Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- فَتْرَةٍ: रसूलों के आने के सिलसिले में जो खाली अवधि हो, यानी लंबा समय जिसमें कोई नबी न आया हो।
- بَشِيرٍ: खुशखबरी देने वाला (जो ईमान लाने वालों को जन्नत की खुशखबरी सुनाए)।
- نَذِيرٍ: डराने वाला (जो नाफ़रमानों को अल्लाह के अज़ाब से आगाह करे)।
तफ़सीर:
ऐ अहले-किताब (यहूदी और ईसाई)! तुम्हारे पास हमारा रसूल (मुहम्मद ﷺ) आ चुका है, जो तुम्हें सच्चाई और हिदायत का रास्ता साफ़-साफ़ बयान कर रहा है। यह इसलिए हुआ कि रसूलों के आने का सिलसिला कुछ समय के लिए रुका हुआ था—हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) के बाद लगभग छह सौ साल तक कोई नबी नहीं आया था—और लोग हिदायत के उस नूर से महरूम थे। अल्लाह ने अपनी रहमत से इस लंबे अरसे के बाद तुम्हारे पास अपना आख़िरी रसूल भेजा, ताकि तुम्हारे पास कोई बहाना न बचे।
अल्लाह फरमाता है: यह इसलिए कि तुम यह न कह सको कि "हमारे पास कोई खुशखबरी सुनाने वाला और डराने वाला नहीं आया।" अब यह बहाना खत्म हो गया! तुम्हारे पास वह रसूल आ चुका है जो खुशखबरी भी देता है—उन लोगों को जो ईमान लाएँ और नेक अमल करें, उनके लिए जन्नत की बशारत—और डरावना भी है—उन लोगों को जो नाफ़रमानी करें, उन्हें अल्लाह के अज़ाब से आगाह करता है।
और अल्लाह हर चीज़ पर पूरी क़ुदरत रखता है। उसकी क़ुदरत से ही रसूल भेजे जाते हैं, और उसी की क़ुदरत से वह नेक लोगों को अज्र देता है और गुनाहगारों को सज़ा देता है। कोई चीज़ उससे बाहर नहीं है।
दावती पहलू:
यह आयत अहले-किताब को संबोधित करती है, लेकिन इसका पैग़ाम हर उस इंसान के लिए है जो अल्लाह की रहमत से दूर हो गया हो। अल्लाह ने अपने रसूल ﷺ को भेजकर दुनिया पर सबसे बड़ी नेमत नाज़िल की। यह हमारे लिए कितनी बड़ी खुशकिस्मती है कि हमें वह रसूल मिला जो हमें जन्नत की राह दिखाता है और जहन्नम से बचाता है। आज हमारे पास कुरआन और सुन्नत मौजूद है—क्या हम इस नेमत की क़द्र करते हैं? क्या हम उस रसूल की पैरवी करते हैं जो हमारे लिए रहमत बनकर आया? यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपने रब के सामने क्या जवाब देंगे। अल्लाह ने हमें बहाने की कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी—रसूल आ चुका है, किताब आ चुकी है, और हिदायत का रास्ता साफ़ है। अब फैसला हमारे हाथ में है: हम उस खुशखबरी को क़बूल करें और उस डरावने पैग़ाम से बचें। अल्लाह की रहमत के दरवाज़े हमेशा खुले हैं, और वह हर उस शख्स को माफ़ करने पर क़ादिर है जो सच्चे दिल से उसकी तरफ रुजू करे।
📜 आयत 17-21 — सूरा अल-माइदा
अनुवाद — अल-माइदा 19
सूरा अल-माइदा आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ अहले किताब जब पैग़म्बरों की आमद में बहुत रूकावट…सूरा आयत 19/120 — सूरा अल-माइदा المائدة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-माइदा सुनें, सूरा अल-माइदा अनुवाद, सूरा अल-माइदा mp3, सूरा अल-माइदा pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-माइदा
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


