अन-नज्म · 29/62
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नज्म
فَأَعْرِضْ عَن مَّن تَوَلَّىٰ عَن ذِكْرِنَا وَلَمْ يُرِدْ إِلَّا الْحَيَاةَ الدُّنْيَا ۝٢٩
Fa a`rid `am man tawallaa `an zikrinaa wa lam yurid illal hayaatad dunyaa
📖 हिंदी अर्थ
तो जो हमारी याद से रदगिरदानी करे ओर सिर्फ दुनिया की ज़िन्दगी ही का तालिब हो तुम भी उससे मुँह फेर लो

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَأَعْرِضْ – आप उपेक्षा करें, मुँह फेर लें
  • تَوَلَّى – मुँह मोड़ लिया, पीठ फेर ली
  • ذِكْرِنَا – हमारी याद, हमारा ज़िक्र (यहाँ अर्थ: क़ुरआन)
  • لَمْ يُرِدْ – उसने नहीं चाहा
  • إِلَّا الْحَيَاةَ الدُّنْيَا – केवल सांसारिक जीवन को

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! आप उस व्यक्ति से उपेक्षा करें और उसकी परवाह न करें जो हमारे ज़िक्र (क़ुरआन) से मुँह मोड़ लेता है, उसे सुनना और उस पर अमल करना पसंद नहीं करता, और उसकी सारी चाहत और कोशिशें सिर्फ़ दुनिया की ज़िंदगी तक सीमित हैं। ऐसा व्यक्ति आख़िरत पर ईमान नहीं रखता, इसलिए वह अपने आख़िरत के लिए कोई काम नहीं करता। उसका सारा ज्ञान और समझ दुनिया की चीज़ों तक ही महदूद है — यही उसके इल्म की इंतिहा है।

यह आयत उन लोगों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो अल्लाह की किताब और उसके रसूल ﷺ की सुन्नत पर अमल करने से मुँह मोड़ते हैं, और अपनी नफ़्स की ख्वाहिशों और दुनिया के माल-मताअ को आख़िरत पर तरजीह देते हैं।

फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है कि आपके रब को खूब मालूम है कि कौन सीधे रास्ते से भटक गया है, और वह उन लोगों को भी खूब जानता है जिन्होंने हिदायत पाई और इस्लाम का रास्ता अपनाया। अल्लाह हर एक को उसके कर्मों का पूरा बदला देगा।


दावती पहलू (उपदेश):

यह आयत हमें एक बहुत बड़ी हक़ीक़त से रूबरू कराती है — दुनिया की ज़िंदगी चाहे कितनी भी खूबसूरत और आरामदेह क्यों न लगे, वह एक दिन खत्म होने वाली है। जो लोग सिर्फ़ दुनिया के लिए जीते हैं, वे उस चीज़ को खो देते हैं जो कभी खत्म नहीं होती — यानी आख़िरत की कामयाबी। अल्लाह हमें क़ुरआन से जोड़ने का हुक्म देता है, क्योंकि क़ुरआन ही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों की भलाई तक पहुँचाता है। आइए हम अपनी ज़िंदगी को सिर्फ़ दुनिया की ख्वाहिशों तक सीमित न रखें, बल्कि अल्लाह के कलाम को पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें — ताकि हम उन लोगों में से न हों जिनसे अल्लाह का रसूल ﷺ को उपेक्षा करने का हुक्म दिया गया, बल्कि उन लोगों में से हों जिन्हें अल्लाह ने हिदायत दी और जिन पर उसकी रहमत नाज़िल हुई।



📜 आयत 27-31 — सूरा अन-नज्म

27إِنَّ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ لَيُسَمُّونَ الْمَلَائِكَةَ تَسْمِيَةَ الْأُنثَىٰ
जो लोग आख़ेरत पर ईमान नहीं रखते वह फ़रिश्तों के नाम रखते हैं औरतों के से नाम हालॉकि उन्हें इसकी कुछ ख़बर नहीं
28وَمَا لَهُم بِهِ مِنْ عِلْمٍ ۖ إِن يَتَّبِعُونَ إِلَّا الظَّنَّ ۖ وَإِنَّ الظَّنَّ لَا يُغْنِي مِنَ الْحَقِّ شَيْئًا
वह लोग तो बस गुमान (ख्याल) के पीछे चल रहे हैं, हालॉकि गुमान यक़ीन के बदले में कुछ भी काम नहीं आया करता,
29فَأَعْرِضْ عَن مَّن تَوَلَّىٰ عَن ذِكْرِنَا وَلَمْ يُرِدْ إِلَّا الْحَيَاةَ الدُّنْيَا
तो जो हमारी याद से रदगिरदानी करे ओर सिर्फ दुनिया की ज़िन्दगी ही का तालिब हो तुम भी उससे मुँह फेर लो
30ذَٰلِكَ مَبْلَغُهُم مِّنَ الْعِلْمِ ۚ إِنَّ رَبَّكَ هُوَ أَعْلَمُ بِمَن ضَلَّ عَن سَبِيلِهِ وَهُوَ أَعْلَمُ بِمَنِ اهْتَدَىٰ
उनके इल्म की यही इन्तिहा है तुम्हारा परवरदिगार, जो उसके रास्ते से भटक गया उसको भी ख़ूब जानता है, और जो राहे रास्त पर है उनसे भी ख़ूब वाक़िफ है
31وَلِلَّهِ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ لِيَجْزِيَ الَّذِينَ أَسَاءُوا بِمَا عَمِلُوا وَيَجْزِيَ الَّذِينَ أَحْسَنُوا بِالْحُسْنَى
और जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा ही का है, ताकि जिन लोगों ने बुराई की हो उनको उनकी कारस्तानियों की सज़ा दे और जिन लोगों ने नेकी की है (उनकी नेकी की जज़ा दे)
अन-नज्मकुरान सूची
62आयत
मक्कीअवतरण स्थान
29आयत

अनुवाद — अन-नज्म 29

सूरा अन-नज्म आयत 29 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो जो हमारी याद से रदगिरदानी करे ओर सिर्फ दुनिया…

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Wednesday, September 30, 2026

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