अन-नज्म · 30/62
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नज्म
ذَٰلِكَ مَبْلَغُهُم مِّنَ الْعِلْمِ ۚ إِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعْلَمُ بِمَن ضَلَّ عَن سَبِيلِهِ وَهُوَ أَعْلَمُ بِمَنِ اهْتَدَىٰ ۝٣٠
Zalika mablaghuhum minal `ilm; inna rabbaka huwa a`lamu biman dalla `an sabee lihee wa huwa a`lamu bimanih tadaa
📖 हिंदी अर्थ
उनके इल्म की यही इन्तिहा है तुम्हारा परवरदिगार, जो उसके रास्ते से भटक गया उसको भी ख़ूब जानता है, और जो राहे रास्त पर है उनसे भी ख़ूब वाक़िफ है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَبْلَغُهُم (उनकी पहुँच/सीमा) — यानी उनके ज्ञान की आख़िरी हद।
  • مِنَ الْعِلْمِ (ज्ञान में से) — यानी ज्ञान के मामले में उन्हें जितना कुछ मिला है।
  • ضَلَّ (भटक गया) — सीधे रास्ते से हट गया।
  • اهْتَدَىٰ (हिदायत पाई) — सीधे रास्ते पर चल पड़ा।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के बारे में बताती है जो दुनिया की चकाचौंध में डूबे हुए हैं और आख़िरत (परलोक) को भूल चुके हैं। वे सिर्फ़ दुनिया की ख्वाहिशों, माल-दौलत और ऐश-ओ-आराम को ही अपना निशाना बनाते हैं। उनका यही दुनियापरस्ताना नज़रिया उनके ज्ञान की आख़िरी सीमा है — यानी उनकी समझ और अक़्ल इससे आगे नहीं बढ़ती। वे फ़रिश्तों को औरतों के नाम से पुकारते हैं और बिना किसी सच्चे इल्म के झूठी बातें गढ़ते हैं, क्योंकि उनका इल्म महज़ दुनिया की जानकारी तक ही सीमित है, उन्हें आख़िरत की सच्चाई का कोई ज्ञान नहीं।

फिर अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को तसल्ली देते हुए फ़रमाता है: "ऐ रसूल! आप इनके जवाब और इनकी हिदायत की फ़िक्र न करें। आपका रब ही बेहतर जानता है कि कौन उसके रास्ते से भटक गया है और कौन हिदायत पर है।" यानी अल्लाह के इल्म में सब कुछ साफ़ है — वह जानता है कि किसने सच को ठुकराया और किसने दिल से उसे क़ुबूल किया। वह हर एक को उसके कर्मों के अनुसार बदला देने वाला है।

इस आयत में उन लोगों के लिए बड़ी सख़्त चेतावनी है जो अल्लाह की किताब और उसके रसूल ﷺ की सुन्नत से मुँह मोड़ते हैं, अपनी नफ़्सियानी ख्वाहिशों और दुनिया के फ़ायदों को आख़िरत पर तरजीह देते हैं। उन्हें याद रखना चाहिए कि उनकी सारी दुनियादारी, उनकी सारी समझदारी — सब कुछ मिट्टी में मिल जाने वाला है, और आख़िरत में उनका हिसाब अल्लाह के सामने होगा।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान की असली कामयाबी उस दुनिया में नहीं जो आँखों के सामने है, बल्कि उस आख़िरत में है जो हमारी आँखों से छिपी है। जो लोग सिर्फ़ दुनिया की चमक-दमक में खो जाते हैं, वह उस मुक़ाम तक पहुँचते हैं जहाँ उनका इल्म ख़त्म हो जाता है — यानी उनकी समझ क़ब्र तक ही सीमित रह जाती है। लेकिन जो लोग अल्लाह की राह पर चलते हैं, उनका इल्म और उनकी समझ आख़िरत तक पहुँचती है, और वहीं उनकी कामयाबी है।

अल्लाह तआला हमें दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई दे, और हमें उन लोगों में से बनाए जो सीधे रास्ते पर चलते हैं और अपने रब की रहमत के हक़दार बनते हैं। आमीन।



📜 आयत 28-32 — सूरा अन-नज्म

28وَمَا لَهُم بِهِ مِنْ عِلْمٍ ۖ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا الظَّنَّ ۖ وَإِنَّ الظَّنَّ لَا يُغْنِي مِنَ الْحَقِّ شَيْئًا
वह लोग तो बस गुमान (ख्याल) के पीछे चल रहे हैं, हालॉकि गुमान यक़ीन के बदले में कुछ भी काम नहीं आया करता,
29فَأَعْرِضْ عَن مَّن تَوَلَّىٰ عَن ذِكْرِنَا وَلَمْ يُرِدْ إِلَّا الْحَيَاةَ الدُّنْيَا
तो जो हमारी याद से रदगिरदानी करे ओर सिर्फ दुनिया की ज़िन्दगी ही का तालिब हो तुम भी उससे मुँह फेर लो
30ذَٰلِكَ مَبْلَغُهُم مِّنَ الْعِلْمِ ۚ إِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعْلَمُ بِمَن ضَلَّ عَن سَبِيلِهِ وَهُوَ أَعْلَمُ بِمَنِ اهْتَدَىٰ
उनके इल्म की यही इन्तिहा है तुम्हारा परवरदिगार, जो उसके रास्ते से भटक गया उसको भी ख़ूब जानता है, और जो राहे रास्त पर है उनसे भी ख़ूब वाक़िफ है
31وَلِلَّهِ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ لِيَجْزِيَ الَّذِينَ أَسَاءُوا بِمَا عَمِلُوا وَيَجْزِيَ الَّذِينَ أَحْسَنُوا بِالْحُسْنَى
और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही का है, ताकि जिन लोगों ने बुराई की हो उनको उनकी कारस्तानियों की सज़ा दे और जिन लोगों ने नेकी की है (उनकी नेकी की जज़ा दे)
32الَّذِينَ يَجْتَنِبُونَ كَبَائِرَ الْإِثْمِ وَالْفَوَاحِشَ إِلَّا اللَّمَمَ ۚ إِنَّ رَبَّكَ وَاسِعُ الْمَغْفِرَةِ ۚ هُوَ أَعْلَمُ بِكُمْ إِذْ أَنشَأَكُم مِّنَ الْأَرْضِ وَإِذْ أَنتُمْ أَجِنَّةٌ فِي بُطُونِ أُمَّهَاتِكُمْ ۖ فَلَا تُزَكُّوا أَنفُسَكُمْ ۖ هُوَ أَعْلَمُ بِمَنِ اتَّقَىٰ
जो सग़ीरा गुनाहों के सिवा कबीरा गुनाहों से और बेहयाई की बातों से बचे रहते हैं बेशक तुम्हारा परवरदिगार बड़ी बख्यिश वाला है वही तुमको ख़ूब जानता है जब उसने तुमको मिटटी से पैदा किया और जब तुम अपनी माँ के पेट में बच्चे थे तो (तकब्बुर) से अपने नफ्स की पाकीज़गी न जताया करो जो परहेज़गार है उसको वह ख़ूब जानता है
अन-नज्मकुरान सूची
62आयत
मक्कीअवतरण स्थान
30आयत

अनुवाद — अन-नज्म 30

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Thursday, October 1, 2026

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