अद-दुखान · 4/59
अनुवाद उच्चारण — अद-दुखान
فِيهَا يُفْرَقُ كُلُّ أَمْرٍ حَكِيمٍ ۝٤
Feehaa yufraqu kullu amrin hakeem
📖 हिंदी अर्थ
इसी रात को तमाम दुनिया के हिक़मत व मसलेहत के (साल भर के) काम फ़ैसले किये जाते हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فِيهَا (उसमें): इस मुबारक रात में।
  • يُفْرَقُ (अलग किया जाता है): फैसला किया जाता है, निर्धारित किया जाता है।
  • كُلُّ أَمْرٍ (हर मामला): हर कार्य और हर घटना।
  • حَكِيمٍ (हिकमत वाला): जो पूर्ण रूप से मज़बूत, सटीक और हिकमत पर आधारित हो, जिसमें कोई कमी या बदलाव न हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस मुबारक रात (शब-ए-क़द्र) का ज़िक्र करते हुए फ़रमाया कि इसी रात में हर उस मामले का फ़ैसला किया जाता है जो हिकमत और मस्लिहत पर आधारित हो। यानी लौह-ए-महफ़ूज़ से जो कुछ भी अल्लाह के फ़रिश्तों को सौंपा जाता है, वह सब कुछ इसी रात में तय होता है — जैसे आने वाले साल में किसकी रोज़ी कितनी होगी, किसकी उम्र कितनी है, कौन पैदा होगा, कौन मरेगा, कौन सी खुशी या ग़म आएगा, कौन सा अच्छा या बुरा वाक़िया रू-नुमा होगा — यह सब कुछ इसी रात में अल्लाह के हुक्म से मुक़र्रर कर दिया जाता है।

यह फ़ैसला कोई अंधा या बेहिकमत नहीं होता, बल्कि हर फ़ैसला अल्लाह की गहरी हिकमत, उसके इल्म और उसकी मस्लिहत के मुताबिक़ होता है। न इसमें कोई बदलाव आ सकता है और न ही कोई कमी। यह सब कुछ अल्लाह के इल्म और उसकी मर्ज़ी से होता है, क्योंकि वही सब कुछ जानता है और वही सब कुछ करता है।

इस आयत से हमें यह समझना चाहिए कि हमारी ज़िंदगी का हर पहलू — चाहे वह रोज़ी हो, उम्र हो, या कोई और मामला — अल्लाह के हाथ में है। वही तय करता है कि कब, क्या और कैसे होगा। इसलिए हमें चाहिए कि हम अपने मामलों को अल्लाह के सुपुर्द कर दें, उस पर भरोसा रखें और उससे ही माँगें। यह रात हमारे लिए रहमत और बरकत की रात है, इसलिए हमें इसका भरपूर फ़ायदा उठाना चाहिए — नमाज़, दुआ, तिलावत और इस्तिग़फ़ार में गुज़ारना चाहिए, ताकि अल्लाह हमारे लिए भलाई का फ़ैसला करे और हमें अपनी रहमत से नवाज़े।

याद रखिए! अल्लाह का हर फ़ैसला हिकमत पर आधारित है। कभी हमें कोई बात बुरी लगती है, लेकिन उसमें हमारी भलाई होती है; और कभी कोई चीज़ अच्छी लगती है, लेकिन उसमें हमारी बुराई होती है। इसलिए हर हाल में अल्लाह पर भरोसा रखें और उसकी रज़ा पर राज़ी रहें। यही सच्चे मोमिन की पहचान है।



📜 आयत 2-6 — अद-दुखान

2وَالْكِتَابِ الْمُبِينِ
वाज़ेए व रौशन किताब (कुरान) की क़सम
3إِنَّا أَنزَلْنَاهُ فِي لَيْلَةٍ مُّبَارَكَةٍ ۚ إِنَّا كُنَّا مُنذِرِينَ
हमने इसको मुबारक रात (शबे क़द्र) में नाज़िल किया बेशक हम (अज़ाब से) डराने वाले थे
4فِيهَا يُفْرَقُ كُلُّ أَمْرٍ حَكِيمٍ
इसी रात को तमाम दुनिया के हिक़मत व मसलेहत के (साल भर के) काम फ़ैसले किये जाते हैं
5أَمْرًا مِّنْ عِندِنَا ۚ إِنَّا كُنَّا مُرْسِلِينَ
यानि हमारे यहाँ से हुक्म होकर (बेशक) हम ही (पैग़म्बरों के) भेजने वाले हैं
6رَحْمَةً مِّن رَّبِّكَ ۚ إِنَّهُ هُوَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ
ये तुम्हारे परवरदिगार की मेहरबानी है, वह बेशक बड़ा सुनने वाला वाक़िफ़कार है
अद-दुखानकुरान सूची
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अनुवाद — अद-दुखान 4

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Tuesday, August 18, 2026

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