सूरा अत-तूर अरबी और हिंदी

सूरा अत-तूर को पूरे हिंदी अनुवाद, उच्चारण और ऑडियो तिलावत के साथ पढ़ें। आयत-दर-आयत हिंदी अर्थ। (49 आयत — مكية). अत-तूर सुनें, अत-तूर अनुवाद, अत-तूर mp3, अत-तूर pdf.

सूरा अत-तूर पढ़ें और सुनें

🎧 आयत
M Mishary Rashid Alafasy
M Mahmoud Khalil Al-Husary
A Abdurrahman As-Sudais
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi
A Abdul Basit Abdul Samad
A Ali Al-Hudhaify
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy
A Abu Bakr Ash-Shaatree
M Muhammad Ayyoub
A Abdullah Basfar
A Abdullah Al-Juhani
M Maher Al Muaiqly
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وَالطُّورِ ۝١
📖 अनुवाद आयत 1
(कोहे) तूर की क़सम
وَكِتَابٍ مَّسْطُورٍ ۝٢
📖 अनुवाद आयत 2
और उसकी किताब (लौहे महफूज़) की
فِي رَقٍّ مَّنشُورٍ ۝٣
📖 अनुवाद आयत 3
जो क़ुशादा औराक़ में लिखी हुई है
وَالْبَيْتِ الْمَعْمُورِ ۝٤
📖 अनुवाद आयत 4
और बैतुल मामूर की (जो काबा के सामने फरिश्तों का क़िब्ला है)
وَالسَّقْفِ الْمَرْفُوعِ ۝٥
📖 अनुवाद आयत 5
और ऊँची छत (आसमान) की
وَالْبَحْرِ الْمَسْجُورِ ۝٦
📖 अनुवाद आयत 6
और जोश व ख़रोश वाले समन्दर की
إِنَّ عَذَابَ رَبِّكَ لَوَاقِعٌ ۝٧
📖 अनुवाद आयत 7
कि तुम्हारे परवरदिगार का अज़ाब बेशक वाकेए होकर रहेगा
مَّا لَهُ مِن دَافِعٍ ۝٨
📖 अनुवाद आयत 8
(और) इसका कोई रोकने वाला नहीं
يَوْمَ تَمُورُ السَّمَاءُ مَوْرًا ۝٩
📖 अनुवाद आयत 9
जिस दिन आसमान चक्कर खाने लगेगा
وَتَسِيرُ الْجِبَالُ سَيْرًا ۝١٠
📖 अनुवाद आयत 10
और पहाड़ उड़ने लगेंगे
فَوَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ ۝١١
📖 अनुवाद आयत 11
तो उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है
الَّذِينَ هُمْ فِي خَوْضٍ يَلْعَبُونَ ۝١٢
📖 अनुवाद आयत 12
जो लोग बातिल में पड़े खेल रहे हैं
يَوْمَ يُدَعُّونَ إِلَىٰ نَارِ جَهَنَّمَ دَعًّا ۝١٣
📖 अनुवाद आयत 13
जिस दिन जहन्नुम की आग की तरफ उनको ढकेल ढकेल ले जाएँगे
هَٰذِهِ النَّارُ الَّتِي كُنتُم بِهَا تُكَذِّبُونَ ۝١٤
📖 अनुवाद आयत 14
(और उनसे कहा जाएगा) यही वह जहन्नुम है जिसे तुम झुठलाया करते थे
أَفَسِحْرٌ هَٰذَا أَمْ أَنتُمْ لَا تُبْصِرُونَ ۝١٥
📖 अनुवाद आयत 15
तो क्या ये जादू है या तुमको नज़र ही नहीं आता
اصْلَوْهَا فَاصْبِرُوا أَوْ لَا تَصْبِرُوا سَوَاءٌ عَلَيْكُمْ ۖ إِنَّمَا تُجْزَوْنَ مَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ ۝١٦
