सूरा अन-नज्म अरबी और हिंदी
सूरा अन-नज्म को पूरे हिंदी अनुवाद, उच्चारण और ऑडियो तिलावत के साथ पढ़ें। आयत-दर-आयत हिंदी अर्थ। (62 आयत — مكية). अन-नज्म सुनें, अन-नज्म अनुवाद, अन-नज्म mp3, अन-नज्म pdf.सूरा अन-नज्म पढ़ें और सुनें
🎧 आयत
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Mishary Rashid Alafasy
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Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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Maher Al Muaiqly
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x1
مَا ضَلَّ صَاحِبُكُمْ وَمَا غَوَىٰ ٢
📖 अनुवाद
आयत 2
कि तुम्हारे रफ़ीक़ (मोहम्मद) न गुमराह हुए और न बहके
ذُو مِرَّةٍ فَاسْتَوَىٰ ٦
📖 अनुवाद
आयत 6
जो बड़ा ज़बरदस्त है और जब ये (आसमान के) ऊँचे (मुशरक़ो) किनारे पर था तो वह अपनी (असली सूरत में) सीधा खड़ा हुआ
فَأَوْحَىٰ إِلَىٰ عَبْدِهِ مَا أَوْحَىٰ ١٠
📖 अनुवाद
आयत 10
ख़ुदा ने अपने बन्दे की तरफ जो 'वही' भेजी सो भेजी
أَفَتُمَارُونَهُ عَلَىٰ مَا يَرَىٰ ١٢
📖 अनुवाद
आयत 12
तो क्या वह (रसूल) जो कुछ देखता है तुम लोग उसमें झगड़ते हो
وَلَقَدْ رَآهُ نَزْلَةً أُخْرَىٰ ١٣
📖 अनुवाद
आयत 13
और उन्होने तो उस (जिबरील) को एक बार (शबे मेराज) और देखा है
مَا زَاغَ الْبَصَرُ وَمَا طَغَىٰ ١٧
📖 अनुवाद
आयत 17
(उस वक्त भी) उनकी ऑंख न तो और तरफ़ माएल हुई और न हद से आगे बढ़ी
لَقَدْ رَأَىٰ مِنْ آيَاتِ رَبِّهِ الْكُبْرَىٰ ١٨
📖 अनुवाद
आयत 18
और उन्होने यक़ीनन अपने परवरदिगार (की क़ुदरत) की बड़ी बड़ी निशानियाँ देखीं
أَفَرَأَيْتُمُ اللَّاتَ وَالْعُزَّىٰ ١٩
📖 अनुवाद
आयत 19
तो भला तुम लोगों ने लात व उज्ज़ा और तीसरे पिछले मनात को देखा
أَلَكُمُ الذَّكَرُ وَلَهُ الْأُنثَىٰ ٢١
📖 अनुवाद
आयत 21
क्या तुम्हारे तो बेटे हैं और उसके लिए बेटियाँ
إِنْ هِيَ إِلَّا أَسْمَاءٌ سَمَّيْتُمُوهَا أَنتُمْ وَآبَاؤُكُم مَّا أَنزَلَ اللَّهُ بِهَا مِن سُلْطَانٍ ۚ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا الظَّنَّ وَمَا تَهْوَى الْأَنفُسُ ۖ وَلَقَدْ جَاءَهُم مِّن رَّبِّهِمُ الْهُدَىٰ ٢٣
📖 अनुवाद
आयत 23
ये तो बस सिर्फ नाम ही नाम है जो तुमने और तुम्हारे बाप दादाओं ने गढ़ लिए हैं, ख़ुदा ने तो इसकी कोई सनद नाज़िल नहीं की ये लोग तो बस अटकल और अपनी नफ़सानी ख्वाहिश के पीछे चल रहे हैं हालॉकि उनके पास उनके परवरदिगार की तरफ से हिदायत भी आ चुकी है
أَمْ لِلْإِنسَانِ مَا تَمَنَّىٰ ٢٤
📖 अनुवाद
आयत 24
क्या जिस चीज़ की इन्सान तमन्ना करे वह उसे ज़रूर मिलती है
فَلِلَّهِ الْآخِرَةُ وَالْأُولَىٰ ٢٥
