँ, ताकि हम अल्लाह के उन बंदों में शामिल हों जिनकी दुआएँ स्वीकार होती हैं और जिन्हें उसके अनुग्रह से अतिरिक्त नेमतें मिलती हैं। यही सच्ची सफलता है, और यही वह मार्ग है जो हमें जन्नत की ओर ले जाता है।



📜 आयत 24-28 — सूरा अश-शूरा

24أَمْ يَقُولُونَ افْتَرَىٰ عَلَى اللَّهِ كَذِبًا ۖ فَإِن يَشَإِ اللَّهُ يَخْتِمْ عَلَىٰ قَلْبِكَ ۗ وَيَمْحُ اللَّهُ الْبَاطِلَ وَيُحِقُّ الْحَقَّ بِكَلِمَاتِهِ ۚ إِنَّهُ عَلِيمٌ بِذَاتِ الصُّدُورِ
क्या ये लोग (तुम्हारी निस्बत कहते हैं कि इस (रसूल) ने ख़ुदा पर झूठा बोहतान बाँधा है तो अगर (ऐसा) होता तो) ख़ुदा चाहता तो तुम्हारे दिल पर मोहर लगा देता (कि तुम बात ही न कर सकते) और ख़ुदा तो झूठ को नेस्तनाबूद और अपनी बातों से हक़ को साबित करता है वह यक़ीनी दिलों के राज़ से ख़ूब वाक़िफ है
25وَهُوَ الَّذِي يَقْبَلُ التَّوْبَةَ عَنْ عِبَادِهِ وَيَعْفُو عَنِ السَّيِّئَاتِ وَيَعْلَمُ مَا تَفْعَلُونَ
और वही तो है जो अपने बन्दों की तौबा क़ुबूल करता है और गुनाहों को माफ़ करता है और तुम लोग जो कुछ भी करते हो वह जानता है
26وَيَسْتَجِيبُ الَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ وَيَزِيدُهُم مِّن فَضْلِهِ ۚ وَالْكَافِرُونَ لَهُمْ عَذَابٌ شَدِيدٌ
और जो लोग ईमान लाए और अच्छे अच्छे काम करते रहे उनकी (दुआ) क़ुबूल करता है फज़ल व क़रम से उनको बढ़ कर देता है और काफिरों के लिए सख्त अज़ाब है
27۞ وَلَوْ بَسَطَ اللَّهُ الرِّزْقَ لِعِبَادِهِ لَبَغَوْا فِي الْأَرْضِ وَلَٰكِن يُنَزِّلُ بِقَدَرٍ مَّا يَشَاءُ ۚ إِنَّهُ بِعِبَادِهِ خَبِيرٌ بَصِيرٌ
और अगर ख़ुदा ने अपने बन्दों की रोज़ी में फराख़ी कर दे तो वह लोग ज़रूर (रूए) ज़मीन से सरकशी करने लगें मगर वह तो बाक़दरे मुनासिब जिसकी रोज़ी (जितनी) चाहता है नाज़िल करता है वह बेशक अपने बन्दों से ख़बरदार (और उनको) देखता है
28وَهُوَ الَّذِي يُنَزِّلُ الْغَيْثَ مِن بَعْدِ مَا قَنَطُوا وَيَنشُرُ رَحْمَتَهُ ۚ وَهُوَ الْوَلِيُّ الْحَمِيدُ
और वही तो है जो लोगों के नाउम्मीद हो जाने के बाद मेंह बरसाता है और अपनी रहमत (बारिश की बरकतों) को फैला देता है और वही कारसाज़ (और) हम्द व सना के लायक़ है
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Saturday, October 3, 2026

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