अज़-ज़ारियात · 8/60
अनुवाद उच्चारण — अज़-ज़ारियात
إِنَّكُمْ لَفِي قَوْلٍ مُّخْتَلِفٍ ۝٨
Innakum lafee qawlim mukhtalif
📖 हिंदी अर्थ
कि (ऐ अहले मक्का) तुम लोग एक ऐसी मुख्तलिफ़ बेजोड़ बात में पड़े हो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • क़ौलिन मुख्तलिफ़: परस्पर विरोधी और असंगत बातें।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने इस आयत में उन लोगों को सम्बोधित किया है जो पैग़म्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) और क़ुरआन को झुठलाते थे। अल्लाह फ़रमाता है कि तुम लोग अपनी बातों में बड़े विरोधाभास में पड़े हुए हो। कभी तुम कहते हो कि यह क़ुरआन जादू है, तो कभी कहते हो कि यह शायरी है। कभी तुम पैग़म्बर (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) को जादूगर कहते हो, तो कभी शायर। यह तुम्हारी बातें आपस में ही टकरा रही हैं — एक दूसरे की नक़्ज़ (खंडन) करती हैं। यही उनका हाल था कि वे कभी कुछ कहते, कभी कुछ — किसी एक बात पर स्थिर नहीं रहते। उनका यह विरोधाभासी रवैया इस बात का सबूत है कि वे सत्य से भटके हुए थे और उनके पास कोई ठोस दलील नहीं थी।

अल्लाह तआला ने इससे पहले की आयतों में आसमान की क़सम खाई है — उस आसमान की जिसकी बनावट बहुत ही सुन्दर और मज़बूत है — कि ये लोग सच्चाई से दूर होकर उलझनों में पड़े हुए हैं। जो व्यक्ति अल्लाह की निशानियों और स्पष्ट प्रमाणों से मुँह मोड़ता है, वह कभी सीधी राह नहीं पा सकता। उसके दिल में अल्लाह की तरफ़ से अंधेरा डाल दिया जाता है, और वह हर बात में उलझा रहता है — न तो पूरी तरह ईमान लाता है और न ही अपने इन्कार पर कोई ठोस दलील पेश कर पाता है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य का रास्ता हमेशा स्पष्ट और सीधा होता है। जो लोग सच्चाई को स्वीकार कर लेते हैं, उनके दिलों को सुकून मिलता है और उनकी बातें एक जैसी और स्थिर होती हैं। जबकि झूठ और इन्कार की राह हमेशा उलझनों और विरोधाभासों से भरी होती है। क़ुरआन और पैग़म्बर (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) की शिक्षाएँ इतनी स्पष्ट और तर्कसंगत हैं कि कोई भी निष्पक्ष व्यक्ति उन्हें स्वीकार किए बिना नहीं रह सकता। अल्लाह की रहमत और हिदायत उन्हीं को मिलती है जो सच्चाई की तलाश में निकलते हैं और अपने दिलों को अल्लाह की तरफ़ खोलते हैं। आइए हम उन लोगों में से न बनें जो हर बात में उलझे रहते हैं, बल्कि हम उन लोगों में से बनें जो सत्य को पहचानकर उस पर स्थिर रहते हैं — क्योंकि स्थिरता और सुकून सिर्फ़ ईमान में है।



📜 आयत 6-10 — अज़-ज़ारियात

6وَإِنَّ الدِّينَ لَوَاقِعٌ
और (आमाल की) जज़ा (सज़ा) ज़रूर होगी
7وَالسَّمَاءِ ذَاتِ الْحُبُكِ
और आसमान की क़सम जिसमें रहते हैं
8إِنَّكُمْ لَفِي قَوْلٍ مُّخْتَلِفٍ
कि (ऐ अहले मक्का) तुम लोग एक ऐसी मुख्तलिफ़ बेजोड़ बात में पड़े हो
9يُؤْفَكُ عَنْهُ مَنْ أُفِكَ
कि उससे वही फेरा जाएगा (गुमराह होगा)
10قُتِلَ الْخَرَّاصُونَ
जो (ख़ुदा के इल्म में) फेरा जा चुका है अटकल दौड़ाने वाले हलाक हों
अज़-ज़ारियातकुरान सूची
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8आयत

अनुवाद — अज़-ज़ारियात 8

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Wednesday, August 19, 2026

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