अज़-ज़ुखरुफ · 61/89
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ुखरुफ
وَإِنَّهُ لَعِلْمٌ لِّلسَّاعَةِ فَلَا تَمْتَرُنَّ بِهَا وَاتَّبِعُونِ ۚ هَٰذَا صِرَاطٌ مُّسْتَقِيمٌ ۝٦١
Wa innahoo la`ilmul lis Saa`ati fala tamtarunna bihaa wattabi`oon; haazaa Siraatum Mustaqeem
📖 हिंदी अर्थ
और वह तो यक़ीनन क़यामत की एक रौशन दलील है तुम लोग इसमें हरगिज़ यक़ न करो और मेरी पैरवी करो यही सीधा रास्ता है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَعِلْمٌ لِلسَّاعَةِ: यानी क़यामत की निशानी और उसके क़रीब आने की दलील।
  • فَلَا تَمْتَرُنَّ بِهَا: उस (क़यामत) में कभी शक न करो।
  • وَاتَّبِعُونِ: मेरी बात मानो और मेरे पीछे चलो।
  • صِرَاطٌ مُسْتَقِيمٌ: सीधा और सच्चा रास्ता, जिसमें कोई टेढ़ापन नहीं।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ईसा (अलैहिस्सलाम) का आख़िरी ज़माने में नुज़ूल (उतरना) क़यामत की बड़ी निशानियों में से एक है। यह उस घड़ी के क़रीब आने की स्पष्ट दलील है, जब पूरी दुनिया का हिसाब होगा और हर इंसान को उसके अमल का बदला मिलेगा।

अल्लाह तआला फ़रमाता है: "तुम लोग क़यामत के आने में कभी शक मत करो, क्योंकि यह ज़रूर आने वाली है। मेरी बात मानो और मेरे बताए हुए रास्ते पर चलो, क्योंकि यही सीधा रास्ता है, जो तुम्हें जन्नत तक पहुँचाएगा। इस रास्ते में कोई कमी नहीं, कोई टेढ़ापन नहीं — यह वही रास्ता है जो अल्लाह के नबियों का रास्ता रहा है।"

यह आयत हमें सिखाती है कि हमें क़यामत पर पक्का यक़ीन रखना चाहिए और उस दिन के लिए तैयारी करनी चाहिए। जो लोग इस पर शक करते हैं, वे अपने आपको बड़े नुक़सान में डालते हैं।

दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला ने अपने रसूलों के ज़रिए हमें रास्ता दिखाया है। ईसा (अलैहिस्सलाम) का ज़िक्र करके अल्लाह हमें याद दिलाता है कि उसकी हर बात सच है और उसका वादा ज़रूर पूरा होगा। जब हम क़यामत पर यक़ीन रखते हैं, तो हमारा अमल सुधर जाता है, हम नेकी की तरफ बढ़ते हैं और गुनाहों से बचते हैं। यही सीधा रास्ता है — अल्लाह और उसके रसूल की बात मानना। यही रास्ता हमें सुकून देता है, दुनिया में भी और आख़िरत में भी। अल्लाह तआला हम सबको इस सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 59-63 — सूरा अज़-ज़ुखरुफ

59إِنْ هُوَ إِلَّا عَبْدٌ أَنْعَمْنَا عَلَيْهِ وَجَعَلْنَاهُ مَثَلًا لِّبَنِي إِسْرَائِيلَ
बल्कि (हक़ तो यह है कि) ये लोग हैं झगड़ालू ईसा तो बस हमारे एक बन्दे थे जिन पर हमने एहसान किया (नबी बनाया और मौजिज़े दिये) और उनको हमने बनी इसराईल के लिए (अपनी कुदरत का) नमूना बनाया
60وَلَوْ نَشَاءُ لَجَعَلْنَا مِنكُم مَّلَائِكَةً فِي الْأَرْضِ يَخْلُفُونَ
और अगर हम चाहते तो तुम ही लोगों में से (किसी को) फ़रिश्ते बना देते जो तुम्हारी जगह ज़मीन में रहते
61وَإِنَّهُ لَعِلْمٌ لِّلسَّاعَةِ فَلَا تَمْتَرُنَّ بِهَا وَاتَّبِعُونِ ۚ هَٰذَا صِرَاطٌ مُّسْتَقِيمٌ
और वह तो यक़ीनन क़यामत की एक रौशन दलील है तुम लोग इसमें हरगिज़ यक़ न करो और मेरी पैरवी करो यही सीधा रास्ता है
62وَلَا يَصُدَّنَّكُمُ الشَّيْطَانُ ۖ إِنَّهُ لَكُمْ عَدُوٌّ مُّبِينٌ
और (कहीं) शैतान तुम लोगों को (इससे) रोक न दे वही यक़ीनन तुम्हारा खुल्लम खुल्ला दुश्मन है
63وَلَمَّا جَاءَ عِيسَىٰ بِالْبَيِّنَاتِ قَالَ قَدْ جِئْتُكُم بِالْحِكْمَةِ وَلِأُبَيِّنَ لَكُم بَعْضَ الَّذِي تَخْتَلِفُونَ فِيهِ ۖ فَاتَّقُوا اللَّهَ وَأَطِيعُونِ
और जब ईसा वाज़ेए व रौशन मौजिज़े लेकर आये तो (लोगों से) कहा मैं तुम्हारे पास दानाई (की किताब) लेकर आया हूँ ताकि बाज़ बातें जिन में तुम लोग एख्तेलाफ करते थे तुमको साफ-साफ बता दूँ तो तुम लोग ख़ुदा से डरो और मेरा कहा मानो
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीअवतरण स्थान
61आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 61

सूरा अज़-ज़ुखरुफ आयत 61 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और वह तो यक़ीनन क़यामत की एक रौशन दलील है…

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Sunday, October 4, 2026

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