अर-रहमान · 68/78
अनुवाद उच्चारण — सूरा अर-रहमान
فِيهِمَا فَاكِهَةٌ وَنَخْلٌ وَرُمَّانٌ ۝٦٨
Feehimaa faakihatunw wa nakhlunw wa rummaan
📖 हिंदी अर्थ
उन दोनों में मेवें हैं खुरमें और अनार

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • فَاكِهَةٌ: फल, मेवे
  • نَخْلٌ: खजूर के वृक्ष
  • رُمَّانٌ: अनार

व्याख्या:

इन दोनों जन्नतों में तरह-तरह के फल होंगे, जिनकी कोई गिनती नहीं होगी। उन फलों में विशेष रूप से खजूर और अनार का उल्लेख किया गया है। खजूर एक ऐसा फल है जो अरब की धरती पर बहुतायत से पाया जाता था और यह पोषण का उत्कृष्ट स्रोत है। अनार भी एक बेहद स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक फल है। इन दोनों का विशेष उल्लेख इसलिए किया गया ताकि अरब के लोग उन्हें आसानी से समझ सकें, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि जन्नत में केवल यही दो फल होंगे। जन्नत में हर प्रकार के फल होंगे जो आँखों को सुख देंगे और स्वाद में अद्भुत होंगे।

यहाँ अल्लाह तआला अपने नेक बंदों को उन दो जन्नतों की नेमतों से अवगत करा रहे हैं जो उनके लिए तैयार की गई हैं। यह एक ऐसा प्रतिफल है जो किसी आँख ने नहीं देखा, किसी कान ने नहीं सुना और किसी दिल ने नहीं सोचा। अल्लाह की रहमत और करम का यह समुद्र है जो उसके डरने वालों और उसकी राह में चलने वालों के लिए है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि जन्नत की नेमतें सिर्फ खाने-पीने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह अल्लाह की रज़ा और उसकी मुहब्बत का नतीजा हैं। जो लोग दुनिया में अल्लाह की इबादत करते हैं और उसके हुक्मों पर अमल करते हैं, उनके लिए ऐसी जगह तैयार है जहाँ हर तरह की खुशी और आराम होगा। यह हमारे लिए एक प्रेरणा है कि हम अपने जीवन को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढालें और उसकी रहमत के हक़दार बनें। जन्नत की याद हमें दुनिया की मोहब्बत से बचाती है और आख़िरत की तैयारी की तरफ ले जाती है।



📜 आयत 66-70 — सूरा अर-रहमान

66فِيهِمَا عَيْنَانِ نَضَّاخَتَانِ
उन दोनों बाग़ों में दो चश्में जोश मारते होंगे
67فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने परवरदिगार की किस किस नेअमत से मुकरोगे
68فِيهِمَا فَاكِهَةٌ وَنَخْلٌ وَرُمَّانٌ
उन दोनों में मेवें हैं खुरमें और अनार
69فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने मालिक की किन किन नेअमतों को झुठलाओगे
70فِيهِنَّ خَيْرَاتٌ حِسَانٌ
उन बाग़ों में ख़ुश ख़ुल्क और ख़ूबसूरत औरतें होंगी
अर-रहमानकुरान सूची
78आयत
मदनीअवतरण स्थान
68आयत

अनुवाद — अर-रहमान 68

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Thursday, October 1, 2026

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