अज़-ज़ुखरुफ · 7/89
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ुखरुफ
وَمَا يَأْتِيهِم مِّن نَّبِيٍّ إِلَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ ۝٧
Wa maa yaateehim min Nabiyyin illaa kaanoo bihee yasahzi`oon
📖 हिंदी अर्थ
और कोई पैग़म्बर उनके पास ऐसा नहीं आया जिससे इन लोगों ने ठट्ठे नहीं किए हो
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَسْتَهْزِئُونَ: वे मज़ाक उड़ाते थे, उपहास करते थे।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला ने पहले ज़मानों में भी कई नबी भेजे। हर ज़माने में, हर क़ौम की तरफ़, अल्लाह के रसूल आए। लेकिन उन क़ौमों का हाल यह था कि जब भी कोई नबी उनके पास आया, उन्होंने उसका मज़ाक उड़ाया और उसे झुठलाया। वे उन पर हँसते थे, उन्हें बुरा भला कहते थे और उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लेते थे।

यह सिर्फ़ एक ज़माने या एक क़ौम की बात नहीं है, बल्कि यह एक सुन्नत (परंपरा) बन गई थी कि नबियों के साथ उनकी क़ौमें मज़ाक करती थीं। हज़रत नूह से लेकर हज़रत शुऐब तक, हर नबी को अपनी क़ौम से इसी तरह की प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ा। वे कहते थे कि यह आदमी हमारे जैसा ही इंसान है, यह हमें क्यों सिखाने आया है? वे नबियों की बातों को हँसी-मज़ाक में उड़ा देते थे।

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ को तसल्ली दे रहे हैं कि आप अकेले नहीं हैं जिनका मज़ाक उड़ाया जा रहा है। आपसे पहले जितने भी नबी आए, उनके साथ भी उनकी क़ौमों ने यही सलूक किया। यह कोई नई बात नहीं है। मक्का के काफ़िरों ने जब आपको देखा तो कहा कि क्या यही वह आदमी है जिस पर अल्लाह की वही आती है? उन्होंने आपकी बातों को झुठलाया और आप पर हँसे। लेकिन अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि इन पहले क़ौमों का अंजाम देख लो — वे सब हलाक कर दी गईं, चाहे वे कितनी भी ताक़तवर और ज़बरदस्त क्यों न रही हों।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी सीख है। जब हम देखते हैं कि आज भी कुछ लोग इस्लाम, क़ुरआन और नबी ﷺ का मज़ाक उड़ाते हैं, तो हमें यह समझना चाहिए कि यह कोई नई बात नहीं। अल्लाह के दीन की राह हमेशा से यही रही है — सच्चे लोगों को परीक्षा से गुज़रना पड़ता है। लेकिन अल्लाह का वादा है कि सच्चाई ही जीतेगी। जिन लोगों ने नबियों का मज़ाक उड़ाया, उनका अंजाम बुरा हुआ, और जो नबियों पर ईमान लाए, वे कामयाब हुए।

आज हमें चाहिए कि हम अपने नबी ﷺ की मुहब्बत को अपने दिलों में मज़बूत करें। जब कोई हमारे नबी का मज़ाक उड़ाए, तो हमें ग़ुस्सा आना चाहिए, लेकिन साथ ही हमें अपने अमल से यह साबित करना चाहिए कि हम सच्चे मुसलमान हैं। हमें अपनी ज़िंदगी को नबी ﷺ की सुन्नत के मुताबिक बनाना चाहिए। यही सबसे बड़ा जवाब है उन लोगों को जो मज़ाक उड़ाते हैं। अल्लाह तआला हमें सच्चाई पर साबित-क़दम रखे और हमें अपने नबी ﷺ की सच्ची मुहब्बत अता फ़रमाए। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 5-9 — अज़-ज़ुखरुफ

5أَفَنَضْرِبُ عَنكُمُ الذِّكْرَ صَفْحًا أَن كُنتُمْ قَوْمًا مُّسْرِفِينَ
भला इस वजह से कि तुम ज्यादती करने वाले लोग हो हम तुमको नसीहत करने से मुँह मोड़ेंगे (हरगिज़ नहीं)
6وَكَمْ أَرْسَلْنَا مِن نَّبِيٍّ فِي الْأَوَّلِينَ
और हमने अगले लोगों को बहुत से पैग़म्बर भेजे थे
7وَمَا يَأْتِيهِم مِّن نَّبِيٍّ إِلَّا كَانُوا بِهِ يَسْتَهْزِئُونَ
और कोई पैग़म्बर उनके पास ऐसा नहीं आया जिससे इन लोगों ने ठट्ठे नहीं किए हो
8فَأَهْلَكْنَا أَشَدَّ مِنْهُم بَطْشًا وَمَضَىٰ مَثَلُ الْأَوَّلِينَ
तो उनमें से जो ज्यादा ज़ोरावर थे तो उनको हमने हलाक कर मारा और (दुनिया में) अगलों के अफ़साने जारी हो गए
9وَلَئِن سَأَلْتَهُم مَّنْ خَلَقَ السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ لَيَقُولُنَّ خَلَقَهُنَّ الْعَزِيزُ الْعَلِيمُ
और (ऐ रसूल) अगर तुम उनसे पूछो कि सारे आसमान व ज़मीन को किसने पैदा किया तो वह ज़रूर कह देंगे कि उनको बड़े वाक़िफ़कार ज़बरदस्त (ख़ुदा ने) पैदा किया है
अज़-ज़ुखरुफकुरान सूची
89आयत
मक्कीRevelation
7आयत

अनुवाद — अज़-ज़ुखरुफ 7

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Tuesday, August 18, 2026

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