अल-क़मर · 33/55
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-क़मर
كَذَّبَتْ قَوْمُ لُوطٍ بِالنُّذُرِ ۝٣٣
Kazzabat qawmu lootim binnuzur
📖 हिंदी अर्थ
लूत की क़ौम ने भी डराने वाले (पैग़म्बरों) को झुठलाया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • क़ौमे लूत – हज़रत लूत अलैहिस्सलाम की क़ौम।
  • बिन्नुज़ुर – उन चेतावनियों और डरावने अंदाज़ में भेजे गए पैग़ामों से, जो अल्लाह के रसूल उनके पास लाए थे।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला हज़रत लूत अलैहिस्सलाम की क़ौम का ज़िक्र करते हुए फ़रमाते हैं कि उनकी क़ौम ने उन सारी चेतावनियों को झुठला दिया जो उनके पास उनके रसूल लूत अलैहिस्सलाम के ज़रिए आई थीं। यानी उन्होंने न सिर्फ़ एक चेतावनी को झुठलाया, बल्कि हर उस पैग़ाम और नसीहत को झुठला दिया जो उनके पास अल्लाह की तरफ़ से पहुँची। हज़रत लूत अलैहिस्सलाम ने उन्हें अल्लाह का अज़ाब से डराया, उन्हें रास्ते पर लाने की कोशिश की, लेकिन उनकी क़ौम ने हर बार उन्हें झुठलाया और अपनी शरारत व बुराई पर अड़ी रही।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह के रसूलों का काम सिर्फ़ पैग़ाम पहुँचाना और चेतावनी देना है। जो लोग इन चेतावनियों को नहीं मानते, वे अल्लाह के अज़ाब के हक़दार बन जाते हैं। हज़रत लूत अलैहिस्सलाम की क़ौम का अंजाम देखिए — वे आज एक सबक़ हैं, और उनका विनाश उन लोगों के लिए निशानी है जो अल्लाह के पैग़ाम को झुठलाते हैं।

इससे हमें यह सीख मिलती है कि हमें अपने नबी ﷺ की लाई हुई हर बात को सच मानना चाहिए और उस पर अमल करना चाहिए। अल्लाह के रसूलों की चेतावनियाँ हमारे भले के लिए होती हैं — वे हमें उस रास्ते पर चलाती हैं जो हमें जहन्नुम से बचाकर जन्नत तक पहुँचाता है। कितनी बड़ी रहमत है कि अल्लाह ने हमें किताब और रसूल अता किया, और हमें चेतावनी देकर सीधा रास्ता दिखाया। हमें चाहिए कि हम इन चेतावनियों को कभी हल्का न समझें, बल्कि उन पर ग़ौर करें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएँ।



📜 आयत 31-35 — सूरा अल-क़मर

31إِنَّا أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ صَيْحَةً وَاحِدَةً فَكَانُوا كَهَشِيمِ الْمُحْتَظِرِ
हमने उन पर एक सख्त चिंघाड़ (का अज़ाब) भेज दिया तो वह बाड़े वालो के सूखे हुए चूर चूर भूसे की तरह हो गए
32وَلَقَدْ يَسَّرْنَا الْقُرْآنَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ
और हमने क़ुरान को नसीहत हासिल करने के वास्ते आसान कर दिया है तो कोई है जो नसीहत हासिल करे
33كَذَّبَتْ قَوْمُ لُوطٍ بِالنُّذُرِ
लूत की क़ौम ने भी डराने वाले (पैग़म्बरों) को झुठलाया
34إِنَّا أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ حَاصِبًا إِلَّا آلَ لُوطٍ ۖ نَّجَّيْنَاهُم بِسَحَرٍ
तो हमने उन पर कंकर भरी हवा चलाई मगर लूत के लड़के बाले को हमने उनको अपने फज़ल व करम से पिछले ही को बचा लिया
35نِّعْمَةً مِّنْ عِندِنَا ۚ كَذَٰلِكَ نَجْزِي مَن شَكَرَ
हम शुक्र करने वालों को ऐसा ही बदला दिया करते हैं
अल-क़मरकुरान सूची
55आयत
मक्कीअवतरण स्थान
33आयत

अनुवाद — अल-क़मर 33

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सूरा आयत 33/55 — सूरा अल-क़मर القمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-क़मर सुनें, सूरा अल-क़मर अनुवाद, सूरा अल-क़मर mp3, सूरा अल-क़मर pdf. आयत 31–35. हिंदी अर्थ: اردو.





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Thursday, October 1, 2026

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