अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَانتَقَمْنَا – हमने बदला लिया, अर्थात हमने उन्हें दंड दिया।
- عَاقِبَةُ – अंतिम परिणाम, अंजाम।
- الْمُكَذِّبِينَ – झुठलाने वाले, जिन्होंने अल्लाह के रसूलों और उनकी आयतों को नहीं माना।
तफसीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को और पूरी उम्मत को उन पिछली उम्मतों के हालात से आगाह कर रहे हैं, जिन्होंने अल्लाह के रसूलों को झुठलाया और उनकी नसीहतों को कबूल करने से इनकार कर दिया। अल्लाह फरमाता है कि जब ये लोग हठ और सरकशी पर अड़े रहे और अपने नबियों की दावत को नकारते रहे, तो हमने उनसे बदला लिया — किसी को ज़मीन में धँसा दिया, किसी को पानी में ग़रक़ कर दिया, किसी पर आसमानी अज़ाब भेजा, और किसी को तबाह-ओ-बर्बाद कर दिया। यह हमारी क़ुदरत का नमूना है कि हम जब चाहते हैं, उन्हें पकड़ लेते हैं, और कोई उन्हें बचाने वाला नहीं होता।
फिर अल्लाह तआला फरमाता है: "देखो, झुठलाने वालों का अंजाम कैसा हुआ!" यानी जिन लोगों ने हक़ को नकारा और रसूलों की नाफ़रमानी की, उनका आख़िरी नतीजा हलाकत और रुसवाई के सिवा कुछ न था। उनकी ताक़त, उनके खज़ाने, उनकी औलाद और उनकी बड़ाई — कुछ भी उनके काम न आया जब अल्लाह का अज़ाब आया। यह एक सबक़ है कि दुनिया में जो भी अल्लाह के दीन का मुक़ाबला करता है, उसका अंजाम बुरा होता है, चाहे वह कितना ही ताक़तवर क्यों न हो।
यह आयत क़ुरैश के काफ़िरों के लिए भी एक सख़्त तनबीह (चेतावनी) है कि अगर वे अपने नबी ﷺ को झुठलाने और उनकी दावत को रद्द करने पर क़ायम रहे, तो उन पर भी वही अज़ाब आ सकता है जो पिछली उम्मतों पर आया। अल्लाह ने उन्हें मोहलत दी है, लेकिन उन्हें यह नहीं समझना चाहिए कि अल्लाह उन्हें भूल गया है।
दावती पहलू:
यह आयत हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम अपने नबी ﷺ की लाई हुई हिदायत को कभी हल्का न समझें। अल्लाह का दीन ही सच्चा रास्ता है, और जो लोग इस रास्ते को छोड़कर अपनी मनमर्ज़ी पर चलते हैं, वे अंजाम में हमेशा नाकाम रहे हैं। हमें चाहिए कि हम क़ुरआन और सुन्नत पर अमल करें, अपने गुनाहों से तौबा करें, और अल्लाह की रहमत की तरफ लौटें। अल्लाह बड़ा मेहरबान है — जो उसकी तरफ आता है, उसे वह अपनी रहमत से नवाज़ता है, और जो उससे मुँह मोड़ता है, उसका अंजाम बुरा होता है। हमें चाहिए कि हम इतिहास से सबक़ लें और अपने आप को अल्लाह के अज़ाब से बचाएँ, क्योंकि अल्लाह की पकड़ बहुत सख़्त है, लेकिन उसकी रहमत उससे भी बड़ी है।
📜 आयत 23-27 — अज़-ज़ुखरुफ
अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 25
सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 25 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो हमने उनसे बदला लिया (तो ज़रा) देखो तो कि…सूरा आयत 25/89 — अज़-ज़ुखरुफ الزخرف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अज़-ज़ुखरुफ सुनें, अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, अज़-ज़ुखरुफ mp3, अज़-ज़ुखरुफ pdf. आयत 23–27. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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