अत-तूर · 47/49
अनुवाद उच्चारण — सूरा अत-तूर
وَإِنَّ لِلَّذِينَ ظَلَمُوا عَذَابًا دُونَ ذَٰلِكَ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ ۝٤٧
Wa inna lillazeena zalamoo `azaaban doona zalika wa laakinna aksarahum laa ya`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
और इसमें शक़ नहीं कि ज़ालिमों के लिए इसके अलावा और भी अज़ाब है मगर उनमें बहुतेरे नहीं जानते हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • ظَلَمُوا (ज़ालिमू) – जिन्होंने अत्याचार किया, यानी कुफ़्र और शिर्क किया।
  • دُونَ ذَٰلِكَ (दूना ज़ालिक) – उस (आख़िरत के अज़ाब) से पहले, यानी दुनिया और बरज़ख़ का अज़ाब।
  • لَا يَعْلَمُونَ (ला य'लमून) – वे नहीं जानते।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में उन ज़ालिमों के बारे में बताते हैं जिन्होंने अपने ऊपर अत्याचार किया — यानी कुफ़्र और गुनाहों का रास्ता अपनाया। उनके लिए आख़िरत के उस बड़े अज़ाब के अलावा, जो क़यामत के दिन उनके लिए तैयार किया गया है, एक और अज़ाब है जो उससे पहले आएगा। यह अज़ाब दुनिया में भी आ सकता है — जैसे बद्र के मैदान में काफ़िरों का क़त्ल होना, उन्हें क़ैद किया जाना, और उनकी इज़्ज़त और ताक़त का ख़ात्मा होना — और बरज़ख़ (क़ब्र) में भी अज़ाब होगा, जो मरने के बाद शुरू हो जाता है।

मगर अफ़सोस! इनमें से अधिकतर लोग इस हक़ीक़त को नहीं जानते। अगर वे जान लेते कि उनका अंजाम कितना भयानक है, तो वे अपने कुफ़्र और ज़ुल्म पर क़ायम न रहते। उनकी नादानी और ग़फ़लत ही उन्हें अल्लाह की नाफ़रमानी पर मज़बूत करती है।

दावती पहलू:

यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। अल्लाह तआला ने यहाँ साफ़ कर दिया कि ज़ुल्म — चाहे वह अल्लाह पर शिर्क करके हो या उसके बंदों पर अत्याचार करके — कभी बेअंजाम नहीं रहता। अल्लाह की सुन्नत यही है कि वह ज़ालिमों को उनके किए की सज़ा देता है, चाहे वह दुनिया में हो या आख़िरत में। मगर अल्लाह की रहमत यह है कि उसने हमें तौबा का दरवाज़ा खुला रखा है। जो कोई अपने ज़ुल्म से बाज़ आए और अल्लाह की तरफ़ लौटे, अल्लाह उसे माफ़ करने के लिए तैयार है। यह आयत हमें सचेत करती है कि हम अपनी ज़िंदगी में किसी भी तरह के ज़ुल्म से बचें — चाहे वह अल्लाह के हुक्म की ख़िलाफ़वाज़ी हो या इंसानों के हक़ में कमी। अल्लाह का अज़ाब बहुत सख़्त है, लेकिन उसकी रहमत उससे भी बड़ी है। आओ, हम अपने रब की तरफ़ लौटें, उसकी इबादत करें और ज़ुल्म से दूर रहें, ताकि हम दुनिया और आख़िरत दोनों में अल्लाह की पनाह में रहें।



📜 आयत 45-49 — सूरा अत-तूर

45فَذَرْهُمْ حَتَّىٰ يُلَاقُوا يَوْمَهُمُ الَّذِي فِيهِ يُصْعَقُونَ
तो (ऐ रसूल) तुम इनको इनकी हालत पर छोड़ दो यहाँ तक कि वह जिसमें ये बेहोश हो जाएँगे
46يَوْمَ لَا يُغْنِي عَنْهُمْ كَيْدُهُمْ شَيْئًا وَلَا هُمْ يُنصَرُونَ
इनके सामने आ जाए जिस दिन न इनकी मक्कारी ही कुछ काम आएगी और न इनकी मदद ही की जाएगी
47وَإِنَّ لِلَّذِينَ ظَلَمُوا عَذَابًا دُونَ ذَٰلِكَ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ
और इसमें शक़ नहीं कि ज़ालिमों के लिए इसके अलावा और भी अज़ाब है मगर उनमें बहुतेरे नहीं जानते हैं
48وَاصْبِرْ لِحُكْمِ رَبِّكَ فَإِنَّكَ بِأَعْيُنِنَا ۖ وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ حِينَ تَقُومُ
और (ऐ रसूल) तुम अपने परवरदिगार के हुक्म से इन्तेज़ार में सब्र किए रहो तो तुम बिल्कुल हमारी निगेहदाश्त में हो तो जब तुम उठा करो तो अपने परवरदिगार की हम्द की तस्बीह किया करो
49وَمِنَ اللَّيْلِ فَسَبِّحْهُ وَإِدْبَارَ النُّجُومِ
और कुछ रात को भी और सितारों के ग़ुरूब होने के बाद तस्बीह किया करो
अत-तूरकुरान सूची
49आयत
मक्कीअवतरण स्थान
47आयत

अनुवाद — अत-तूर 47

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Thursday, October 1, 2026

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