अर-रहमान · 69/78
अनुवाद उच्चारण — अर-रहमान
فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ۝٦٩
Fabi ayyi aalaaa`i Rabbikumaa tukazzibaan
📖 हिंदी अर्थ
तो तुम दोनों अपने मालिक की किन किन नेअमतों को झुठलाओगे

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अनुवाद — Tafsir

फिर तुम दोनों (इंसान और जिन्नात) अपने रब की किन-किन नेमतों को झुठलाओगे?

इस आयत में अल्लाह तआला इंसान और जिन्नात दोनों को सम्बोधित करते हुए उनसे पूछ रहे हैं कि उनकी कौन-सी नेमत ऐसी है जिसे वे झुठला सकते हैं। यह एक ऐसा प्रश्न है जो उनकी नेमतों की गिनती से परे है। अल्लाह तआला ने इस आयत को कई बार दोहराया है, जो इस बात का प्रमाण है कि उनकी नेमतें अनगिनत हैं।

यहाँ "आला" का अर्थ है नेमतें और उपकार। अल्लाह तआला ने इंसानों और जिन्नात दोनों को असंख्य नेमतें प्रदान की हैं - उन्हें पैदा किया, उन्हें रिज़्क़ दिया, उन्हें समझ और अक्ल दी, उनके लिए आसमान और ज़मीन को सजाया, सूरज और चाँद को रोशनी का ज़रिया बनाया, पानी और हवा को उनके लिए मुसख़्खर किया, और सबसे बड़ी नेमत यह कि उन्हें हिदायत का रास्ता दिखाया और उनके लिए दीन इस्लाम को पूरा किया।

यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने रब की हर नेमत पर शुक्र अदा करना चाहिए, न कि उसे झुठलाना चाहिए। नेमतों को झुठलाने का मतलब है उन्हें न पहचानना, उनका इन्कार करना, या उन्हें अल्लाह के अलावा किसी और की तरफ मंसूब करना। जब हम अपने आस-पास देखते हैं, तो हर तरफ अल्लाह की नेमतें बिखरी पड़ी हैं - हमारा शरीर, हमारी ज़िन्दगी, हमारा परिवार, हमारा रिज़्क़, हमारा ईमान - ये सब उसी की देन हैं।

प्यारे भाइयों और बहनों! आइए हम अपने रब की नेमतों को पहचानें, उन पर शुक्र करें, और उनका सही इस्तेमाल करें। जब हम शुक्र करते हैं, तो अल्लाह हमें और नेमतें देता है, जैसा कि उसने फ़रमाया: "अगर तुम शुक्र करोगे तो मैं तुम्हें और दूँगा।" यह आयत हमें उस दिन की याद दिलाती है जब हम अपने रब के सामने खड़े होंगे और हमसे हमारी नेमतों के बारे में पूछा जाएगा। आइए हम उस दिन के लिए अपने आप को तैयार करें, और अपनी ज़िन्दगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक बनाएं।



📜 आयत 67-71 — अर-रहमान

67فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत से मुकरोगे
68فِيهِمَا فَاكِهَةٌ وَنَخْلٌ وَرُمَّانٌ
उन दोनों में मेवें हैं खुरमें और अनार
69فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने मालिक की किन किन नेअमतों को झुठलाओगे
70فِيهِنَّ خَيْرَاتٌ حِسَانٌ
उन बाग़ों में ख़ुश ख़ुल्क और ख़ूबसूरत औरतें होंगी
71فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने मालिक की किन किन नेअमतों को झुठलाओगे
अर-रहमानकुरान सूची
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अनुवाद — अर-रहमान 69

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Tuesday, August 18, 2026

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