Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- وَاصْبِرْ: धैर्य रखें, सहन करें।
- لِحُكْمِ رَبِّكَ: अपने रब के फैसले और आदेश पर।
- بِأَعْيُنِنَا: हमारी आँखों के सामने, हमारी निगरानी और सुरक्षा में।
- وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ: अपने रब की प्रशंसा के साथ उसकी पवित्रता का वर्णन करें (सुब्हान अल्लाह व बिहम्दिही कहें)।
- حِينَ تَقُومُ: जब आप उठें (नींद से या किसी काम के लिए)।
विस्तृत तफसीर:
ऐ नबी! आप अपने रब के हुक्म और उसके फैसले पर पूरा धैर्य रखें। जो मुश्किलें आपको रिसालत (पैग़म्बरी) के काम में आती हैं, जो बातें आपकी क़ौम आपको सुनाती है, उन सब पर सब्र करें। यह न समझें कि आप अकेले हैं या आपकी परवाह नहीं की जा रही — बल्कि आप हमारी आँखों के सामने हैं, हमारी निगरानी और हिफ़ाज़त में हैं। हम आपको देख रहे हैं, आपकी हर हरकत से वाक़िफ़ हैं, और आपकी हिफ़ाज़त हमारे ज़िम्मे है। यह बात आपके दिल को तसल्ली देने के लिए काफ़ी है कि आपका रब आपके साथ है, आपको देख रहा है और आपकी मदद कर रहा है।
फिर अल्लाह तआला आपको हिदायत देता है कि जब आप नींद से उठें, या किसी भी काम के लिए खड़े हों, तो अपने रब की तस्बीह (पवित्रता का वर्णन) करें और उसकी हम्द (प्रशंसा) के साथ उसे याद करें। यानी "सुब्हान अल्लाह व बिहम्दिही" कहें। यह आपके लिए नूर (रोशनी) है, आपके दिल की सफ़ाई है, और आपके रब से क़ुर्बत (नज़दीकी) का ज़रिया है।
यह आदेश सिर्फ़ नबी के लिए नहीं, बल्कि हर मोमिन के लिए है। जब हम नींद से उठते हैं, जब हम किसी काम की शुरुआत करते हैं, तो हमें अल्लाह की तस्बीह और हम्द करनी चाहिए। यह हमें दिन भर की मुश्किलों के लिए ताक़त देता है, हमारे दिल को रौशन करता है, और हमें अल्लाह की याद में जोड़ता है।
इस आयत में अल्लाह तआला की सिफ़त "आँखें" का ज़िक्र आया है — "बिआ'युनिना" (हमारी आँखों के सामने)। यहाँ यह समझना ज़रूरी है कि अल्लाह की आँखें उसकी ज़ात के लायक़ हैं, किसी मख़लूक़ की आँखों जैसी नहीं। हम उनकी कैफ़ियत (तरीके) का अंदाज़ा नहीं लगा सकते, न ही उन्हें किसी चीज़ से मिला सकते हैं। यह सिर्फ़ अल्लाह की पूरी निगरानी और हिफ़ाज़त की ताकीद के लिए है। यही सलफ़ (पिछले नेक लोगों) का रास्ता है — बिना तश्बीह (मिलाने) और बिना तकीफ़ (कैफ़ियत बताने) के ईमान लाना।
प्यारे मोमिनों! यह आयत हमें सिखाती है कि जब ज़िंदगी में मुश्किलें आएं, जब लोगों की बातें दिल को दुखाएं, जब हालात सख़्त हों — तो हमें सब्र करना है, क्योंकि अल्लाह हमें देख रहा है। वह हमारे साथ है। और सब्र के साथ-साथ अल्लाह की तस्बीह और हम्द हमारी रूह की ग़िज़ा है। यही वह चीज़ है जो हमें मुश्किलों में ताक़त देती है और हमारे दिल को सुकून देती है। अल्लाह से दुआ है कि वह हमें सब्र करने वाला और अपनी याद में रहने वाला बनाए। आमीन।
📜 आयत 46-49 — सूरा अत-तूर
अनुवाद — अत-तूर 48
सूरा अत-तूर आयत 48 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) तुम अपने परवरदिगार के हुक्म से इन्तेज़ार…सूरा आयत 48/49 — सूरा अत-तूर الطور (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तूर सुनें, सूरा अत-तूर अनुवाद, सूरा अत-तूर mp3, सूरा अत-तूर pdf. आयत 46–49. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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