सूरा अज़-ज़ारियात अरबी और हिंदी

सूरा अज़-ज़ारियात को पूरे हिंदी अनुवाद, उच्चारण और ऑडियो तिलावत के साथ पढ़ें। आयत-दर-आयत हिंदी अर्थ। (60 आयत — مكية). अज़-ज़ारियात सुनें, अज़-ज़ारियात अनुवाद, अज़-ज़ारियात mp3, अज़-ज़ारियात pdf.

सूरा अज़-ज़ारियात पढ़ें और सुनें

🎧 आयत
M Mishary Rashid Alafasy
M Mahmoud Khalil Al-Husary
A Abdurrahman As-Sudais
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi
A Abdul Basit Abdul Samad
A Ali Al-Hudhaify
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy
A Abu Bakr Ash-Shaatree
M Muhammad Ayyoub
A Abdullah Basfar
A Abdullah Al-Juhani
M Maher Al Muaiqly
x1
وَالذَّارِيَاتِ ذَرْوًا ۝١
📖 अनुवाद आयत 1
उन (हवाओं की क़सम) जो (बादलों को) उड़ा कर तितर बितर कर देती हैं
فَالْحَامِلَاتِ وِقْرًا ۝٢
📖 अनुवाद आयत 2
फिर (पानी का) बोझ उठाती हैं
فَالْجَارِيَاتِ يُسْرًا ۝٣
📖 अनुवाद आयत 3
फिर आहिस्ता आहिस्ता चलती हैं
فَالْمُقَسِّمَاتِ أَمْرًا ۝٤
📖 अनुवाद आयत 4
फिर एक ज़रूरी चीज़ (बारिश) को तक़सीम करती हैं
إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَصَادِقٌ ۝٥
📖 अनुवाद आयत 5
कि तुम से जो वायदा किया जाता है ज़रूर बिल्कुल सच्चा है
وَإِنَّ الدِّينَ لَوَاقِعٌ ۝٦
📖 अनुवाद आयत 6
और (आमाल की) जज़ा (सज़ा) ज़रूर होगी
وَالسَّمَاءِ ذَاتِ الْحُبُكِ ۝٧
📖 अनुवाद आयत 7
और आसमान की क़सम जिसमें रहते हैं
إِنَّكُمْ لَفِي قَوْلٍ مُّخْتَلِفٍ ۝٨
📖 अनुवाद आयत 8
कि (ऐ अहले मक्का) तुम लोग एक ऐसी मुख्तलिफ़ बेजोड़ बात में पड़े हो
يُؤْفَكُ عَنْهُ مَنْ أُفِكَ ۝٩
📖 अनुवाद आयत 9
कि उससे वही फेरा जाएगा (गुमराह होगा)
قُتِلَ الْخَرَّاصُونَ ۝١٠
📖 अनुवाद आयत 10
जो (ख़ुदा के इल्म में) फेरा जा चुका है अटकल दौड़ाने वाले हलाक हों
الَّذِينَ هُمْ فِي غَمْرَةٍ سَاهُونَ ۝١١
📖 अनुवाद आयत 11
जो ग़फलत में भूले हुए (पड़े) हैं पूछते हैं कि जज़ा का दिन कब होगा
يَسْأَلُونَ أَيَّانَ يَوْمُ الدِّينِ ۝١٢
📖 अनुवाद आयत 12
उस दिन (होगा)
يَوْمَ هُمْ عَلَى النَّارِ يُفْتَنُونَ ۝١٣
📖 अनुवाद आयत 13
जब इनको (जहन्नुम की) आग में अज़ाब दिया जाएगा
ذُوقُوا فِتْنَتَكُمْ هَٰذَا الَّذِي كُنتُم بِهِ تَسْتَعْجِلُونَ ۝١٤
📖 अनुवाद आयत 14
