अज़-ज़ारियात · 20/60
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ारियात
وَفِي الْأَرْضِ آيَاتٌ لِّلْمُوقِنِينَ ۝٢٠
Wa fil ardi aayaatul lilmooqineen
📖 हिंदी अर्थ
और यक़ीन करने वालों के लिए ज़मीन में (क़ुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آيَاتٌ: निशानियाँ, सबूत, दलीलें।
  • لِّلْمُوقِنِينَ: उन लोगों के लिए जो यक़ीन रखते हैं (पक्का विश्वास रखने वाले)।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ज़मीन में उन लोगों के लिए बड़ी निशानियाँ और सबूत मौजूद हैं जो यक़ीन रखने वाले हैं। यानी जो लोग दिल से अल्लाह पर ईमान रखते हैं और उसकी क़ुदरत (शक्ति) पर पूरा भरोसा करते हैं, उनके लिए यह पूरी धरती एक खुली किताब है।

ज़मीन में अल्लाह की क़ुदरत की कितनी ही निशानियाँ बिखरी हुई हैं — ऊँचे-ऊँचे पहाड़, बहते समुद्र, नदियाँ, झरने, हरे-भरे पेड़, तरह-तरह के फल, अनगिनत जानवर और पौधे। इन सब चीज़ों को देखकर एक समझदार इंसान आसानी से समझ सकता है कि इन्हें बनाने वाला कोई और नहीं बल्कि अल्लाह ही है, जो सबसे बड़ा ख़ालिक़ (रचनाकार) और सूरत देने वाला है।

यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान वालों की निगाह सिर्फ़ ज़ाहिरी चीज़ों पर नहीं होती, बल्कि वे हर चीज़ में अल्लाह की क़ुदरत के नमूने देखते हैं। जब वे ज़मीन पर चलते हैं, तो उन्हें हर क़दम पर अल्लाह की याद आती है। पहाड़ों की बुलंदी, समुद्र की गहराई, पेड़ों की हरियाली — यह सब उन्हें अल्लाह की अज़मत (महानता) की याद दिलाते हैं।

अल्लाह तआला हमें उन मोमिनों में शामिल करे जो उसकी निशानियों से सबक़ हासिल करते हैं और उसकी इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारते हैं। यह आयत हमें दावत देती है कि हम अपनी आँखें खोलें और अपने आस-पास की हर चीज़ में अल्लाह की क़ुदरत के नज़ारे देखें। जो इंसान जितना गहराई से इन निशानियों पर ग़ौर करता है, उसका ईमान उतना ही मज़बूत होता जाता है। यही वह रास्ता है जो इंसान को अल्लाह की मोहब्बत और उसके दीन (इस्लाम) की तरफ़ ले जाता है।



📜 आयत 18-22 — सूरा अज़-ज़ारियात

18وَبِالْأَسْحَارِ هُمْ يَسْتَغْفِرُونَ
और पिछले पहर को अपनी मग़फ़िरत की दुआएं करते थे
19وَفِي أَمْوَالِهِمْ حَقٌّ لِّلسَّائِلِ وَالْمَحْرُومِ
और उनके माल में माँगने वाले और न माँगने वाले (दोनों) का हिस्सा था
20وَفِي الْأَرْضِ آيَاتٌ لِّلْمُوقِنِينَ
और यक़ीन करने वालों के लिए ज़मीन में (क़ुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
21وَفِي أَنفُسِكُمْ ۚ أَفَلَا تُبْصِرُونَ
और ख़ुदा तुम में भी हैं तो क्या तुम देखते नहीं
22وَفِي السَّمَاءِ رِزْقُكُمْ وَمَا تُوعَدُونَ
और तुम्हारी रोज़ी और जिस चीज़ का तुमसे वायदा किया जाता है आसमान में है
अज़-ज़ारियातकुरान सूची
60आयत
मक्कीअवतरण स्थान
20आयत

अनुवाद — अज़-ज़ारियात 20

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Saturday, October 3, 2026

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