अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- اخْتَرْنَاهُمْ: हमने उन्हें चुन लिया, उन्हें विशेष सम्मान दिया।
- عَلَى عِلْمٍ: हमारी ओर से पूर्ण ज्ञान के साथ, अर्थात हम उनकी स्थिति और गुणों से अवगत थे।
- عَلَى الْعَالَمِينَ: उनके समय के सभी लोगों पर, अर्थात उनके युग के सारे संसारों पर।
विस्तृत व्याख्या:
अल्लाह तआला इस आयत में बनी इस्राईल (इस्राईल की संतान) की उस विशेष स्थिति का उल्लेख कर रहे हैं, जो उन्होंने उन्हें प्रदान की थी। अल्लाह कहते हैं कि हमने बनी इस्राईल को अपने ज्ञान के आधार पर चुना और उन्हें उनके समय के सभी लोगों पर श्रेष्ठता दी। यह चुनाव अल्लाह की ओर से था, जो उनकी अपनी योग्यता, उनके पैगंबरों की अधिकता और उनके बीच प्रकट हुए धार्मिक नेताओं की बहुलता के कारण था।
यह चुनाव अल्लाह के पूर्ण ज्ञान पर आधारित था—वह जानते थे कि उनमें क्या विशेषताएं हैं और उन्हें किस उद्देश्य के लिए चुना जा रहा है। यह कोई अंधा चुनाव नहीं था, बल्कि उनके हालात, उनके इतिहास और उनके भविष्य के बारे में अल्लाह की पूर्ण जानकारी के अनुसार था। उन्हें उनके समय के सभी लोगों पर प्राथमिकता दी गई, क्योंकि उस दौर में उन्हीं के बीच पैगंबर आए, उन्हीं पर किताबें उतारी गईं, और उन्हीं के बीच धार्मिक नेतृत्व रहा।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की ओर से चुनाव और सम्मान उसकी बुद्धि और ज्ञान के अनुसार होता है। अल्लाह जिसे चाहता है, उसे अपने ज्ञान के आधार पर ऊंचा उठाता है। यह हमारे लिए एक सबक है कि हमें अल्लाह के फैसलों पर भरोसा रखना चाहिए और उसकी रहमत से कभी निराश नहीं होना चाहिए। साथ ही, यह भी याद रखना चाहिए कि अल्लाह का चुनाव उसकी सर्वोच्च बुद्धि और ज्ञान पर आधारित होता है, और वह हमेशा अपने बंदों के लिए भलाई ही चाहता है।
यह आयत हमें यह भी बताती है कि अल्लाह ने बनी इस्राईल को जो सम्मान दिया था, वह उनके पैगंबरों और उनके धार्मिक नेताओं की वजह से था। यह हमारे लिए प्रेरणा है कि हम अपने जीवन में अल्लाह के आदेशों का पालन करें और उसकी रहमत के हकदार बनें। अल्लाह हमें भी अपने ज्ञान के आधार पर चुन सकता है, बशर्ते हम उसकी ओर सच्चे दिल से रुजू करें और उसके दीन की सेवा करें।
यह आयत हमें यह भी याद दिलाती है कि अल्लाह की रहमत और उसका चुनाव किसी जाति या वंश के नाम पर नहीं, बल्कि उसकी आज्ञाकारिता और उसके दीन की सेवा के आधार पर होता है। इसलिए हमें चाहिए कि हम अल्लाह के करीब रहें, उसकी इबादत करें और उसके रास्ते पर चलें, ताकि हम भी उसकी रहमत और उसके चुनाव के हकदार बन सकें।
📜 आयत 30-34 — अद-दुखान
अनुवाद — अद-दुखान 32
सूरा अद-दुखान आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने बनी इसराईल को समझ बूझ कर सारे जहॉन…सूरा आयत 32/59 — अद-दुखान الدخان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अद-दुखान सुनें, अद-दुखान अनुवाद, अद-दुखान mp3, अद-दुखान pdf. आयत 30–34. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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