अज़-ज़ारियात · 7/60
अनुवाद उच्चारण — सूरा अज़-ज़ारियात
وَالسَّمَاءِ ذَاتِ الْحُبُكِ ۝٧
Wassamaaa`i zaatil hubuk
📖 हिंदी अर्थ
और आसमान की क़सम जिसमें रहते हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • अस-समा: आकाश
  • ज़ातिल-हुबुक: सुंदर रचना वाला, अच्छी बनावट वाला, या रास्तों वाला। 'हुबुक' का अर्थ है अच्छी तरह से बुनी हुई चीज़, जैसे कपड़े का बारीक और मज़बूत बुनावट। यहाँ आकाश की सुंदर, मज़बूत और व्यवस्थित रचना की ओर इशारा है।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने इस आयत में आकाश की क़सम खाई है, जो अपनी रचना में अत्यंत सुंदर, मज़बूत और व्यवस्थित है। यह आकाश अपनी बनावट में इतना परिपूर्ण है कि जैसे कोई कारीगर अपने हुनर से बेहतरीन कपड़ा बुनता है, उसी तरह अल्लाह ने आकाश को बेहद खूबसूरत और मज़बूत बनाया है। इसमें तारे, ग्रह, और असंख्य रास्ते हैं जो इसकी महानता और व्यवस्था को दर्शाते हैं। यह क़सम इसलिए खाई गई है ताकि लोगों को यक़ीन हो कि अल्लाह का क़ौल (वचन) सच्चा है, और जो लोग क़ुरआन और रसूल ﷺ के बारे में संदेह या उलझन में हैं, वे समझ लें कि यह आकाश जिसे वे हर दिन देखते हैं, उसकी रचना ही अल्लाह की क़ुदरत का सबूत है। जो लोग इन निशानियों से आँखें बंद कर लेते हैं, वे सच्चाई से दूर हो जाते हैं और उन्हें हिदायत नहीं मिलती। यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की बनाई हुई हर चीज़ में उसकी ताक़त और हिकमत की झलक है, और जो इसे पहचान ले, वह कभी गुमराह नहीं हो सकता। प्यारे भाइयों और बहनों! जब हम आसमान की तरफ देखें, तो सोचें कि जिसने इसे इतनी खूबसूरती से बनाया है, वह हमारी दुआएँ सुनता है, हमारी मदद करता है, और हमें सीधा रास्ता दिखाने के लिए क़ुरआन भेजा है। इसलिए हमें उसकी इबादत में पूरा यक़ीन रखना चाहिए और उसके दिए हुए दीन को अपनाना चाहिए, क्योंकि यही हमारी कामयाबी का ज़रिया है।



📜 आयत 5-9 — सूरा अज़-ज़ारियात

5إِنَّمَا تُوعَدُونَ لَصَادِقٌ
कि तुम से जो वायदा किया जाता है ज़रूर बिल्कुल सच्चा है
6وَإِنَّ الدِّينَ لَوَاقِعٌ
और (आमाल की) जज़ा (सज़ा) ज़रूर होगी
7وَالسَّمَاءِ ذَاتِ الْحُبُكِ
और आसमान की क़सम जिसमें रहते हैं
8إِنَّكُمْ لَفِي قَوْلٍ مُّخْتَلِفٍ
कि (ऐ अहले मक्का) तुम लोग एक ऐसी मुख्तलिफ़ बेजोड़ बात में पड़े हो
9يُؤْفَكُ عَنْهُ مَنْ أُفِكَ
कि उससे वही फेरा जाएगा (गुमराह होगा)
अज़-ज़ारियातकुरान सूची
60आयत
मक्कीअवतरण स्थान
7आयत

अनुवाद — अज़-ज़ारियात 7

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Monday, September 28, 2026

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