अज़-ज़ुखरुफ · 8/89
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुखरुफ
فَأَهْلَكْنَا أَشَدَّ مِنْهُم بَطْشًا وَمَضَىٰ مَثَلُ الْأَوَّلِينَ ۝٨
Fa ahlaknaaa ashadda minhum batshanw wa madaa masalul lawwaleen
📖 हिंदी अर्थ
तो उनमें से जो ज्यादा ज़ोरावर थे तो उनको हमने हलाक कर मारा और (दुनिया में) अगलों के अफ़साने जारी हो गए

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بَطْشًا: पकड़, शक्ति और सामर्थ्य।
  • مَضَىٰ مَثَلُ الْأَوَّلِينَ: पहले लोगों की (बुरी) मिसाल गुज़र चुकी है, यानी उनका अंजाम सामने आ चुका है।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आपके क़ौम (क़ुरैश) से पहले भी कई उम्मतें गुज़र चुकी थीं, जिनके पास अल्लाह ने अपने नबी भेजे। लेकिन जब भी कोई नबी उनके पास आया, उन्होंने उसका मज़ाक उड़ाया और उसे झुठलाया—ठीक उसी तरह जैसे आपकी क़ौम आपके साथ कर रही है। फिर अल्लाह ने उन काफ़िरों को हलाक कर दिया, जो ताकत और पकड़ में आपकी क़ौम से कहीं ज़्यादा सख्त और मज़बूत थे। उनके पास बड़ी सेनाएँ, ऊँचे किले और ज़बरदस्त सामर्थ्य था, लेकिन अल्लाह की पकड़ से कोई बच नहीं सका। उनका अंजाम इतना मशहूर हुआ कि उनकी कहानियाँ और उनकी सज़ा की मिसालें लोगों के बीच आम हो गईं—जैसे नूह की क़ौम, आद, समूद, लूत की क़ौम और मदयन के लोग। उन सबका विनाश एक सबक़ बनकर रह गया।

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को तसल्ली दे रहा है कि जिस तरह पहले की उम्मतों ने अपने नबियों का मज़ाक उड़ाया और अल्लाह ने उन्हें हलाक कर दिया, उसी तरह आपकी क़ौम की सख्ती और उनका उपहास भी अल्लाह की नज़र में है। अल्लाह उन्हें उनके कर्मों का बदला ज़रूर देगा। यह एक बड़ी खुशखबरी है कि सच्चाई हमेशा बाक़ी रहती है और झूठ मिट जाता है।

दावत और नसीहत:

इस आयत से हमें सीख मिलती है कि अल्लाह की शक्ति के आगे कोई ताकतवर नहीं ठहर सकता। जो लोग आज नबी ﷺ और उनके पैग़ाम का मज़ाक उड़ाते हैं, उन्हें देख लेना चाहिए कि इतिहास में ताकतवर से ताकतवर क़ौमें किस तरह बर्बाद हुईं। यह हमारे लिए चेतावनी है कि हम अपने जीवन में अल्लाह के हुक्मों को हल्का न समझें, और नबी ﷺ की सुन्नत को अपनाएँ। साथ ही, यह हमें सब्र और भरोसे की तालीम देती है—जब हम सच्चाई पर हों, तो मुख़ालिफ़ों के तंज़ और उपहास से घबराना नहीं चाहिए, क्योंकि अल्लाह हमेशा अपने नेक बंदों के साथ होता है और उनकी मदद करता है। आइए, हम इस आयत से सबक़ लें और अपने ईमान को मज़बूत करें, क्योंकि अल्लाह का वादा सच्चा है—सच्चाई की जीत और झूठ की हार तय है।



📜 आयत 6-10 — अज़-ज़ुखरुफ

6وَكَمْ أَرْسَلْنَا مِن نَّبِيٍّ فِي الْأَوَّلِينَ
और हमने अगले लोगों को बहुत से पैग़म्बर भेजे थे
7وَمَا يَأْتِيهِم مِّن نَّبِيٍّ إِلَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
और कोई पैग़म्बर उनके पास ऐसा नहीं आया जिससे इन लोगों ने ठट्ठे नहीं किए हो
8فَأَهْلَكْنَا أَشَدَّ مِنْهُم بَطْشًا وَمَضَىٰ مَثَلُ الْأَوَّلِينَ
तो उनमें से जो ज्यादा ज़ोरावर थे तो उनको हमने हलाक कर मारा और (दुनिया में) अगलों के अफ़साने जारी हो गए
9وَلَئِن سَأَلْتَهُم مَّنْ خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ لَيَقُولُنَّ خَلَقَهُنَّ الْعَزِيزُ الْعَلِيمُ
और (ऐ रसूल) अगर तुम उनसे पूछो कि सारे आसमान व ज़मीन को किसने पैदा किया तो वह ज़रूर कह देंगे कि उनको बड़े वाक़िफ़कार ज़बरदस्त (ख़ुदा ने) पैदा किया है
10الَّذِي جَعَلَ لَكُمُ الْأَرْضَ مَهْدًا وَجَعَلَ لَكُمْ فِيهَا سُبُلًا لَّعَلَّكُمْ تَهْتَدُونَ
जिसने तुम लोगों के वास्ते ज़मीन का बिछौना बनाया और (फिर) उसमें तुम्हारे नफ़े के लिए रास्ते बनाए ताकि तुम राह मालूम करो
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अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 8

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Tuesday, August 18, 2026

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