अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَبْلَغُهُم (उनकी पहुँच/सीमा) — यानी उनके ज्ञान की आख़िरी हद।
- مِنَ الْعِلْمِ (ज्ञान में से) — यानी ज्ञान के मामले में उन्हें जितना कुछ मिला है।
- ضَلَّ (भटक गया) — सीधे रास्ते से हट गया।
- اهْتَدَىٰ (हिदायत पाई) — सीधे रास्ते पर चल पड़ा।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों के बारे में बताती है जो दुनिया की चकाचौंध में डूबे हुए हैं और आख़िरत (परलोक) को भूल चुके हैं। वे सिर्फ़ दुनिया की ख्वाहिशों, माल-दौलत और ऐश-ओ-आराम को ही अपना निशाना बनाते हैं। उनका यही दुनियापरस्ताना नज़रिया उनके ज्ञान की आख़िरी सीमा है — यानी उनकी समझ और अक़्ल इससे आगे नहीं बढ़ती। वे फ़रिश्तों को औरतों के नाम से पुकारते हैं और बिना किसी सच्चे इल्म के झूठी बातें गढ़ते हैं, क्योंकि उनका इल्म महज़ दुनिया की जानकारी तक ही सीमित है, उन्हें आख़िरत की सच्चाई का कोई ज्ञान नहीं।
फिर अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को तसल्ली देते हुए फ़रमाता है: "ऐ रसूल! आप इनके जवाब और इनकी हिदायत की फ़िक्र न करें। आपका रब ही बेहतर जानता है कि कौन उसके रास्ते से भटक गया है और कौन हिदायत पर है।" यानी अल्लाह के इल्म में सब कुछ साफ़ है — वह जानता है कि किसने सच को ठुकराया और किसने दिल से उसे क़ुबूल किया। वह हर एक को उसके कर्मों के अनुसार बदला देने वाला है।
इस आयत में उन लोगों के लिए बड़ी सख़्त चेतावनी है जो अल्लाह की किताब और उसके रसूल ﷺ की सुन्नत से मुँह मोड़ते हैं, अपनी नफ़्सियानी ख्वाहिशों और दुनिया के फ़ायदों को आख़िरत पर तरजीह देते हैं। उन्हें याद रखना चाहिए कि उनकी सारी दुनियादारी, उनकी सारी समझदारी — सब कुछ मिट्टी में मिल जाने वाला है, और आख़िरत में उनका हिसाब अल्लाह के सामने होगा।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान की असली कामयाबी उस दुनिया में नहीं जो आँखों के सामने है, बल्कि उस आख़िरत में है जो हमारी आँखों से छिपी है। जो लोग सिर्फ़ दुनिया की चमक-दमक में खो जाते हैं, वह उस मुक़ाम तक पहुँचते हैं जहाँ उनका इल्म ख़त्म हो जाता है — यानी उनकी समझ क़ब्र तक ही सीमित रह जाती है। लेकिन जो लोग अल्लाह की राह पर चलते हैं, उनका इल्म और उनकी समझ आख़िरत तक पहुँचती है, और वहीं उनकी कामयाबी है।
अल्लाह तआला हमें दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई दे, और हमें उन लोगों में से बनाए जो सीधे रास्ते पर चलते हैं और अपने रब की रहमत के हक़दार बनते हैं। आमीन।
📜 आयत 28-32 — अन-नज्म
अनुवाद — अन-नज्म 30
सूरा अन-नज्म आयत 30 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उनके इल्म की यही इन्तिहा है तुम्हारा परवरदिगार, जो उसके…सूरा आयत 30/62 — अन-नज्म النجم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नज्म सुनें, अन-नज्म अनुवाद, अन-नज्म mp3, अन-नज्म pdf. आयत 28–32. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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