Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- إِنَّ هَٰؤُلَاءِ: निश्चय ही ये लोग (मक्का के मुशरिकीन)।
- لَيَقُولُونَ: अवश्य कहते हैं (अर्थात ये बातें कहते हैं)।
विस्तृत तफ़सीर:
निश्चय ही ये मक्का के मुशरिकीन, जो आपकी क़ौम में से हैं — ऐ नबी! — जब उनसे कहा जाता है कि तुम मरोगे और फिर दोबारा जीवित किए जाओगे और अपने कर्मों का हिसाब दोगे, तो वे इस पर अचरज और इनकार के साथ कहते हैं: "हमारी तो बस एक ही मौत है — यही पहली और आख़िरी मौत। इसके बाद हमें कभी दोबारा नहीं उठाया जाएगा, न कोई हिसाब होगा, न कोई बदला, न कोई सज़ा और न कोई जज़ा।"
ये लोग अपनी इस बात में बिल्कुल अकेले नहीं हैं, बल्कि यही वह पुरानी उम्मतों का हाल रहा है जिन्होंने आख़िरत के दिन को झुठलाया। वे सोचते हैं कि मौत ही सब कुछ ख़त्म कर देती है, और वे यह भूल जाते हैं कि जिसने उन्हें पहली बार पैदा किया, वही उन्हें दोबारा ज़िंदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है।
ऐ अज़ीज़ क़ौम! ज़रा ग़ौर करो — क्या यह मुमकिन है कि जिस ख़ुदा ने इस कायनात को बनाया, आसमानों और ज़मीन को पैदा किया, सूरज और चाँद को ताबे में रखा, वह तुम्हें मौत के बाद दोबारा ज़िंदा न कर सके? हरगिज़ नहीं! यह उसकी क़ुदरत से बिल्कुल दूर की बात नहीं। मौत के बाद की ज़िंदगी ही तो असल ज़िंदगी है, जहाँ हर अच्छे और बुरे काम का पूरा-पूरा बदला मिलेगा।
यही वह पल है जब इंसान अपनी सारी उम्र के किए-धराए का सामना करेगा। जो लोग आज इस पर यक़ीन नहीं करते, वे कल जब इस हक़ीक़त को अपनी आँखों से देखेंगे, तो काश! वे दुनिया में लौटाए जाएँ और नेक अमल करें — लेकिन वह दिन आने के बाद लौटना मुमकिन नहीं होगा।
इसलिए ऐ मोमिनों! तुम उनके इन इनकारी कलामों से न घबराओ और न उदास होओ। यह तो उनकी जिहालत और सरकशी है। तुम अपने रब की राह पर साबित-क़दम रहो, क्योंकि सच्चाई तो यही है कि मौत के बाद ज़िंदगी है, और उस दिन हर इंसान को उसके अमाल का पूरा बदला मिलेगा। यही वह दिन है जिसकी तरफ़ सारे नबी और रसूल बुलाते रहे हैं, और यही वह सच्चाई है जो इंसान को ज़िंदगी का सही रास्ता दिखाती है।
📜 आयत 32-36 — सूरा अद-दुखान
अनुवाद — अद-दुखान 34
सूरा अद-दुखान आयत 34 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये (कुफ्फ़ारे मक्का) (मुसलमानों से) कहते हैंसूरा आयत 34/59 — सूरा अद-दुखान الدخان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अद-दुखान सुनें, सूरा अद-दुखान अनुवाद, सूरा अद-दुखान mp3, सूरा अद-दुखान pdf. आयत 32–36. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अद-दुखान
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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