Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مِنكُم (तुममें से): यहाँ अर्थ है "तुम्हारे स्थान पर" या "तुम्हारे बदले"।
- يَخْلُفُونَ (वे उत्तराधिकारी बनते): अर्थात एक के बाद एक आते जाते हैं, पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ते हैं।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में अपनी पूर्ण शक्ति और कुदरत का बयान कर रहे हैं। वह फ़रमाते हैं कि यदि हम चाहते तो तुम इंसानों को ही नष्ट करके तुम्हारे स्थान पर फ़रिश्तों को धरती पर बसा देते, जो तुम्हारी जगह ले लेते और एक दूसरे के उत्तराधिकारी बनते चले जाते। यानी तुम्हारा अस्तित्व ही मिटा कर हम फ़रिश्तों की एक नई उम्मत पैदा कर सकते थे, जो हमारी इबादत में लगे रहते और कभी हमारी नाफ़रमानी न करते।
यह बात उस समय के काफ़िरों के उस दावे के जवाब में कही गई है, जब उन्होंने कहा था कि यदि अल्लाह चाहता तो फ़रिश्तों को भेजता, और वे फ़रिश्तों को अल्लाह की संतान कहने लगे थे। अल्लाह फ़रमाता है कि फ़रिश्ते तो हमारे आज्ञाकारी बंदे हैं, और यदि हम चाहते तो तुम्हें ही ख़त्म करके उन्हें तुम्हारा उत्तराधिकारी बना देते। यह तुम्हारी अहमियत नहीं है कि हम तुम्हारी वजह से अपने फ़ैसले बदल दें।
इस आयत में इंसान को यह सबक़ दिया गया है कि उसे अपनी ताक़त और वजूद पर घमंड नहीं करना चाहिए। अल्लाह की कुदरत के आगे इंसान की हैसियत बहुत छोटी है। यदि अल्लाह चाहे तो किसी भी क्षण इंसान को मिटा कर उसकी जगह कोई और मख़लूक़ पैदा कर सकता है। यह बात इंसान के लिए एक चेतावनी है कि वह अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करे और उसकी इबादत में लगा रहे।
दावत और नसीहत:
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें अल्लाह की अज़ीम शक्ति की याद दिलाती है। जिस अल्लाह के पास यह कुदरत है कि वह पूरी इंसानी नस्ल को ख़त्म करके फ़रिश्तों को ज़मीन पर बसा दे, उसी अल्लाह के पास हमारी हर ज़रूरत को पूरा करने की ताक़त भी है। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएँ, उसकी इबादत को अपना सबसे बड़ा काम समझें और उसके दिए हुए इस्लाम के सुंदर मार्ग पर चलते हुए अपनी किस्मत को संवारें। अल्लाह ने हमें इंसान बनाकर, अक़्ल देकर और क़ुरआन भेजकर बहुत बड़ी नेमत दी है — इस नेमत की क़द्र करें और अल्लाह के शुक्रगुज़ार बनें।
📜 आयत 58-62 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 60
सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 60 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और अगर हम चाहते तो तुम ही लोगों में से…सूरा आयत 60/89 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ الزخرف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अज़-ज़ुखरुफ सुनें, सूरा अज़-ज़ुखरुफ अनुवाद, सूरा अज़-ज़ुखरुफ mp3, सूरा अज़-ज़ुखरुफ pdf. आयत 58–62. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अज़-ज़ुखरुफ
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