📖 अनुवाद आयत 16
इसी में घुसो फिर सब्र करो या बेसब्री करो (दोनों) तुम्हारे लिए यकसाँ हैं तुम्हें तो बस उन्हीं कामों का बदला मिलेगा जो तुम किया करते थे
إِنَّ الْمُتَّقِينَ فِي جَنَّاتٍ وَنَعِيمٍ ۝١٧
📖 अनुवाद आयत 17
बेशक परहेज़गार लोग बाग़ों और नेअमतों में होंगे
فَاكِهِينَ بِمَا آتَاهُمْ رَبُّهُمْ وَوَقَاهُمْ رَبُّهُمْ عَذَابَ الْجَحِيمِ ۝١٨
📖 अनुवाद आयत 18
जो (जो नेअमतें) उनके परवरदिगार ने उन्हें दी हैं उनके मज़े ले रहे हैं और उनका परवरदिगार उन्हें दोज़ख़ के अज़ाब से बचाएगा
كُلُوا وَاشْرَبُوا هَنِيئًا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ ۝١٩
📖 अनुवाद आयत 19
जो जो कारगुज़ारियाँ तुम कर चुके हो उनके सिले में (आराम से) तख्तों पर जो बराबर बिछे हुए हैं
مُتَّكِئِينَ عَلَىٰ سُرُرٍ مَّصْفُوفَةٍ ۖ وَزَوَّجْنَاهُم بِحُورٍ عِينٍ ۝٢٠
📖 अनुवाद आयत 20
तकिए लगाकर ख़ूब मज़े से खाओ पियो और हम बड़ी बड़ी ऑंखों वाली हूर से उनका ब्याह रचाएँगे
وَالَّذِينَ آمَنُوا وَاتَّبَعَتْهُمْ ذُرِّيَّتُهُم بِإِيمَانٍ أَلْحَقْنَا بِهِمْ ذُرِّيَّتَهُمْ وَمَا أَلَتْنَاهُم مِّنْ عَمَلِهِم مِّن شَيْءٍ ۚ كُلُّ امْرِئٍ بِمَا كَسَبَ رَهِينٌ ۝٢١
📖 अनुवाद आयत 21
और जिन लोगों ने ईमान क़ुबूल किया और उनकी औलाद ने भी ईमान में उनका साथ दिया तो हम उनकी औलाद को भी उनके दर्जे पहुँचा देंगे और हम उनकी कारगुज़ारियों में से कुछ भी कम न करेंगे हर शख़्श अपने आमाल के बदले में गिरवी है
وَأَمْدَدْنَاهُم بِفَاكِهَةٍ وَلَحْمٍ مِّمَّا يَشْتَهُونَ ۝٢٢
📖 अनुवाद आयत 22
और जिस क़िस्म के मेवे और गोश्त को उनका जी चाहेगा हम उन्हें बढ़ाकर अता करेंगे
يَتَنَازَعُونَ فِيهَا كَأْسًا لَّا لَغْوٌ فِيهَا وَلَا تَأْثِيمٌ ۝٢٣
📖 अनुवाद आयत 23
वहाँ एक दूसरे से शराब का जाम ले लिया करेंगे जिसमें न कोई बेहूदगी है और न गुनाह
۞ وَيَطُوفُ عَلَيْهِمْ غِلْمَانٌ لَّهُمْ كَأَنَّهُمْ لُؤْلُؤٌ مَّكْنُونٌ ۝٢٤
📖 अनुवाद आयत 24
(और ख़िदमत के लिए) नौजवान लड़के उनके आस पास चक्कर लगाया करेंगे वह (हुस्न व जमाल में) गोया एहतियात से रखे हुए मोती हैं
وَأَقْبَلَ بَعْضُهُمْ عَلَىٰ بَعْضٍ يَتَسَاءَلُونَ ۝٢٥
📖 अनुवाद आयत 25
और एक दूसरे की तरफ रूख़ करके (लुत्फ की) बातें करेंगे
قَالُوا إِنَّا كُنَّا قَبْلُ فِي أَهْلِنَا مُشْفِقِينَ ۝٢٦
📖 अनुवाद आयत 26
(उनमें से कुछ) कहेंगे कि हम इससे पहले अपने घर में (ख़ुदा से बहुत) डरा करते थे
