अल-जासिया · 11/37
अनुवाद उच्चारण — अल-जासिया
هَٰذَا هُدًى ۖ وَالَّذِينَ كَفَرُوا بِآيَاتِ رَبِّهِمْ لَهُمْ عَذَابٌ مِّن رِّجْزٍ أَلِيمٌ ۝١١
Haazaa hudanw wal lazeena kafaroo bi aayaati Rabbihim lahum `azaabum mir rijzin aleem
📖 हिंदी अर्थ
ये (क़ुरान) है और जिन लोगों ने अपने परवरदिगार की आयतों से इन्कार किया उनके लिए सख्त किस्म का दर्दनाक अज़ाब होगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • हुदा (هدى): मार्गदर्शन, सत्य का रास्ता दिखाने वाला।
  • कफ़रू (كفروا): इनकार किया, झुठलाया।
  • आयात (آيات): निशानियाँ, प्रमाण, यहाँ परमेश्वर की प्रकट की हुई आयतें (क़ुरआन की आयतें)।
  • रिज़्ज़ (رجز): सबसे कठोर और भयानक यातना, गंदा और अपवित्र अज़ाब।
  • अलीम (أليم): दर्दनाक, बहुत पीड़ा देने वाला।

व्याख्या:

यह क़ुरआन, जो अल्लाह ने अपने पैग़म्बर (मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर उतारा है, सत्य का स्पष्ट मार्गदर्शन है। यह अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाला दीपक है, जो हर उस व्यक्ति को सीधा रास्ता दिखाता है जो इसे अपनाता है और इस पर अमल करता है। यह वह हिदायत है जो इंसान को भटकाव से बचाकर उसकी दुनिया और आख़िरत दोनों को संवारती है।

लेकिन जिन लोगों ने अपने रब की आयतों को झुठलाया और उन पर ईमान नहीं लाए, उनके लिए क़ियामत के दिन सबसे भयानक और दर्दनाक यातना तैयार है। यह अज़ाब किसी साधारण सज़ा जैसा नहीं होगा, बल्कि "रिज़्ज़" कहा गया है—यानी सबसे कड़ा, सबसे अपमानजनक और सबसे पीड़ादायक अज़ाब, जिसकी कोई मिसाल नहीं।

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि अल्लाह का क़ुरआन हमारे लिए कितनी बड़ी रहमत है। यह वह रास्ता है जो हमें जहन्नुम की आग से बचाकर जन्नत की ओर ले जाता है। जो इसे पकड़ ले, वह कभी नहीं भटक सकता। और जो इसे ठुकरा दे, उसका अंजाम बहुत बुरा है।

आओ, हम इस नेमत की क़द्र करें, इसे पढ़ें, समझें और अपनी ज़िंदगी में लागू करें। यही हमारी सफलता की कुंजी है—दुनिया में इज़्ज़त और आख़िरत में नजात। अल्लाह हम सबको क़ुरआन पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 9-13 — अल-जासिया

9وَإِذَا عَلِمَ مِنْ آيَاتِنَا شَيْئًا اتَّخَذَهَا هُزُوًا ۚ أُولَٰئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ مُّهِينٌ
और जब हमारी आयतों में से किसी आयत पर वाक़िफ़ हो जाता है तो उसकी हँसी उड़ाता है ऐसे ही लोगों के वास्ते ज़लील करने वाला अज़ाब है
10مِّن وَرَائِهِمْ جَهَنَّمُ ۖ وَلَا يُغْنِي عَنْهُم مَّا كَسَبُوا شَيْئًا وَلَا مَا اتَّخَذُوا مِن دُونِ اللَّهِ أَوْلِيَاءَ ۖ وَلَهُمْ عَذَابٌ عَظِيمٌ
जहन्नुम तो उनके पीछे ही (पीछे) है और जो कुछ वह आमाल करते रहे न तो वही उनके कुछ काम आएँगे और न जिनको उन्होंने ख़ुदा को छोड़कर (अपने) सरपरस्त बनाए थे और उनके लिए बड़ा (सख्त) अज़ाब है
11هَٰذَا هُدًى ۖ وَالَّذِينَ كَفَرُوا بِآيَاتِ رَبِّهِمْ لَهُمْ عَذَابٌ مِّن رِّجْزٍ أَلِيمٌ
ये (क़ुरान) है और जिन लोगों ने अपने परवरदिगार की आयतों से इन्कार किया उनके लिए सख्त किस्म का दर्दनाक अज़ाब होगा
12۞ اللَّهُ الَّذِي سَخَّرَ لَكُمُ الْبَحْرَ لِتَجْرِيَ الْفُلْكُ فِيهِ بِأَمْرِهِ وَلِتَبْتَغُوا مِن فَضْلِهِ وَلَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
ख़ुदा ही तो है जिसने दरिया को तुम्हारे क़ाबू में कर दिया ताकि उसके हुक्म से उसमें कश्तियां चलें और ताकि उसके फज़ल (व करम) से (मआश की) तलाश करो और ताकि तुम शुक्र करो
13وَسَخَّرَ لَكُم مَّا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ جَمِيعًا مِّنْهُ ۚ إِنَّ فِي ذَٰلِكَ لَآيَاتٍ لِّقَوْمٍ يَتَفَكَّرُونَ
और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है सबको अपने (हुक्म) से तुम्हारे काम में लगा दिया है जो लोग ग़ौर करते हैं उनके लिए इसमें (क़ुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
अल-जासियाकुरान सूची
37आयत
मक्कीRevelation
11आयत

अनुवाद — अल-जासिया 11

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Wednesday, August 19, 2026

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