अद-दुखान · 33/59
अनुवाद उच्चारण — सूरा अद-दुखान
وَآتَيْنَاهُم مِّنَ الْآيَاتِ مَا فِيهِ بَلَاءٌ مُّبِينٌ ۝٣٣
Wa aatainaahum minal aayaati maa feehi balaaa`um mubeen
📖 हिंदी अर्थ
और हमने उनको ऐसी निशानियाँ दी थीं जिनमें (उनकी) सरीही आज़माइश थी

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • आयात: निशानियाँ, चमत्कार, प्रमाण
  • बलाउन: परीक्षण, आज़माइश, इम्तिहान
  • मुबीन: स्पष्ट, खुला हुआ, ज़ाहिर

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने बनी इसराईल को मूसा (अलैहिस्सलाम) के ज़रिए ऐसी कई निशानियाँ और चमत्कार दिए, जिनमें उनके लिए स्पष्ट परीक्षण था। ये निशानियाँ दो तरह की थीं—कुछ में राहत और आराम था, जैसे मन्न (गुज़र-ए-असल) और सलवा (बटेर का मांस), पानी के चश्मे, बादल की छाया; और कुछ में सख्ती और कड़ी आज़माइश थी, जैसे समुद्र का चीरना, फिरौन का डूबना, और उन पर आने वाली मुसीबतें।

ये सब कुछ इसलिए था कि देखा जाए कि कौन अल्लाह का शुक्र अदा करता है और कौन नाशुक्री करता है। जब उन्हें राहत मिलती तो वे अल्लाह से मुँह मोड़ लेते, और जब मुसीबत आती तो मूसा (अलैहिस्सलाम) के पास दौड़े आते। यही उनका इम्तिहान था—क्या वे इन निशानियों को देखकर अल्लाह पर ईमान लाएँगे और उसके आभारी होंगे?

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की तरफ से आने वाली हर नेमत और हर मुसीबत हमारे लिए एक परीक्षण है। जब हमें सुख-समृद्धि मिले तो हमें शुक्रगुज़ार होना चाहिए, और जब दुख-तकलीफ़ आए तो सब्र करना चाहिए। अल्लाह अपने बंदों को इसलिए आज़माता है ताकि उनका दर्जा बुलंद करे और उन्हें जन्नत के क़रीब लाए।

इसलिए हमें चाहिए कि अपनी ज़िंदगी के हर पल को अल्लाह की रज़ा के लिए गुज़ारें, क्योंकि यही दुनिया तो बस एक इम्तिहान-गाह है, और कामयाबी उसी की है जो इस इम्तिहान में अल्लाह का फ़रमाँबरदार बनकर निकले। अल्लाह हमें सच्चे दिल से शुक्रगुज़ार बंदे बनाए और हमें उन लोगों में शामिल करे जो उसकी निशानियों पर ईमान लाते हैं। आमीन।



📜 आयत 31-35 — सूरा अद-दुखान

31مِن فِرْعَوْنَ ۚ إِنَّهُ كَانَ عَالِيًا مِّنَ الْمُسْرِفِينَ
वह बेशक सरकश और हद से बाहर निकल गया था
32وَلَقَدِ اخْتَرْنَاهُمْ عَلَىٰ عِلْمٍ عَلَى الْعَالَمِينَ
और हमने बनी इसराईल को समझ बूझ कर सारे जहॉन से बरगुज़ीदा किया था
33وَآتَيْنَاهُم مِّنَ الْآيَاتِ مَا فِيهِ بَلَاءٌ مُّبِينٌ
और हमने उनको ऐसी निशानियाँ दी थीं जिनमें (उनकी) सरीही आज़माइश थी
34إِنَّ هَٰؤُلَاءِ لَيَقُولُونَ
ये (कुफ्फ़ारे मक्का) (मुसलमानों से) कहते हैं
35إِنْ هِيَ إِلَّا مَوْتَتُنَا الْأُولَىٰ وَمَا نَحْنُ بِمُنشَرِينَ
कि हमें तो सिर्फ एक बार मरना है और फिर हम दोबारा (ज़िन्दा करके) उठाए न जाएँगे
अद-दुखानकुरान सूची
59आयत
मक्कीअवतरण स्थान
33आयत

अनुवाद — अद-दुखान 33

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Thursday, October 1, 2026

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