📖 अनुवाद
आयत 25
आख़ेरत और दुनिया तो ख़ास ख़ुदा ही के एख्तेयार में हैं
۞ وَكَم مِّن مَّلَكٍ فِي السَّمَاوَاتِ لَا تُغْنِي شَفَاعَتُهُمْ شَيْئًا إِلَّا مِن بَعْدِ أَن يَأْذَنَ اللَّهُ لِمَن يَشَاءُ وَيَرْضَىٰ ٢٦
📖 अनुवाद
आयत 26
और आसमानों में बहुत से फरिश्ते हैं जिनकी सिफ़ारिश कुछ भी काम न आती, मगर ख़ुदा जिसके लिए चाहे इजाज़त दे दे और पसन्द करे उसके बाद (सिफ़ारिश कर सकते हैं)
إِنَّ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ لَيُسَمُّونَ الْمَلَائِكَةَ تَسْمِيَةَ الْأُنثَىٰ ٢٧
📖 अनुवाद
आयत 27
जो लोग आख़ेरत पर ईमान नहीं रखते वह फ़रिश्तों के नाम रखते हैं औरतों के से नाम हालॉकि उन्हें इसकी कुछ ख़बर नहीं
وَمَا لَهُم بِهِ مِنْ عِلْمٍ ۖ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا الظَّنَّ ۖ وَإِنَّ الظَّنَّ لَا يُغْنِي مِنَ الْحَقِّ شَيْئًا ٢٨
📖 अनुवाद
आयत 28
वह लोग तो बस गुमान (ख्याल) के पीछे चल रहे हैं, हालॉकि गुमान यक़ीन के बदले में कुछ भी काम नहीं आया करता,
فَأَعْرِضْ عَن مَّن تَوَلَّىٰ عَن ذِكْرِنَا وَلَمْ يُرِدْ إِلَّا الْحَيَاةَ الدُّنْيَا ٢٩
📖 अनुवाद
आयत 29
तो जो हमारी याद से रदगिरदानी करे ओर सिर्फ दुनिया की ज़िन्दगी ही का तालिब हो तुम भी उससे मुँह फेर लो
ذَٰلِكَ مَبْلَغُهُم مِّنَ الْعِلْمِ ۚ إِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعْلَمُ بِمَن ضَلَّ عَن سَبِيلِهِ وَهُوَ أَعْلَمُ بِمَنِ اهْتَدَىٰ ٣٠
📖 अनुवाद
आयत 30
उनके इल्म की यही इन्तिहा है तुम्हारा परवरदिगार, जो उसके रास्ते से भटक गया उसको भी ख़ूब जानता है, और जो राहे रास्त पर है उनसे भी ख़ूब वाक़िफ है
وَلِلَّهِ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ لِيَجْزِيَ الَّذِينَ أَسَاءُوا بِمَا عَمِلُوا وَيَجْزِيَ الَّذِينَ أَحْسَنُوا بِالْحُسْنَى ٣١
📖 अनुवाद
आयत 31
और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही का है, ताकि जिन लोगों ने बुराई की हो उनको उनकी कारस्तानियों की सज़ा दे और जिन लोगों ने नेकी की है (उनकी नेकी की जज़ा दे)
الَّذِينَ يَجْتَنِبُونَ كَبَائِرَ الْإِثْمِ وَالْفَوَاحِشَ إِلَّا اللَّمَمَ ۚ إِنَّ رَبَّكَ وَاسِعُ الْمَغْفِرَةِ ۚ هُوَ أَعْلَمُ بِكُمْ إِذْ أَنشَأَكُم مِّنَ الْأَرْضِ وَإِذْ أَنتُمْ أَجِنَّةٌ فِي بُطُونِ أُمَّهَاتِكُمْ ۖ فَلَا تُزَكُّوا أَنفُسَكُمْ ۖ هُوَ أَعْلَمُ بِمَنِ اتَّقَىٰ ٣٢
📖 अनुवाद
आयत 32
जो सग़ीरा गुनाहों के सिवा कबीरा गुनाहों से और बेहयाई की बातों से बचे रहते हैं बेशक तुम्हारा परवरदिगार बड़ी बख्यिश वाला है वही तुमको ख़ूब जानता है जब उसने तुमको मिटटी से पैदा किया और जब तुम अपनी माँ के पेट में बच्चे थे तो (तकब्बुर) से अपने नफ्स की पाकीज़गी न जताया करो जो परहेज़गार है उसको वह ख़ूब जानता है
