अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- اسْتَجَابُوا: उत्तर दिया, स्वीकार किया
- أَقَامُوا الصَّلَاةَ: नमाज़ को पूरी तरह से क़ायम किया
- شُورَىٰ: आपसी सलाह-मशविरा
- يُنفِقُونَ: खर्च करते हैं
तफ़सीर:
ये आयत उन मोमिनों के खूबसूरत गुणों का वर्णन करती है जिन्हें अल्लाह ने अपनी रहमत से नवाज़ा है। ये वो लोग हैं जिन्होंने अपने रब की पुकार पर लब्बैक कहा—जब अल्लाह ने उन्हें अपनी तौहीद (एकता) और इताअत (आज्ञाकारिता) की तरफ बुलाया, तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के उसे क़बूल किया। उन्होंने अपने जीवन को अल्लाह की रज़ा के ताबे कर दिया और हर उस चीज़ से परहेज़ किया जिससे अल्लाह ने रोका है।
फिर अल्लाह उनके दूसरे गुण का ज़िक्र करता है—वो नमाज़ को पूरी तरह से क़ायम करते हैं। यानी सिर्फ़ नमाज़ पढ़ना ही नहीं, बल्कि उसकी सभी शर्तों, अरकान और आदाब का पूरा ख़याल रखते हुए, वक़्त पर, बाजमात या अकेले, उसे अदा करते हैं। नमाज़ उनके दिलों को पाक करती है और उन्हें बुराई से रोकती है।
तीसरा गुण जो अल्लाह ने बयान किया है वो है "और उनका मामला आपसी सलाह से चलता है"—यानी वे अपने मामलों में अकेले फ़ैसला नहीं करते, बल्कि आपस में मशविरा करते हैं। चाहे वो दुनियावी मामला हो या दीनी, वे एक-दूसरे की राय को अहमियत देते हैं। ये उनकी शूरा (सलाह) की आदत है जो उन्हें अहंकार और अकेले फ़ैसले करने की बुराई से बचाती है। ये गुण उनके समाज में भाईचारे, एकता और आपसी मोहब्बत को बढ़ाता है।
चौथा गुण—"और जो कुछ हमने उन्हें रोज़ी दी है, उसमें से खर्च करते हैं"—वे अल्लाह की दी हुई नेमतों में से दूसरों के हक़ निकालते हैं। यानी ज़कात अदा करते हैं, रिश्तेदारों पर खर्च करते हैं, ग़रीबों और मिस्कीनों की मदद करते हैं, और अल्लाह की राह में हर नेक काम के लिए अपना माल खर्च करते हैं। वे इस बात को समझते हैं कि माल अल्लाह की अमानत है और उसमें दूसरों का भी हक़ है।
ये चार गुण—अल्लाह की इताअत, नमाज़ की पाबंदी, आपसी मशविरा और फ़ियसबीलिल्लाह खर्च—मिलकर एक मुकम्मल मोमिन की पहचान बनाते हैं। ये वो लोग हैं जो न सिर्फ़ अपने रब से जुड़े हैं बल्कि अपने बंदों से भी भलाई का सुलूक करते हैं।
प्यारे भाइयो और बहनों! ये आयत हमें सिखाती है कि सच्चा ईमान सिर्फ़ ज़ुबान का दावा नहीं, बल्कि अमल का तक़ाज़ा है। अगर हम इन चार गुणों को अपनी ज़िंदगी में अपना लें, तो हमारी ज़िंदगी में बरकत आएगी, हमारे समाज में मुहब्बत और इत्तेहाद पैदा होगा, और अल्लाह की रहमत हमारे साथ होगी। अल्लाह हमें इन गुणों पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 36-40 — अश-शूरा
अनुवाद — अश-शूरा 38
सूरा अश-शूरा आयत 38 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जो अपने परवरदिगार का हुक्म मानते हैं और नमाज़…सूरा आयत 38/53 — अश-शूरा الشورى (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अश-शूरा सुनें, अश-शूरा अनुवाद, अश-शूरा mp3, अश-शूरा pdf. आयत 36–40. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