فَمَنَّ اللَّهُ عَلَيْنَا وَوَقَانَا عَذَابَ السَّمُومِ ۝٢٧
📖 अनुवाद आयत 27
तो ख़ुदा ने हम पर बड़ा एहसान किया और हमको (जहन्नुम की) लौ के अज़ाब से बचा लिया
إِنَّا كُنَّا مِن قَبْلُ نَدْعُوهُ ۖ إِنَّهُ هُوَ الْبَرُّ الرَّحِيمُ ۝٢٨
📖 अनुवाद आयत 28
इससे क़ब्ल हम उनसे दुआएँ किया करते थे बेशक वह एहसान करने वाला मेहरबान है
فَذَكِّرْ فَمَا أَنتَ بِنِعْمَتِ رَبِّكَ بِكَاهِنٍ وَلَا مَجْنُونٍ ۝٢٩
📖 अनुवाद आयत 29
तो (ऐ रसूल) तुम नसीहत किए जाओ तो तुम अपने परवरदिगार के फज़ल से न काहिन हो और न मजनून किया
أَمْ يَقُولُونَ شَاعِرٌ نَّتَرَبَّصُ بِهِ رَيْبَ الْمَنُونِ ۝٣٠
📖 अनुवाद आयत 30
क्या (तुमको) ये लोग कहते हैं कि (ये) शायर हैं (और) हम तो उसके बारे में ज़माने के हवादिस का इन्तेज़ार कर रहे हैं
قُلْ تَرَبَّصُوا فَإِنِّي مَعَكُم مِّنَ الْمُتَرَبِّصِينَ ۝٣١
📖 अनुवाद आयत 31
तुम कह दो कि (अच्छा) तुम भी इन्तेज़ार करो मैं भी इन्तेज़ार करता हूँ
أَمْ تَأْمُرُهُمْ أَحْلَامُهُم بِهَٰذَا ۚ أَمْ هُمْ قَوْمٌ طَاغُونَ ۝٣٢
📖 अनुवाद आयत 32
क्या उनकी अक्लें उन्हें ये (बातें) बताती हैं या ये लोग हैं ही सरकश
أَمْ يَقُولُونَ تَقَوَّلَهُ ۚ بَل لَّا يُؤْمِنُونَ ۝٣٣
📖 अनुवाद आयत 33
क्या ये लोग कहते हैं कि इसने क़ुरान ख़ुद गढ़ लिया है बात ये है कि ये लोग ईमान ही नहीं रखते
فَلْيَأْتُوا بِحَدِيثٍ مِّثْلِهِ إِن كَانُوا صَادِقِينَ ۝٣٤
📖 अनुवाद आयत 34
तो अगर ये लोग सच्चे हैं तो ऐसा ही कलाम बना तो लाएँ
أَمْ خُلِقُوا مِنْ غَيْرِ شَيْءٍ أَمْ هُمُ الْخَالِقُونَ ۝٣٥
📖 अनुवाद आयत 35
क्या ये लोग किसी के (पैदा किये) बग़ैर ही पैदा हो गए हैं या यही लोग (मख़लूक़ात के) पैदा करने वाले हैं
أَمْ خَلَقُوا السَّمَاوَاتِ وَالْأَرْضَ ۚ بَل لَّا يُوقِنُونَ ۝٣٦
📖 अनुवाद आयत 36
या इन्होने ही ने सारे आसमान व ज़मीन पैदा किए हैं (नहीं) बल्कि ये लोग यक़ीन ही नहीं रखते
أَمْ عِندَهُمْ خَزَائِنُ رَبِّكَ أَمْ هُمُ الْمُصَيْطِرُونَ ۝٣٧
📖 अनुवाद आयत 37
क्या तुम्हारे परवरदिगार के ख़ज़ाने इन्हीं के पास हैं या यही लोग हाकिम हैं
أَمْ لَهُمْ سُلَّمٌ يَسْتَمِعُونَ فِيهِ ۖ فَلْيَأْتِ مُسْتَمِعُهُم بِسُلْطَانٍ مُّبِينٍ ۝٣٨
📖 अनुवाद आयत 38
या उनके पास कोई सीढ़ी है जिस पर (चढ़ कर आसमान से) सुन आते हैं जो सुन आया करता हो तो वह कोई सरीही दलील पेश करे
أَمْ لَهُ الْبَنَاتُ وَلَكُمُ الْبَنُونَ ۝٣٩
📖 अनुवाद आयत 39