(और उनसे कहा जाएगा) अपने अज़ाब का मज़ा चखो ये वही है जिसकी तुम जल्दी मचाया करते थे
إِنَّ الْمُتَّقِينَ فِي جَنَّاتٍ وَعُيُونٍ ۝١٥
📖 अनुवाद आयत 15
बेशक परहेज़गार लोग (बेहिश्त के) बाग़ों और चश्मों में (ऐश करते) होगें
آخِذِينَ مَا آتَاهُمْ رَبُّهُمْ ۚ إِنَّهُمْ كَانُوا قَبْلَ ذَٰلِكَ مُحْسِنِينَ ۝١٦
📖 अनुवाद आयत 16
जो उनका परवरदिगार उन्हें अता करता है ये (ख़ुश ख़ुश) ले रहे हैं ये लोग इससे पहले (दुनिया में) नेको कार थे
كَانُوا قَلِيلًا مِّنَ اللَّيْلِ مَا يَهْجَعُونَ ۝١٧
📖 अनुवाद आयत 17
(इबादत की वजह से) रात को बहुत ही कम सोते थे
وَبِالْأَسْحَارِ هُمْ يَسْتَغْفِرُونَ ۝١٨
📖 अनुवाद आयत 18
और पिछले पहर को अपनी मग़फ़िरत की दुआएं करते थे
وَفِي أَمْوَالِهِمْ حَقٌّ لِّلسَّائِلِ وَالْمَحْرُومِ ۝١٩
📖 अनुवाद आयत 19
और उनके माल में माँगने वाले और न माँगने वाले (दोनों) का हिस्सा था
وَفِي الْأَرْضِ آيَاتٌ لِّلْمُوقِنِينَ ۝٢٠
📖 अनुवाद आयत 20
और यक़ीन करने वालों के लिए ज़मीन में (क़ुदरते ख़ुदा की) बहुत सी निशानियाँ हैं
وَفِي أَنفُسِكُمْ ۚ أَفَلَا تُبْصِرُونَ ۝٢١
📖 अनुवाद आयत 21
और ख़ुदा तुम में भी हैं तो क्या तुम देखते नहीं
وَفِي السَّمَاءِ رِزْقُكُمْ وَمَا تُوعَدُونَ ۝٢٢
📖 अनुवाद आयत 22
और तुम्हारी रोज़ी और जिस चीज़ का तुमसे वायदा किया जाता है आसमान में है
فَوَرَبِّ السَّمَاءِ وَالْأَرْضِ إِنَّهُ لَحَقٌّ مِّثْلَ مَا أَنَّكُمْ تَنطِقُونَ ۝٢٣
📖 अनुवाद आयत 23
तो आसमान व ज़मीन के मालिक की क़सम ये (क़ुरान) बिल्कुल ठीक है जिस तरह तुम बातें करते हो
هَلْ أَتَاكَ حَدِيثُ ضَيْفِ إِبْرَاهِيمَ الْمُكْرَمِينَ ۝٢٤
📖 अनुवाद आयत 24
क्या तुम्हारे पास इबराहीम के मुअज़िज़ मेहमानो (फ़रिश्तों) की भी ख़बर पहुँची है कि जब वह लोग उनके पास आए
إِذْ دَخَلُوا عَلَيْهِ فَقَالُوا سَلَامًا ۖ قَالَ سَلَامٌ قَوْمٌ مُّنكَرُونَ ۝٢٥
📖 अनुवाद आयत 25
तो कहने लगे (सलामुन अलैकुम) तो इबराहीम ने भी (अलैकुम) सलाम किया (देखा तो) ऐसे लोग जिनसे न जान न पहचान
فَرَاغَ إِلَىٰ أَهْلِهِ فَجَاءَ بِعِجْلٍ سَمِينٍ ۝٢٦
📖 अनुवाद आयत 26
फिर अपने घर जाकर जल्दी से (भुना हुआ) एक मोटा ताज़ा बछड़ा ले आए
فَقَرَّبَهُ إِلَيْهِمْ قَالَ أَلَا تَأْكُلُونَ ۝٢٧
📖 अनुवाद आयत 27
