अर-रहमान · 73/78
अनुवाद उच्चारण — सूरा अर-रहमान
فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ ۝٧٣
Fabi ayyi aalaaa`i Rabbikumaa tukazzibaan
📖 हिंदी अर्थ
फिर तुम दोनों अपने परवरदिगार की कौन कौन सी नेअमत से इन्कार करोगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • آلاء: नेमतें, उपकार, अनगिनत अहसान।
  • تُكَذِّبَانِ: तुम दोनों झुठलाते हो (यहाँ "तुम दोनों" से मुराद जिन्न और इंसान हैं)।

तफ़सीर:

ऐ जिन्न और इंसान की जमात! तुम्हारे रब की नेमतें और उसके अनगिनत अहसानात ऐसे हैं जिन्हें गिनना मुमकिन नहीं। हर सांस में, हर पल में, हर चीज़ में उसकी मेहरबानी और करम बरस रहा है। आसमान और ज़मीन, सूरज और चाँद, बारिश और हवा, सेहत और रिज़्क़, हिदायत और ईमान — ये सब उसी के दिए हुए हैं। फिर तुम दोनों उनमें से कौन सी नेमत को झुठलाओगे? किस नेमत का इनकार करोगे?

यह आयत एक प्यार भरा सवाल है जो अल्लाह अपने बंदों से कर रहा है — जैसे कोई मेहरबान बाप अपने बच्चे से कहे कि मैंने तुझे इतना कुछ दिया, फिर भी तू मेरा शुक्र क्यों नहीं करता? यह सवाल दिल को झिंझोड़ने वाला है, ताकि इंसान और जिन्न अपनी ग़फलत से जागें और अपने रब की नेमतों को पहचानें।

अल्लाह की नेमतें दो तरह की हैं: एक दुनियावी — जैसे खाना, पीना, आराम, सुरक्षा, और दूसरी दीनी — जैसे ईमान, इस्लाम, क़ुरआन, और जन्नत की खुशखबरी। इन सबके बावजूद अगर कोई शख्स इन्हें झुठलाए या इनका शुक्र अदा न करे, तो यह बड़ी नाइंसाफ़ी और नाशुक्री है।

याद रखो! जो शख्स अपने रब की नेमतों को पहचानता है और उनका शुक्र अदा करता है, अल्लाह उसे और ज़्यादा देता है। और जो इनकार करता है, वह सिर्फ अपना ही नुकसान करता है। यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपनी ज़िंदगी के हर पल में अल्लाह का शुक्रगुज़ार बनें, उसकी नेमतों को गिनें और उन्हें कभी भूलें नहीं। क्योंकि हर नेमत हमें उसके करीब लाने का ज़रिया है, और शुक्र ही वह चाबी है जो नेमतों को बरकत देती है।



📜 आयत 71-75 — सूरा अर-रहमान

71فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
तो तुम दोनों अपने मालिक की किन किन नेअमतों को झुठलाओगे
72حُورٌ مَّقْصُورَاتٌ فِي الْخِيَامِ
वह हूरें हैं जो ख़ेमों में छुपी बैठी हैं
73فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
फिर तुम दोनों अपने परवरदिगार की कौन कौन सी नेअमत से इन्कार करोगे
74لَمْ يَطْمِثْهُنَّ إِنسٌ قَبْلَهُمْ وَلَا جَانٌّ
उनसे पहले उनको किसी इन्सान ने उनको छुआ तक नहीं और न जिन ने
75فَبِأَيِّ آلَاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
फिर तुम दोनों अपने मालिक की किस किस नेअमत से मुकरोगे
अर-रहमानकुरान सूची
78आयत
मदनीअवतरण स्थान
73आयत

अनुवाद — अर-रहमान 73

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Thursday, October 1, 2026

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