Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- السَّائِل (साइल): वह व्यक्ति जो माँगता है, ज़रूरतमंद जो लोगों से सहायता माँगता है।
- المَحْرُوم (महरूम): वह व्यक्ति जो वंचित रह गया हो, जिसे उसकी ज़रूरत के अनुसार न दिया गया हो, या जो अपनी आत्म-सम्मान के कारण माँग नहीं पाता और लोग उसे अमीर समझकर उसकी मदद नहीं करते।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस पवित्र आयत में अल्लाह तआला अपने नेक बंदों की विशेषताओं का वर्णन कर रहे हैं, जो रात में इबादत करते हैं और दिन में दूसरों की मदद करते हैं। यह बताया गया है कि उनके माल में सिर्फ अपनी ज़रूरतों के लिए ही नहीं, बल्कि दूसरों का भी हक़ होता है। यह हक़ दो तरह के लोगों के लिए है:
पहला: साइल — वह ज़रूरतमंद जो सीधे तौर पर माँगता है। इस्लाम सिखाता है कि जब कोई व्यक्ति माँगने आए, तो उसे खाली हाथ न लौटाएं, चाहे वह थोड़ा ही क्यों न दे सकें। यह अल्लाह का हुक्म है कि माँगने वाले का हक़ हमारे माल में शामिल है।
दूसरा: महरूम — वह व्यक्ति जो माँग नहीं पाता, या तो शर्म और हया की वजह से, या इसलिए कि लोग उसे अमीर समझते हैं जबकि वह सच में ज़रूरतमंद है। ऐसे लोगों की मदद करना और भी ज़्यादा पुण्य का काम है, क्योंकि उन्हें पहचानना और उनकी ज़रूरत का अंदाज़ा लगाना ही असली नेकी है।
यह आयत हमें सिखाती है कि हमारी कमाई में सिर्फ हमारा ही हक़ नहीं है, बल्कि अल्लाह ने हमारे माल में दूसरों का भी हिस्सा रखा है। यही इस्लाम की खूबसूरती है कि यह हमें दूसरों के दर्द को समझने और उनकी मदद करने की तालीम देता है। जब हम अपने माल में से दूसरों का हक़ निकालते हैं, तो हमारा माल पाक होता है, बरकत पाता है, और अल्लाह की रहमत हमारे घर में उतरती है।
याद रखिए! यह सिर्फ एक सलाह नहीं, बल्कि अल्लाह का हुक्म है। जो लोग इस हुक्म पर अमल करते हैं, अल्लाह उन्हें दुनिया में भी खुशहाली देता है और आख़िरत में भी उनके लिए जन्नत के खज़ाने तैयार हैं। आइए, हम भी अपने माल में दूसरों का हक़ शामिल करें — चाहे वह ज़कात हो, सदक़ा हो, या कोई भी नेक काम — ताकि हमारा जीवन अल्लाह की रहमत से भर जाए और हम उन नेक बंदों में शामिल हों जिनका ज़िक्र इस आयत में किया गया है।
📜 आयत 17-21 — सूरा अज़-ज़ारियात
अनुवाद — अज़-ज़ारियात 19
सूरा अज़-ज़ारियात आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उनके माल में माँगने वाले और न माँगने वाले…सूरा आयत 19/60 — सूरा अज़-ज़ारियात الذاريات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अज़-ज़ारियात सुनें, सूरा अज़-ज़ारियात अनुवाद, सूरा अज़-ज़ारियात mp3, सूरा अज़-ज़ारियात pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अज़-ज़ारियात
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