और उसे उनके आगे रख दिया (फिर) कहने लगे आप लोग तनाउल क्यों नहीं करते
فَأَوْجَسَ مِنْهُمْ خِيفَةً ۖ قَالُوا لَا تَخَفْ ۖ وَبَشَّرُوهُ بِغُلَامٍ عَلِيمٍ ۝٢٨
📖 अनुवाद आयत 28
(इस पर भी न खाया) तो इबराहीम उनसे जो ही जी में डरे वह लोग बोले आप अन्देशा न करें और उनको एक दानिशमन्द लड़के की ख़ुशख़बरी दी
فَأَقْبَلَتِ امْرَأَتُهُ فِي صَرَّةٍ فَصَكَّتْ وَجْهَهَا وَقَالَتْ عَجُوزٌ عَقِيمٌ ۝٢٩
📖 अनुवाद आयत 29
तो (ये सुनते ही) इबराहीम की बीवी (सारा) चिल्लाती हुई उनके सामने आयीं और अपना मुँह पीट लिया कहने लगीं (ऐ है) एक तो (मैं) बुढ़िया (उस पर) बांझ
قَالُوا كَذَٰلِكِ قَالَ رَبُّكِ ۖ إِنَّهُ هُوَ الْحَكِيمُ الْعَلِيمُ ۝٣٠
📖 अनुवाद आयत 30
लड़का क्यों कर होगा फ़रिश्ते बोले तुम्हारे परवरदिगार ने यूँ ही फरमाया है वह बेशक हिकमत वाला वाक़िफ़कार है
۞ قَالَ فَمَا خَطْبُكُمْ أَيُّهَا الْمُرْسَلُونَ ۝٣١
📖 अनुवाद आयत 31
तब इबराहीम ने पूछा कि (ऐ ख़ुदा के) भेजे हुए फरिश्तों आख़िर तुम्हें क्या मुहिम दर पेश है
قَالُوا إِنَّا أُرْسِلْنَا إِلَىٰ قَوْمٍ مُّجْرِمِينَ ۝٣٢
📖 अनुवाद आयत 32
वह बोले हम तो गुनाहगारों (क़ौमे लूत) की तरफ भेजे गए हैं
لِنُرْسِلَ عَلَيْهِمْ حِجَارَةً مِّن طِينٍ ۝٣٣
📖 अनुवाद आयत 33
ताकि उन पर मिटटी के पथरीले खरन्जे बरसाएँ
مُّسَوَّمَةً عِندَ رَبِّكَ لِلْمُسْرِفِينَ ۝٣٤
📖 अनुवाद आयत 34
जिन पर हद से बढ़ जाने वालों के लिए तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से निशान लगा दिए गए हैं
فَأَخْرَجْنَا مَن كَانَ فِيهَا مِنَ الْمُؤْمِنِينَ ۝٣٥
📖 अनुवाद आयत 35
ग़रज़ वहाँ जितने लोग मोमिनीन थे उनको हमने निकाल दिया
فَمَا وَجَدْنَا فِيهَا غَيْرَ بَيْتٍ مِّنَ الْمُسْلِمِينَ ۝٣٦
📖 अनुवाद आयत 36
और वहाँ तो हमने एक के सिवा मुसलमानों का कोई घर पाया भी नहीं
وَتَرَكْنَا فِيهَا آيَةً لِّلَّذِينَ يَخَافُونَ الْعَذَابَ الْأَلِيمَ ۝٣٧
📖 अनुवाद आयत 37
और जो लोग दर्दनाक अज़ाब से डरते हैं उनके लिए वहाँ (इबरत की) निशानी छोड़ दी और मूसा (के हाल) में भी (निशानी है)
وَفِي مُوسَىٰ إِذْ أَرْسَلْنَاهُ إِلَىٰ فِرْعَوْنَ بِسُلْطَانٍ مُّبِينٍ ۝٣٨
📖 अनुवाद आयत 38
जब हमने उनको फिरऔन के पास खुला हुआ मौजिज़ा देकर भेजा
