अर-रहमान · 72/78
अनुवाद उच्चारण — सूरा अर-रहमान
حُورٌ مَّقْصُورَاتٌ فِي الْخِيَامِ ۝٧٢
Hoorum maqsooraatun fil khiyaam
📖 हिंदी अर्थ
वह हूरें हैं जो ख़ेमों में छुपी बैठी हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • हूरुन (حُورٌ): वे स्वर्गीय स्त्रियाँ जिनकी आँखें अत्यंत सुंदर और बड़ी-बड़ी हों, और जिनका रंग सफेद एवं चमकीला हो।
  • मक़सूरात (مَّقْصُورَاتٌ): जो अपने ख़ेमों में सुरक्षित रखी गई हों, पर्दे में रहने वाली, जो किसी और की ओर नहीं देखतीं।
  • फ़िल-ख़ियाम (فِي الْخِيَامِ): स्वर्ग के ख़ेमों में, जो मोती और मूँगे से बने हों।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में जन्नत की उन ख़ूबसूरत और पाक दुल्हनों का ज़िक्र किया है जो हूरें कहलाती हैं। ये हूरें ख़ेमों में रहने वाली हैं — यानी वे पूरी तरह से पर्दे में रहती हैं, सुरक्षित और संरक्षित हैं। वे किसी और की ओर नहीं देखतीं, न उनकी निगाहें किसी और की तरफ़ उठती हैं। वे सिर्फ़ अपने पतियों (जन्नती मर्दों) के लिए हैं, और उन्हीं से मुहब्बत करती हैं।

ये हूरें ऐसी हैं जिन्हें अल्लाह ने अपनी रहमत से ख़ेमों में रखा है — ख़ेमे जो मोती और मूँगे के बने होंगे, जिनकी सुंदरता और आराम का अंदाज़ा हमारे दिमाग़ से बाहर है। यह उन लोगों के लिए इनाम है जो दुनिया में अल्लाह के हुक्मों की पाबंदी करते हैं, अपनी निगाहों को हराम से बचाते हैं, और अपने दिलों को पाक रखते हैं।

यह आयत हमें बताती है कि जन्नत की नेअमतें सिर्फ़ खाने-पीने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वहाँ हर तरह की ख़ुशी और इत्मिनान है। जिस तरह दुनिया में एक नेक औरती अपने शौहर के लिए पर्दे में रहती है और उसकी वफ़ादार रहती है, उसी तरह जन्नत की हूरें भी अपने पतियों के लिए ही हैं — पूरी तरह सुरक्षित, पाक और मुहब्बत से भरी हुई।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें जन्नत की उस तस्वीर दिखाती है जो अल्लाह ने अपने नेक बंदों के लिए तैयार की है। जो लोग दुनिया में अल्लाह के डर से अपनी निगाहें नीची रखते हैं, हराम से बचते हैं, और अपने दिलों को पाक रखते हैं — उनके लिए जन्नत में ऐसी साथी हैं जो उनकी मुहब्बत और वफ़ादारी का इनाम होंगी। यह हमें सिखाती है कि दुनिया की चंद रोज़ की ख़्वाहिशों पर क़ाबू पाना, अल्लाह की रज़ा के लिए अपनी निगाहों और दिलों को पाक रखना, हमें उस अज़ीम इनाम तक पहुँचाता है जो किसी आँख ने नहीं देखा, किसी कान ने नहीं सुना और किसी दिल ने नहीं सोचा। तो आओ, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ बनाएँ, ताकि हम भी उन ख़ुशनसीबों में शामिल हों जिनके लिए ये नेअमतें तैयार की गई हैं।



📜 आयत 70-74 — सूरा अर-रहमान

70فِيهِنَّ خَيْرَاتٌ حِسَانٌ
उन बाग़ों में ख़ुश ख़ुल्क और ख़ूबसूरत औरतें होंगी
71فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने मालिक की किन किन नेअमतों को झुठलाओगे
72حُورٌ مَّقْصُورَاتٌ فِي الْخِيَامِ
वह हूरें हैं जो ख़ेमों में छुपी बैठी हैं
73فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
फिर तुम दोनों अपने परवरदिगार की कौन कौन सी नेअमत से इन्कार करोगे
74لَمْ يَطْمِثْهُنَّ إِنسٌ قَبْلَهُمْ وَلَا جَانٌّ
उनसे पहले उनको किसी इन्सान ने उनको छुआ तक नहीं और न जिन ने
अर-रहमानकुरान सूची
78आयत
मदनीअवतरण स्थान
72आयत

अनुवाद — अर-रहमान 72

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Wednesday, September 30, 2026

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