अज़-ज़ुखरुफ · 59/89
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
إِنْ هُوَ إِلَّا عَبْدٌ أَنْعَمْنَا عَلَيْهِ وَجَعَلْنَاهُ مَثَلًا لِّبَنِي إِسْرَائِيلَ ۝٥٩
In huwa illaa `abdun an`amnaa `alaihi wa ja`alnaahu masalal li Baneee Israaa`eel
📖 हिंदी अर्थ
बल्कि (हक़ तो यह है कि) ये लोग हैं झगड़ालू ईसा तो बस हमारे एक बन्दे थे जिन पर हमने एहसान किया (नबी बनाया और मौजिज़े दिये) और उनको हमने बनी इसराईल के लिए (अपनी कुदरत का) नमूना बनाया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • إِنْ هُوَ إِلَّا – वह और कुछ नहीं है
  • عَبْدٌ – बंदा (अल्लाह का सेवक)
  • أَنْعَمْنَا عَلَيْهِ – हमने उस पर कृपा की (अनुग्रह किया)
  • مَثَلًا – एक निशानी/उदाहरण (सबक और सबूत)
  • لِبَنِي إِسْرَائِيلَ – बनी इस्राईल (इस्राईल की संतान) के लिए

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) की असलियत बयान कर रहा है, ताकि लोग उनके बारे में ग़लत अक़ीदे न रखें। अल्लाह फ़रमाता है कि ईसा (अलैहिस्सलाम) कोई ईश्वर या अल्लाह का बेटा नहीं हैं, बल्कि वह सिर्फ़ अल्लाह के एक नेक बंदे और पैग़म्बर थे। अल्लाह ने उन पर अपनी विशेष कृपा की और उन्हें नबुव्वत (पैग़म्बरी) का महान पद प्रदान किया।

अल्लाह ने उन्हें बनी इस्राईल के लिए एक "निशानी" और "सबक" बनाया। यानी उनका बिना पिता के पैदा होना अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) की एक अद्भुत निशानी थी, जिससे लोग समझ सकें कि अल्लाह जो चाहता है, वह करता है। जिस तरह अल्लाह ने आदम (अलैहिस्सलाम) को बिना माँ-बाप के पैदा किया, उसी तरह ईसा (अलैहिस्सलाम) को बिना पिता के पैदा किया। यह अल्लाह की क़ुदरत का सबूत है, न कि ईसा (अलैहिस्सलाम) के ख़ुदा होने का।

यह आयत हमें सिखाती है कि हम किसी इंसान को ख़ुदा न बनाएं, चाहे वह कितना ही बड़ा पैग़म्बर क्यों न हो। सारे पैग़म्बर अल्लाह के बंदे थे और उन्होंने अल्लाह की इबादत की। ईसा (अलैहिस्सलाम) भी अल्लाह के बंदे थे, उन्होंने भी अल्लाह की इबादत की और लोगों को अल्लाह की तरफ़ बुलाया।

यह आयत हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम अल्लाह की क़ुदरत पर ईमान रखें और उसकी निशानियों से सबक हासिल करें। अल्लाह ने ईसा (अलैहिस्सलाम) को एक निशानी बनाकर यह बताया कि वह हर चीज़ पर क़ादिर है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह के बंदे बनकर रहें, उसकी इबादत करें और उसके रास्ते पर चलें। यही सच्ची कामयाबी है।



📜 आयत 57-61 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ

57۞ وَلَمَّا ضُرِبَ ابْنُ مَرْيَمَ مَثَلًا إِذَا قَوْمُكَ مِنْهُ يَصِدُّونَ
और(ऐ रसूल) जब मरियम के बेटे (ईसा) की मिसाल बयान की गयी तो उससे तुम्हारी क़ौम के लोग खिलखिला कर हंसने लगे
58وَقَالُوا أَآلِهَتُنَا خَيْرٌ أَمْ هُوَ ۚ مَا ضَرَبُوهُ لَكَ إِلَّا جَدَلًا ۚ بَلْ هُمْ قَوْمٌ خَصِمُونَ
और बोल उठे कि भला हमारे माबूद अच्छे हैं या वह (ईसा) उन लोगों ने जो ईसा की मिसाल तुमसे बयान की है तो सिर्फ झगड़ने को
59إِنْ هُوَ إِلَّا عَبْدٌ أَنْعَمْنَا عَلَيْهِ وَجَعَلْنَاهُ مَثَلًا لِّبَنِي إِسْرَائِيلَ
बल्कि (हक़ तो यह है कि) ये लोग हैं झगड़ालू ईसा तो बस हमारे एक बन्दे थे जिन पर हमने एहसान किया (नबी बनाया और मौजिज़े दिये) और उनको हमने बनी इसराईल के लिए (अपनी कुदरत का) नमूना बनाया
60وَلَوْ نَشَاءُ لَجَعَلْنَا مِنكُم مَّلَائِكَةً فِي الْأَرْضِ يَخْلُفُونَ
और अगर हम चाहते तो तुम ही लोगों में से (किसी को) फ़रिश्ते बना देते जो तुम्हारी जगह ज़मीन में रहते
61وَإِنَّهُ لَعِلْمٌ لِّلسَّاعَةِ فَلَا تَمْتَرُنَّ بِهَا وَاتَّبِعُونِ ۚ هَٰذَا صِرَاطٌ مُّسْتَقِيمٌ
और वह तो यक़ीनन क़यामत की एक रौशन दलील है तुम लोग इसमें हरगिज़ यक़ न करो और मेरी पैरवी करो यही सीधा रास्ता है
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीअवतरण स्थान
59आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 59

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Saturday, October 3, 2026

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