فَتَوَلَّىٰ بِرُكْنِهِ وَقَالَ سَاحِرٌ أَوْ مَجْنُونٌ ۝٣٩
📖 अनुवाद आयत 39
तो उसने अपने लशकर के बिरते पर मुँह मोड़ लिया और कहने लगा ये तो (अच्छा ख़ासा) जादूगर या सौदाई है
فَأَخَذْنَاهُ وَجُنُودَهُ فَنَبَذْنَاهُمْ فِي الْيَمِّ وَهُوَ مُلِيمٌ ۝٤٠
📖 अनुवाद आयत 40
तो हमने उसको और उसके लशकर को ले डाला फिर उन सबको दरिया में पटक दिया
وَفِي عَادٍ إِذْ أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمُ الرِّيحَ الْعَقِيمَ ۝٤١
📖 अनुवाद आयत 41
और वह तो क़ाबिले मलामत काम करता ही था और आद की क़ौम (के हाल) में भी निशानी है हमने उन पर एक बे बरकत ऑंधी चलायी
مَا تَذَرُ مِن شَيْءٍ أَتَتْ عَلَيْهِ إِلَّا جَعَلَتْهُ كَالرَّمِيمِ ۝٤٢
📖 अनुवाद आयत 42
कि जिस चीज़ पर चलती उसको बोसीदा हडडी की तरह रेज़ा रेज़ा किए बग़ैर न छोड़ती
وَفِي ثَمُودَ إِذْ قِيلَ لَهُمْ تَمَتَّعُوا حَتَّىٰ حِينٍ ۝٤٣
📖 अनुवाद आयत 43
और समूद (के हाल) में भी (क़ुदरत की निशानी) है जब उससे कहा गया कि एक ख़ास वक्त तक ख़ूब चैन कर लो
فَعَتَوْا عَنْ أَمْرِ رَبِّهِمْ فَأَخَذَتْهُمُ الصَّاعِقَةُ وَهُمْ يَنظُرُونَ ۝٤٤
📖 अनुवाद आयत 44
तो उन्होने अपने परवरदिगार के हुक्म से सरकशी की तो उन्हें एक रोज़ कड़क और बिजली ने ले डाला और देखते ही रह गए
فَمَا اسْتَطَاعُوا مِن قِيَامٍ وَمَا كَانُوا مُنتَصِرِينَ ۝٤٥
📖 अनुवाद आयत 45
फिर न वह उठने की ताक़त रखते थे और न बदला ही ले सकते थे
وَقَوْمَ نُوحٍ مِّن قَبْلُ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا قَوْمًا فَاسِقِينَ ۝٤٦
📖 अनुवाद आयत 46
और (उनसे) पहले (हम) नूह की क़ौम को (हलाक कर चुके थे) बेशक वह बदकार लोग थे
وَالسَّمَاءَ بَنَيْنَاهَا بِأَيْدٍ وَإِنَّا لَمُوسِعُونَ ۝٤٧
📖 अनुवाद आयत 47
और हमने आसमानों को अपने बल बूते से बनाया और बेशक हममें सब क़ुदरत है
وَالْأَرْضَ فَرَشْنَاهَا فَنِعْمَ الْمَاهِدُونَ ۝٤٨
📖 अनुवाद आयत 48
और ज़मीन को भी हम ही ने बिछाया तो हम कैसे अच्छे बिछाने वाले हैं
وَمِن كُلِّ شَيْءٍ خَلَقْنَا زَوْجَيْنِ لَعَلَّكُمْ تَذَكَّرُونَ ۝٤٩
📖 अनुवाद आयत 49
और हम ही ने हर चीज़ की दो दो क़िस्में बनायीं ताकि तुम लोग नसीहत हासिल करो
فَفِرُّوا إِلَى اللَّهِ ۖ إِنِّي لَكُم مِّنْهُ نَذِيرٌ مُّبِينٌ ۝٥٠