أَفَرَأَيْتَ الَّذِي تَوَلَّىٰ ٣٣
📖 अनुवाद
आयत 33
भला (ऐ रसूल) तुमने उस शख़्श को भी देखा जिसने रदगिरदानी की
وَأَعْطَىٰ قَلِيلًا وَأَكْدَىٰ ٣٤
📖 अनुवाद
आयत 34
और थोड़ा सा (ख़ुदा की राह में) दिया और फिर बन्द कर दिया
أَعِندَهُ عِلْمُ الْغَيْبِ فَهُوَ يَرَىٰ ٣٥
📖 अनुवाद
आयत 35
क्या उसके पास इल्मे ग़ैब है कि वह देख रहा है
أَمْ لَمْ يُنَبَّأْ بِمَا فِي صُحُفِ مُوسَىٰ ٣٦
📖 अनुवाद
आयत 36
क्या उसको उन बातों की ख़बर नहीं पहुँची जो मूसा के सहीफ़ों में है
أَلَّا تَزِرُ وَازِرَةٌ وِزْرَ أُخْرَىٰ ٣٨
📖 अनुवाद
आयत 38
जिन्होने (अपना हक़) (पूरा अदा) किया इन सहीफ़ों में ये है, कि कोई शख़्श दूसरे (के गुनाह) का बोझ नहीं उठाएगा
وَأَن لَّيْسَ لِلْإِنسَانِ إِلَّا مَا سَعَىٰ ٣٩
📖 अनुवाद
आयत 39
और ये कि इन्सान को वही मिलता है जिसकी वह कोशिश करता है
وَأَنَّ سَعْيَهُ سَوْفَ يُرَىٰ ٤٠
📖 अनुवाद
आयत 40
और ये कि उनकी कोशिश अनक़रीेब ही (क़यामत में) देखी जाएगी
وَأَنَّ إِلَىٰ رَبِّكَ الْمُنتَهَىٰ ٤٢
📖 अनुवाद
आयत 42
और ये कि (सबको आख़िर) तुम्हारे परवरदिगार ही के पास पहुँचना है
وَأَنَّهُ خَلَقَ الزَّوْجَيْنِ الذَّكَرَ وَالْأُنثَىٰ ٤٥
📖 अनुवाद
आयत 45
और ये कि वही नर और मादा दो किस्म (के हैवान) नुत्फे से जब (रहम में) डाला जाता है
وَأَنَّ عَلَيْهِ النَّشْأَةَ الْأُخْرَىٰ ٤٧
📖 अनुवाद
आयत 47
और ये कि उसी पर (कयामत में) दोबारा उठाना लाज़िम है
وَأَنَّهُ هُوَ أَغْنَىٰ وَأَقْنَىٰ ٤٨
📖 अनुवाद
आयत 48
और ये कि वही मालदार बनाता है और सरमाया अता करता है,
وَأَنَّهُ أَهْلَكَ عَادًا الْأُولَىٰ ٥٠
📖 अनुवाद
आयत 50
और ये कि उसी ने पहले (क़ौमे) आद को हलाक किया
وَقَوْمَ نُوحٍ مِّن قَبْلُ ۖ إِنَّهُمْ كَانُوا هُمْ أَظْلَمَ وَأَطْغَىٰ ٥٢
📖 अनुवाद
आयत 52
और (उसके) पहले नूह की क़ौम को बेशक ये लोग बड़े ही ज़ालिम और बड़े ही सरकश थे
فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكَ تَتَمَارَىٰ ٥٥
📖 अनुवाद
आयत 55
तो तू (ऐ इन्सान आख़िर) अपने परवरदिगार की कौन सी नेअमत पर शक़ किया करेगा
هَٰذَا نَذِيرٌ مِّنَ النُّذُرِ الْأُولَىٰ ٥٦
📖 अनुवाद
आयत 56
ये (मोहम्मद भी अगले डराने वाले पैग़म्बरों में से एक डरने वाला) पैग़म्बर है
أَفَمِنْ هَٰذَا الْحَدِيثِ تَعْجَبُونَ ٥٩
📖 अनुवाद
आयत 59
तो क्या तुम लोग इस बात से ताज्जुब करते हो और हँसते हो
पढ़ें सूरा अन-नज्म हिंदी अनुवाद – अरबी पाठ और ऑडियो
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए

