अल-क़मर · 31/55
अनुवाद उच्चारण — अल-क़मर
إِنَّا أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ صَيْحَةً وَاحِدَةً فَكَانُوا كَهَشِيمِ الْمُحْتَظِرِ ۝٣١
Innaaa arsalnaa `alaihim saihatanw waahidatan fakaano kahasheemil muhtazir
📖 हिंदी अर्थ
हमने उन पर एक सख्त चिंघाड़ (का अज़ाब) भेज दिया तो वह बाड़े वालो के सूखे हुए चूर चूर भूसे की तरह हो गए
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • صَيْحَةً وَاحِدَةً – एक ही (भयानक) चीख या आवाज़।
  • هَشِيمِ – सूखा हुआ, चूर-चूर किया हुआ, टूटा-फूटा पौधा या घास।
  • الْمُحْتَظِرِ – वह व्यक्ति जो अपनी भेड़-बकरियों या जानवरों के लिए बाड़ा (बाड़) बनाता है, जिसमें सूखी लकड़ियाँ और काँटेदार झाड़ियाँ इस्तेमाल होती हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने अपने नबी सालेह (अलैहिस्सलाम) की क़ौम 'समूद' का ज़िक्र करते हुए बताया कि जब उन्होंने नबी को झुठलाया और अल्लाह की निशानी (ऊँटनी) को काट डाला, तो अल्लाह ने उन पर अपना अज़ाब भेजा। यह अज़ाब एक ही भयानक चीख (सैहा) की शक्ल में आया — यह जिब्रील (अलैहिस्सलाम) की चीख थी, जिसने अल्लाह के हुक्म से एक ही बार चिल्लाया और उसकी आवाज़ की सख्ती से पूरी क़ौम हलाक हो गई। वे सब के सब मर गए, यहाँ तक कि कोई बचा नहीं।

फिर अल्लाह ने उनकी हालत की मिसाल दी कि वे उस सूखी, टूटी-फूटी घास और लकड़ियों की तरह हो गए जो बाड़ा बनाने वाला इकट्ठा करता है। जब जानवर उस पर चलते हैं या हवा चलती है, तो वह चूर-चूर हो जाती है। यानी उनकी लाशें ऐसी बिखरी और रौंदी हुई पड़ी थीं जैसे बाड़े का सूखा कूड़ा-कचरा। यह अल्लाह की क़ुदरत का नमूना है कि एक ही आवाज़ ने उन ताकतवर और मजबूत लोगों को इस कदर बेबस कर दिया कि वे मिट्टी में मिल गए।

दावती पहलू:

यह क़िस्सा हमारे लिए बहुत बड़ी नसीहत है। अल्लाह की पकड़ कितनी सख्त है! जब वह किसी क़ौम को पकड़ता है, तो कोई ताकत उसे रोक नहीं सकती। लेकिन साथ ही यह भी याद रखें कि अल्लाह रहम करने वाला है — जो लोग तौबा कर लें और अपने नबी की बात मान लें, उन पर रहमत बरसती है। समूद की क़ौम ने अपने नबी की नसीहत नहीं मानी, इसलिए वे इस अंजाम तक पहुँचे। आज हमारे पास कुरआन और रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सुन्नत है — अगर हम इन पर अमल करें, तो अल्लाह की रहमत और हिफ़ाज़त हमारे साथ होगी। यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि अल्लाह के हुक्म के आगे सारी ताकतें बेकार हैं, और सच्ची इज़्ज़त उसी की तरफ़ रुजू करने में है। आइए, हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह के हुक्मों को अपनाएँ और उसके अज़ाब से डरते हुए उसकी रहमत के तलबगार बनें।

🎧 सुनें

📜 आयत 29-33 — अल-क़मर

29فَنَادَوْا صَاحِبَهُمْ فَتَعَاطَىٰ فَعَقَرَ
तो उन लोगों ने अपने रफीक़ (क़ेदार) को बुलाया तो उसने पकड़ कर (ऊँटनी की) कूंचे काट डालीं
30فَكَيْفَ كَانَ عَذَابِي وَنُذُرِ
तो (देखो) मेरा अज़ाब और डराना कैसा था
31إِنَّا أَرْسَلْنَا عَلَيْهِمْ صَيْحَةً وَاحِدَةً فَكَانُوا كَهَشِيمِ الْمُحْتَظِرِ
हमने उन पर एक सख्त चिंघाड़ (का अज़ाब) भेज दिया तो वह बाड़े वालो के सूखे हुए चूर चूर भूसे की तरह हो गए
32وَلَقَدْ يَسَّرْنَا الْقُرْآنَ لِلذِّكْرِ فَهَلْ مِن مُّدَّكِرٍ
और हमने क़ुरान को नसीहत हासिल करने के वास्ते आसान कर दिया है तो कोई है जो नसीहत हासिल करे
33كَذَّبَتْ قَوْمُ لُوطٍ بِالنُّذُرِ
लूत की क़ौम ने भी डराने वाले (पैग़म्बरों) को झुठलाया
अल-क़मरकुरान सूची
55आयत
मक्कीRevelation
31आयत

अनुवाद — अल-क़मर 31

सूरा अल-क़मर आयत 31 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हमने उन पर एक सख्त चिंघाड़ (का अज़ाब) भेज दिया…

सूरा आयत 31/55 — अल-क़मर القمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़मर सुनें, अल-क़मर अनुवाद, अल-क़मर mp3, अल-क़मर pdf. आयत 29–33. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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