📖 अनुवाद आयत 50
तो ख़ुदा ही की तरफ़ भागो मैं तुमको यक़ीनन उसकी तरफ से खुल्लम खुल्ला डराने वाला हूँ
وَلَا تَجْعَلُوا مَعَ اللَّهِ إِلَٰهًا آخَرَ ۖ إِنِّي لَكُم مِّنْهُ نَذِيرٌ مُّبِينٌ ۝٥١
📖 अनुवाद आयत 51
और ख़ुदा के साथ दूसरा माबूद न बनाओ मैं तुमको यक़ीनन उसकी तरफ से खुल्लम खुल्ला डराने वाला हूँ
كَذَٰلِكَ مَا أَتَى الَّذِينَ مِن قَبْلِهِم مِّن رَّسُولٍ إِلَّا قَالُوا سَاحِرٌ أَوْ مَجْنُونٌ ۝٥٢
📖 अनुवाद आयत 52
इसी तरह उनसे पहले लोगों के पास जो पैग़म्बर आता तो वह उसको जादूगर कहते या सिड़ी दीवाना (बताते)
أَتَوَاصَوْا بِهِ ۚ بَلْ هُمْ قَوْمٌ طَاغُونَ ۝٥٣
📖 अनुवाद आयत 53
ये लोग एक दूसरे को ऐसी बात की वसीयत करते आते हैं (नहीं) बल्कि ये लोग हैं ही सरकश
فَتَوَلَّ عَنْهُمْ فَمَا أَنتَ بِمَلُومٍ ۝٥٤
📖 अनुवाद आयत 54
तो (ऐ रसूल) तुम इनसे मुँह फेर लो तुम पर तो कुछ इल्ज़ाम नहीं है
وَذَكِّرْ فَإِنَّ الذِّكْرَىٰ تَنفَعُ الْمُؤْمِنِينَ ۝٥٥
📖 अनुवाद आयत 55
और नसीहत किए जाओ क्योंकि नसीहत मोमिनीन को फायदा देती है
وَمَا خَلَقْتُ الْجِنَّ وَالْإِنسَ إِلَّا لِيَعْبُدُونِ ۝٥٦
📖 अनुवाद आयत 56
और मैने जिनों और आदमियों को इसी ग़रज़ से पैदा किया कि वह मेरी इबादत करें
مَا أُرِيدُ مِنْهُم مِّن رِّزْقٍ وَمَا أُرِيدُ أَن يُطْعِمُونِ ۝٥٧
📖 अनुवाद आयत 57
न तो मैं उनसे रोज़ी का तालिब हूँ और न ये चाहता हूँ कि मुझे खाना खिलाएँ
إِنَّ اللَّهَ هُوَ الرَّزَّاقُ ذُو الْقُوَّةِ الْمَتِينُ ۝٥٨
📖 अनुवाद आयत 58
ख़ुदा ख़ुद बड़ा रोज़ी देने वाला ज़ोरावर (और) ज़बरदस्त है
فَإِنَّ لِلَّذِينَ ظَلَمُوا ذَنُوبًا مِّثْلَ ذَنُوبِ أَصْحَابِهِمْ فَلَا يَسْتَعْجِلُونِ ۝٥٩
📖 अनुवाद आयत 59
तो (इन) ज़ालिमों के वास्ते भी अज़ाब का कुछ हिस्सा है जिस तरह उनके साथियों के लिए हिस्सा था तो इनको हम से जल्दी न करनी चाहिए
فَوَيْلٌ لِّلَّذِينَ كَفَرُوا مِن يَوْمِهِمُ الَّذِي يُوعَدُونَ ۝٦٠
📖 अनुवाद आयत 60
तो जिस दिन का इन काफ़िरों से वायदा किया जाता है इससे इनके लिए ख़राबी है
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51الذاريات Adh-Dhariyat 📚 60 आयत مكية

आयत-दर-आयत – सूरा अज़-ज़ारियात — 60 आयत




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए