अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَسَّرْنَا: हमने आसान कर दिया
- لِلذِّكْرِ: नसीहत हासिल करने और याद रखने के लिए
- مُدَّكِر: सीख लेने वाला, नसीहत पकड़ने वाला
तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने इस आयत में अपने महान अनुग्रह का ज़िक्र किया है कि उसने इस क़ुरआन को याद करने, समझने और नसीहत हासिल करने के लिए बेहद आसान बना दिया है। यह किताब ऐसी है कि इसके शब्दों को पढ़ना, इसके अर्थों को समझना और इसकी शिक्षाओं को अपनी ज़िंदगी में लागू करना हर उस व्यक्ति के लिए संभव है जो सच्चे दिल से चाहता है। अल्लाह ने इस किताब को इस तरह नाज़िल किया है कि हर ज़माने और हर तबके का इंसान इससे रहनुमाई हासिल कर सकता है।
फिर अल्लाह तआला पूछता है: "तो क्या कोई है जो नसीहत हासिल करे?" यह एक पुकार है, एक दावत है जो हर इंसान के दिल को छूती है। यह सवाल इसलिए दोहराया गया है क्योंकि जब भी कोई क़ौम अपने नबी को झुठलाती थी और अज़ाब में गिरफ्तार होती थी, तो अल्लाह इस आयत को दोहराकर लोगों को चेतावनी देता था कि क़ुरआन तो मौजूद है, सीखने वाले क्यों नहीं? यह दोहराव दिलों पर गहरा असर डालने और नफ़्स को क़ाबू में लाने के लिए है।
यह आयत हमें बताती है कि क़ुरआन कोई मुश्किल या रहस्यमयी किताब नहीं है जो सिर्फ खास लोगों के लिए हो। यह हर उस शख्स के लिए खुला है जो सीखना चाहे। अल्लाह ने इसकी तिलावत, हिफ़्ज़, समझ और अमल — सब कुछ आसान बना दिया है। जो भी सच्चे इरादे से इसकी तरफ रुजू करता है, उसे राह मिलती है।
इसलिए प्यारे भाईयों और बहनों! यह अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा है जो हर वक्त खुला है। आइए हम इस क़ुरआन को पढ़ें, समझें और अपनी ज़िंदगी में लागू करें। यही वह ज़रिया है जो हमें दुनिया की बेहतरी और आख़िरत की कामयाबी तक पहुंचाता है। अल्लाह हम सबको इसकी तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 38-42 — अल-क़मर
अनुवाद — अल-क़मर 40
सूरा अल-क़मर आयत 40 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने तो क़ुरान को नसीहत हासिल करने के वास्ते…सूरा आयत 40/55 — अल-क़मर القمر (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़मर सुनें, अल-क़मर अनुवाद, अल-क़मर mp3, अल-क़मर pdf. आयत 38–42. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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