अज़-ज़ुखरुफ · 24/89
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुखरुफ
۞ قَالَ أَوَلَوْ جِئْتُكُم بِأَهْدَىٰ مِمَّا وَجَدتُّمْ عَلَيْهِ آبَاءَكُمْ ۖ قَالُوا إِنَّا بِمَا أُرْسِلْتُم بِهِ كَافِرُونَ ۝٢٤
Qaala awa law ji`tukum bi ahdaa mimmaa wajattum `alaihi aabaaa`akum qaalooo innaa bimaaa ursiltum bihee kaafiroon
📖 हिंदी अर्थ
(इस पर) उनके पैग़म्बर ने कहा भी जिस तरीक़े पर तुमने अपने बाप दादाओं को पाया अगरचे मैं तुम्हारे पास इससे बेहतर राहे रास्त पर लाने वाला दीन लेकर आया हूँ (तो भी न मानोगे) वह बोले (कुछ हो मगर) हम तो उस दीन को जो तुम देकर भेजे गए हो मानने वाले नहीं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَوَلَوْ: क्या तब भी? (यहाँ यह प्रश्नवाचक है जो उनके हठ और अंधानुकरण पर आश्चर्य व्यक्त करता है)
  • بِأَهْدَىٰ: अधिक मार्गदर्शक, अधिक सत्य, अधिक सही
  • وَجَدتُّمْ عَلَيْهِ آبَاءَكُمْ: जिस पर तुमने अपने बाप-दादाओं को पाया
  • كَافِرُونَ: इनकार करने वाले, अस्वीकार करने वाले

विस्तृत तफसीर:

जब नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने अपनी क़ौम को एकेश्वरवाद (तौहीद) और सत्य मार्ग की ओर बुलाया, तो उन्होंने वही पुरानी दलील दोहराई जो हर ज़माने के मुशरिकों की पहचान रही है — "हमने अपने बाप-दादाओं को एक रास्ते पर पाया है और हम उसी की पैरवी कर रहे हैं।" यह सुनकर नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने उन्हें उनके इस तर्क की बुनियाद पर ही जवाब दिया और फ़रमाया:

"क्या तुम अपने बाप-दादाओं का अनुसरण उस हालत में भी करोगे, जब मैं तुम्हारे पास उससे बेहतर और अधिक सत्य मार्गदर्शन लेकर आऊँ जो तुमने अपने पूर्वजों पर पाया है?" यानी अगर सच्चाई और हिदायत उनके बाप-दादाओं के रास्ते से अलग कहीं और हो, तो क्या फिर भी अंधानुकरण जारी रखोगे?

यह एक बेहद स्पष्ट और न्यायपूर्ण प्रश्न था, जो उनके हठ और अकर्मण्यता को उजागर करता है। लेकिन उनका जवाब किसी दलील या तर्क पर आधारित नहीं था, बल्कि सिर्फ़ अकड़ और इनकार पर था। उन्होंने कहा: "हम उस चीज़ को मानने से इनकार करते हैं जो आप (रसूल) लेकर आए हो।" यानी उन्होंने न तो दलील सुनी, न सोचा-समझा, बल्कि सीधे सत्य को ठुकरा दिया।

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चाई की कसौटी बाप-दादाओं का रास्ता नहीं, बल्कि क़ुरआन और सुन्नत है। अगर हमारे पूर्वज किसी ग़लत रास्ते पर हों, तो उनका अनुसरण करना हमें जहालत में डाल सकता है। इसलिए हमें हमेशा सत्य को प्राथमिकता देनी चाहिए, चाहे वह हमारे माहौल या ख़ानदान की परंपराओं से कितना ही अलग क्यों न हो।

यह आयत उन लोगों के लिए एक चेतावनी भी है जो सिर्फ़ इसलिए सत्य को नहीं मानते क्योंकि वह उनके पूर्वजों के रास्ते से मेल नहीं खाता। अल्लाह तआला हमें सत्य को पहचानने और उस पर चलने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 22-26 — अज़-ज़ुखरुफ

22بَلْ قَالُوا إِنَّا وَجَدْنَا آبَاءَنَا عَلَىٰ أُمَّةٍ وَإِنَّا عَلَىٰ آثَارِهِم مُّهْتَدُونَ
बल्कि ये लोग तो ये कहते हैं कि हमने अपने बाप दादाओं को एक तरीके पर पाया और हम उनको क़दम ब क़दम ठीक रास्ते पर चले जा रहें हैं
23وَكَذَٰلِكَ مَا أَرْسَلْنَا مِن قَبْلِكَ فِي قَرْيَةٍ مِّن نَّذِيرٍ إِلَّا قَالَ مُتْرَفُوهَا إِنَّا وَجَدْنَا آبَاءَنَا عَلَىٰ أُمَّةٍ وَإِنَّا عَلَىٰ آثَارِهِم مُّقْتَدُونَ
और (ऐ रसूल) इसी तरह हमने तुमसे पहले किसी बस्ती में कोई डराने वाला (पैग़म्बर) नहीं भेजा मगर वहाँ के ख़ुशहाल लोगों ने यही कहा कि हमने अपने बाप दादाओं को एक तरीके पर पाया, और हम यक़ीनी उनके क़दम ब क़दम चले जा रहे हैं
24۞ قَالَ أَوَلَوْ جِئْتُكُم بِأَهْدَىٰ مِمَّا وَجَدتُّمْ عَلَيْهِ آبَاءَكُمْ ۖ قَالُوا إِنَّا بِمَا أُرْسِلْتُم بِهِ كَافِرُونَ
(इस पर) उनके पैग़म्बर ने कहा भी जिस तरीक़े पर तुमने अपने बाप दादाओं को पाया अगरचे मैं तुम्हारे पास इससे बेहतर राहे रास्त पर लाने वाला दीन लेकर आया हूँ (तो भी न मानोगे) वह बोले (कुछ हो मगर) हम तो उस दीन को जो तुम देकर भेजे गए हो मानने वाले नहीं
25فَانتَقَمْنَا مِنْهُمْ ۖ فَانظُرْ كَيْفَ كَانَ عَاقِبَةُ الْمُكَذِّبِينَ
तो हमने उनसे बदला लिया (तो ज़रा) देखो तो कि झुठलाने वालों का क्या अन्जाम हुआ
26وَإِذْ قَالَ إِبْرَاهِيمُ لِأَبِيهِ وَقَوْمِهِ إِنَّنِي بَرَاءٌ مِّمَّا تَعْبُدُونَ
(और वह वख्त याद करो) जब इब्राहीम ने अपने (मुँह बोले) बाप (आज़र) और अपनी क़ौम से कहा कि जिन चीज़ों को तुम लोग पूजते हो मैं यक़ीनन उससे बेज़ार हूँ
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अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 24

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Tuesday, August 18, 2026

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