क्या ख़ुदा के लिए बेटियाँ हैं और तुम लोगों के लिए बेटे
أَمْ تَسْأَلُهُمْ أَجْرًا فَهُم مِّن مَّغْرَمٍ مُّثْقَلُونَ ۝٤٠
📖 अनुवाद आयत 40
या तुम उनसे (तबलीग़े रिसालत की) उजरत माँगते हो कि ये लोग कर्ज़ के बोझ से दबे जाते हैं
أَمْ عِندَهُمُ الْغَيْبُ فَهُمْ يَكْتُبُونَ ۝٤١
📖 अनुवाद आयत 41
या इन लोगों के पास ग़ैब (का इल्म) है कि वह लिख लेते हैं
أَمْ يُرِيدُونَ كَيْدًا ۖ فَالَّذِينَ كَفَرُوا هُمُ الْمَكِيدُونَ ۝٤٢
📖 अनुवाद आयत 42
या ये लोग कुछ दाँव चलाना चाहते हैं तो जो लोग काफ़िर हैं वह ख़ुद अपने दांव में फँसे हैं
أَمْ لَهُمْ إِلَٰهٌ غَيْرُ اللَّهِ ۚ سُبْحَانَ اللَّهِ عَمَّا يُشْرِكُونَ ۝٤٣
📖 अनुवाद आयत 43
या ख़ुदा के सिवा इनका कोई (दूसरा) माबूद है जिन चीज़ों को ये लोग (ख़ुदा का) शरीक बनाते हैं वह उससे पाक और पाक़ीज़ा है
وَإِن يَرَوْا كِسْفًا مِّنَ السَّمَاءِ سَاقِطًا يَقُولُوا سَحَابٌ مَّرْكُومٌ ۝٤٤
📖 अनुवाद आयत 44
और अगर ये लोग आसमान से कोई अज़ाब (अज़ाब का) टुकड़ा गिरते हुए देखें तो बोल उठेंगे ये तो दलदार बादल है
فَذَرْهُمْ حَتَّىٰ يُلَاقُوا يَوْمَهُمُ الَّذِي فِيهِ يُصْعَقُونَ ۝٤٥
📖 अनुवाद आयत 45
तो (ऐ रसूल) तुम इनको इनकी हालत पर छोड़ दो यहाँ तक कि वह जिसमें ये बेहोश हो जाएँगे
يَوْمَ لَا يُغْنِي عَنْهُمْ كَيْدُهُمْ شَيْئًا وَلَا هُمْ يُنصَرُونَ ۝٤٦
📖 अनुवाद आयत 46
इनके सामने आ जाए जिस दिन न इनकी मक्कारी ही कुछ काम आएगी और न इनकी मदद ही की जाएगी
وَإِنَّ لِلَّذِينَ ظَلَمُوا عَذَابًا دُونَ ذَٰلِكَ وَلَٰكِنَّ أَكْثَرَهُمْ لَا يَعْلَمُونَ ۝٤٧
📖 अनुवाद आयत 47
और इसमें शक़ नहीं कि ज़ालिमों के लिए इसके अलावा और भी अज़ाब है मगर उनमें बहुतेरे नहीं जानते हैं
وَاصْبِرْ لِحُكْمِ رَبِّكَ فَإِنَّكَ بِأَعْيُنِنَا ۖ وَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ حِينَ تَقُومُ ۝٤٨
📖 अनुवाद आयत 48
और (ऐ रसूल) तुम अपने परवरदिगार के हुक्म से इन्तेज़ार में सब्र किए रहो तो तुम बिल्कुल हमारी निगेहदाश्त में हो तो जब तुम उठा करो तो अपने परवरदिगार की हम्द की तस्बीह किया करो
وَمِنَ اللَّيْلِ فَسَبِّحْهُ وَإِدْبَارَ النُّجُومِ ۝٤٩
📖 अनुवाद आयत 49
और कुछ रात को भी और सितारों के ग़ुरूब होने के बाद तस्बीह किया करो
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52الطور At-Tur 📚 49 आयत مكية

आयत-दर-आयत – सूरा अत-तूर — 49 आयत




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए