अल-क़मर · 32/55
अनुवाद उच्चारण — अल-क़मर
وَلَقَدْ يَسَّرْنَا الْقُرْآنَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ ۝٣٢
Wa laqad yassarnal quraana liz zikri fahal mim muddakir
📖 हिंदी अर्थ
और हमने क़ुरान को नसीहत हासिल करने के वास्ते आसान कर दिया है तो कोई है जो नसीहत हासिल करे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَسَّرْنَا: हमने आसान कर दिया
  • لِلذِّكْرِ: नसीहत हासिल करने और याद रखने के लिए
  • مُدَّكِرٍ: सीखने और नसीहत पकड़ने वाला

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी बहुत बड़ी रहमत और एहसान का ज़िक्र फ़रमाया है। उसने पवित्र क़ुरआन को याद करने, समझने और नसीहत हासिल करने के लिए बेहद आसान बना दिया है। यह किताब ऐसी है कि बच्चे भी इसे आसानी से हिफ़्ज़ कर लेते हैं, बड़े भी इसके पाठ से लज़्ज़त लेते हैं, और दिल वाले इससे रूहानी सुकून पाते हैं। अल्लाह ने इसके लफ़्ज़ों को तिलावत के लिए, इसके मायनों को समझने के लिए और इसकी नसीहतों पर अमल करने के लिए आसान कर दिया है।

फिर अल्लाह तआला पूछता है: "तो क्या कोई है जो इससे नसीहत हासिल करे?" यह एक प्यार भरा निमंत्रण है जो हर इंसान को सोचने पर मजबूर करता है। यह सवाल दिल को झकझोर देता है कि जब अल्लाह ने इतना आसान कर दिया है, तो क्या हमें इस आसानी से फायदा नहीं उठाना चाहिए? क्या हमें इस किताब को पढ़ना, समझना और उस पर अमल नहीं करना चाहिए?

यह आयत हमें बताती है कि क़ुरआन कोई मुश्किल किताब नहीं है जो सिर्फ खास लोगों के लिए हो। यह हर उस इंसान के लिए है जो हिदायत चाहता है। अल्लाह ने इसे इतना आसान बना दिया है कि कोई भी इंसान — चाहे वह किसी भी उम्र, ज़ुबान या मुल्क का हो — इसे पढ़ सकता है, याद कर सकता है और इससे रहनुमाई हासिल कर सकता है।

प्यारे भाइयो और बहनो! यह अल्लाह की तरफ से हमारे लिए एक खास तोहफा है। आइए हम इस तोहफे की कद्र करें। रोज़ाना क़ुरआन पढ़ें, उस पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र करें, और उसकी तालीमात को अपनी ज़िंदगी में लागू करें। याद रखिए, जो शख्स क़ुरआन से जुड़ जाता है, अल्लाह उसे दुनिया और आख़िरत दोनों में इज़्ज़त देता है। क़ुरआन क़यामत के दिन अपने पढ़ने वालों के लिए सिफ़ारिश करेगा। तो आइए, हम उन लोगों में से बनें जो इस नसीहत को कबूल करते हैं और इस पर अमल करते हैं।

🎧 सुनें

📜 आयत 30-34 — अल-क़मर

30فَكَيْفَ كَانَ عَذَابِي وَنُذُرِ
तो (देखो) मेरा अज़ाब और डराना कैसा था
31إِنَّا أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ صَيْحَةً وَاحِدَةً فَكَانُوا كَهَشِيمِ الْمُحْتَظِرِ
हमने उन पर एक सख्त चिंघाड़ (का अज़ाब) भेज दिया तो वह बाड़े वालो के सूखे हुए चूर चूर भूसे की तरह हो गए
32وَلَقَدْ يَسَّرْنَا الْقُرْآنَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ
और हमने क़ुरान को नसीहत हासिल करने के वास्ते आसान कर दिया है तो कोई है जो नसीहत हासिल करे
33كَذَّبَتْ قَوْمُ لُوطٍ بِالنُّذُرِ
लूत की क़ौम ने भी डराने वाले (पैग़म्बरों) को झुठलाया
34إِنَّا أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ حَاصِبًا إِلَّا آلَ لُوطٍ ۖ نَّجَّيْنَاهُم بِسَحَرٍ
तो हमने उन पर कंकर भरी हवा चलाई मगर लूत के लड़के बाले को हमने उनको अपने फज़ल व करम से पिछले ही को बचा लिया
अल-क़मरकुरान सूची
55आयत
मक्कीRevelation
32आयत

अनुवाद — अल-क़मर 32

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पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

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