Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- فَأَعْرِضْ – आप उपेक्षा करें, मुँह फेर लें
- تَوَلَّى – मुँह मोड़ लिया, पीठ फेर ली
- ذِكْرِنَا – हमारी याद, हमारा ज़िक्र (यहाँ अर्थ: क़ुरआन)
- لَمْ يُرِدْ – उसने नहीं चाहा
- إِلَّا الْحَيَاةَ الدُّنْيَا – केवल सांसारिक जीवन को
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप उस व्यक्ति से उपेक्षा करें और उसकी परवाह न करें जो हमारे ज़िक्र (क़ुरआन) से मुँह मोड़ लेता है, उसे सुनना और उस पर अमल करना पसंद नहीं करता, और उसकी सारी चाहत और कोशिशें सिर्फ़ दुनिया की ज़िंदगी तक सीमित हैं। ऐसा व्यक्ति आख़िरत पर ईमान नहीं रखता, इसलिए वह अपने आख़िरत के लिए कोई काम नहीं करता। उसका सारा ज्ञान और समझ दुनिया की चीज़ों तक ही महदूद है — यही उसके इल्म की इंतिहा है।
यह आयत उन लोगों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो अल्लाह की किताब और उसके रसूल ﷺ की सुन्नत पर अमल करने से मुँह मोड़ते हैं, और अपनी नफ़्स की ख्वाहिशों और दुनिया के माल-मताअ को आख़िरत पर तरजीह देते हैं।
फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है कि आपके रब को खूब मालूम है कि कौन सीधे रास्ते से भटक गया है, और वह उन लोगों को भी खूब जानता है जिन्होंने हिदायत पाई और इस्लाम का रास्ता अपनाया। अल्लाह हर एक को उसके कर्मों का पूरा बदला देगा।
दावती पहलू (उपदेश):
यह आयत हमें एक बहुत बड़ी हक़ीक़त से रूबरू कराती है — दुनिया की ज़िंदगी चाहे कितनी भी खूबसूरत और आरामदेह क्यों न लगे, वह एक दिन खत्म होने वाली है। जो लोग सिर्फ़ दुनिया के लिए जीते हैं, वे उस चीज़ को खो देते हैं जो कभी खत्म नहीं होती — यानी आख़िरत की कामयाबी। अल्लाह हमें क़ुरआन से जोड़ने का हुक्म देता है, क्योंकि क़ुरआन ही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई तक पहुँचाता है। आइए हम अपनी ज़िंदगी को सिर्फ़ दुनिया की ख्वाहिशों तक सीमित न रखें, बल्कि अल्लाह के कलाम को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें — ताकि हम उन लोगों में से न हों जिनसे अल्लाह का रसूल ﷺ को उपेक्षा करने का हुक्म दिया गया, बल्कि उन लोगों में से हों जिन्हें अल्लाह ने हिदायत दी और जिन पर उसकी रहमत नाज़िल हुई।
📜 आयत 27-31 — सूरा अन-नज्म
अनुवाद — अन-नज्म 29
सूरा अन-नज्म आयत 29 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो जो हमारी याद से रदगिरदानी करे ओर सिर्फ दुनिया…सूरा आयत 29/62 — सूरा अन-नज्म النجم (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नज्म सुनें, सूरा अन-नज्म अनुवाद, सूरा अन-नज्म mp3, सूरा अन-नज्म pdf. आयत 27–31. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


