मुहम्मद · 32/38
अनुवाद उच्चारण — मुहम्मद
إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا وَصَدُّوا عَن سَبِيلِ اللَّهِ وَشَاقُّوا الرَّسُولَ مِن بَعْدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُمُ الْهُدَىٰ لَن يَضُرُّوا اللَّهَ شَيْئًا وَسَيُحْبِطُ أَعْمَالَهُمْ ۝٣٢
Innnal lazeena kafaroo wa saddoo `an sabeelil laahi wa shaaaqqur Rasoola mim ba`di maa tabaiyana lahumul hudaa lany yadurrul laaha shai`anw wa sa yuhbitu a`maalahum
📖 हिंदी अर्थ
बेशक जिन लोगों पर (दीन की) सीधी राह साफ़ ज़ाहिर हो गयी उसके बाद इन्कार कर बैठे और (लोगों को) ख़ुदा की राह से रोका और पैग़म्बर की मुख़ालेफ़त की तो ख़ुदा का कुछ भी नहीं बिगाड़ सकेंगे और वह उनका सब किया कराया अक़ारत कर देगा
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَفَرُوا: अल्लाह और उसके रसूल का इनकार किया, अल्लाह को एक नहीं माना।
  • وَصَدُّوا: खुद भी अल्लाह के रास्ते से रुके और दूसरों को भी रोका।
  • شَاقُّوا الرَّسُولَ: रसूल (ﷺ) की खिलाफ़त की, उनसे दुश्मनी की और उनका विरोध किया।
  • تَبَيَّنَ لَهُمُ الْهُدَى: उनके सामने सत्य स्पष्ट हो चुका था कि मुहम्मद (ﷺ) अल्लाह के सच्चे नबी हैं।
  • يُحْبِطُ أَعْمَالَهُمْ: उनके अच्छे कर्मों को बेकार कर देगा, उनका कोई बदला नहीं मिलेगा।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में है जिन्होंने अल्लाह और उसके रसूल (ﷺ) का इनकार किया, और सिर्फ़ इतना ही नहीं, बल्कि दूसरे लोगों को भी अल्लाह के दीन (इस्लाम) से रोका। उन्होंने रसूल (ﷺ) की खिलाफ़त की, उनसे दुश्मनी की और उनके खिलाफ़ साज़िशें रचीं — यह सब कुछ उसके बाद किया जब उनके सामने सत्य पूरी तरह स्पष्ट हो चुका था कि मुहम्मद (ﷺ) अल्लाह के सच्चे नबी हैं। उनके पास हुज्जतें और निशानियाँ आ चुकी थीं, फिर भी उन्होंने जान-बूझकर हक़ को नकारा और उसका विरोध किया।

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये लोग अल्लाह को ज़रा भी नुक़सान नहीं पहुँचा सकते। उनका कुफ़्र, उनका रोकना, उनकी दुश्मनी — इन सबसे अल्लाह के दीन को कोई हानि नहीं होती। अल्लाह अपने दीन की हिफ़ाज़त ख़ुद करता है। असल नुक़सान इन्हीं का है, क्योंकि वे अपनी आत्माओं को तबाह कर रहे हैं। अल्लाह उनके उन अच्छे कामों को भी बेकार कर देगा जो उन्होंने दुनिया में किए — जैसे रिश्तेदारी का ख़्याल, मेहमाननवाज़ी, या कोई नेकी — क्योंकि उन्होंने यह सब अल्लाह की रज़ा के लिए नहीं किया, बल्कि दुनिया के दिखावे के लिए किया। जब ईमान ही नहीं, तो नेकियाँ भी क़ुबूल नहीं होतीं।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का दीन कितना महान और शक्तिशाली है — कोई भी उसे नुक़सान नहीं पहुँचा सकता। इसलिए मोमिन को कभी निराश नहीं होना चाहिए, चाहे दुश्मन कितने भी ताक़तवर क्यों न हों। साथ ही, यह चेतावनी है कि जो लोग हक़ को जानने के बाद भी उसका विरोध करते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा है — उनकी सारी नेकियाँ भी उनके काम न आएँगी। यह हमारे लिए सबक़ है कि हम सच्चे दिल से अल्लाह और उसके रसूल (ﷺ) पर ईमान लाएँ, और अपने आमाल को सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा के लिए करें, ताकि हमारे कर्म बेकार न हों। अल्लाह की रहमत और हिफ़ाज़त उन्हीं के लिए है जो उसकी तरफ़ आते हैं और उसके रास्ते पर चलते हैं।

🎧 सुनें

📜 आयत 30-34 — मुहम्मद

30وَلَوْ نَشَاءُ لَأَرَيْنَاكَهُمْ فَلَعَرَفْتَهُم بِسِيمَاهُمْ ۚ وَلَتَعْرِفَنَّهُمْ فِي لَحْنِ الْقَوْلِ ۚ وَاللَّهُ يَعْلَمُ أَعْمَالَكُمْ
तो हम चाहते तो हम तुम्हें इन लोगों को दिखा देते तो तुम उनकी पेशानी ही से उनको पहचान लेते अगर तुम उन्हें उनके अन्दाज़े गुफ्तगू ही से ज़रूर पहचान लोगे और ख़ुदा तो तुम्हारे आमाल से वाक़िफ है
31وَلَنَبْلُوَنَّكُمْ حَتَّىٰ نَعْلَمَ الْمُجَاهِدِينَ مِنكُمْ وَالصَّابِرِينَ وَنَبْلُوَ أَخْبَارَكُمْ
और हम तुम लोगों को ज़रूर आज़माएँगे ताकि तुममें जो लोग जेहाद करने वाले और (तकलीफ़) झेलने वाले हैं उनको देख लें और तुम्हारे हालात जाँच लें
32إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا وَصَدُّوا عَن سَبِيلِ اللَّهِ وَشَاقُّوا الرَّسُولَ مِن بَعْدِ مَا تَبَيَّنَ لَهُمُ الْهُدَىٰ لَن يَضُرُّوا اللَّهَ شَيْئًا وَسَيُحْبِطُ أَعْمَالَهُمْ
बेशक जिन लोगों पर (दीन की) सीधी राह साफ़ ज़ाहिर हो गयी उसके बाद इन्कार कर बैठे और (लोगों को) ख़ुदा की राह से रोका और पैग़म्बर की मुख़ालेफ़त की तो ख़ुदा का कुछ भी नहीं बिगाड़ सकेंगे और वह उनका सब किया कराया अक़ारत कर देगा
33۞ يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا أَطِيعُوا اللَّهَ وَأَطِيعُوا الرَّسُولَ وَلَا تُبْطِلُوا أَعْمَالَكُمْ
ऐ ईमानदारों ख़ुदा का हुक्म मानों और रसूल की फरमाँबरदारी करो और अपने आमाल को ज़ाया न करो
34إِنَّ الَّذِينَ كَفَرُوا وَصَدُّوا عَن سَبِيلِ اللَّهِ ثُمَّ مَاتُوا وَهُمْ كُفَّارٌ فَلَن يَغْفِرَ اللَّهُ لَهُمْ
बेशक जो लोग काफ़िर हो गए और लोगों को ख़ुदा की राह से रोका, फिर काफिर ही मर गए तो ख़ुदा उनको हरगिज़ नहीं बख्शेगा तो तुम हिम्मत न हारो
मुहम्मदकुरान सूची
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मदनीRevelation
32आयत

अनुवाद — मुहम्मद 32

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Tuesday, August 18, 2026

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