Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لِئَلَّا يَعْلَمَ: ताकि जान लें / यह ज्ञात हो जाए
- أَهْلُ الْكِتَابِ: किताब वाले (यहूदी और ईसाई)
- لَا يَقْدِرُونَ: वे सामर्थ्य नहीं रखते
- فَضْلِ اللَّهِ: अल्लाह की कृपा और उसका दिया हुआ अनुग्रह
- بِيَدِ اللَّهِ: अल्लाह के हाथ में (अर्थात उसी के अधिकार में)
- ذُو الْفَضْلِ الْعَظِيمِ: महान कृपा वाला
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने अपने ईमानवाले बंदों पर यह बड़ा अनुग्रह किया है कि उन्हें दोगुना प्रतिफल, प्रकाश और क्षमा प्रदान की। यह सब कुछ इसलिए हुआ ताकि अहले-किताब (यहूदी और ईसाई) जिन्होंने हज़रत मुहम्मद ﷺ पर ईमान नहीं लाया, वे भली-भाँति जान लें कि वे अल्लाह की कृपा में से किसी भी चीज़ पर कोई अधिकार या सामर्थ्य नहीं रखते। वे न तो अपने लिए उस कृपा को रोक सकते हैं और न ही किसी और को दे सकते हैं। यह उनके हाथ में कभी नहीं था और न कभी होगा।
यह भी स्पष्ट कर दिया गया कि समस्त कृपा और अनुग्रह का स्वामी केवल अल्लाह ही है। उसी के हाथ में सब कुछ है — वह जिसे चाहता है अपनी कृपा प्रदान करता है, जिसे चाहता है ऊँचा उठाता है, और जिसे चाहता है अपने विशेष अनुग्रह से नवाज़ता है। उसके फैसले पर किसी को कोई आपत्ति नहीं हो सकती, क्योंकि वह सर्वशक्तिमान और स्वतंत्र इच्छा वाला है। वह जो चाहता है, अपनी बुद्धि और न्याय के अनुसार करता है।
और अल्लाह तो महान कृपा वाला है — उसकी कृपा असीमित है, उसका दान अटूट है। उसकी महानता के कारण ही उसका अनुग्रह भी महानतम है। वह अपने बंदों को वह देता है जो उनके लिए सर्वोत्तम होता है, चाहे वे उसके हक़दार न भी हों — यही उसकी कृपा की विशालता है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की कृपा किसी जाति, वंश या समुदाय की मोहताज नहीं — वह जिसे चाहता है अपनी रहमत से नवाज़ता है। इसलिए हमें अपने अमल और ईमान को बेहतर बनाना चाहिए, क्योंकि अल्लाह की कृपा पाने का सबसे अच्छा ज़रिया ईमान और नेक अमल है। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हमें अपने दिलों को घमंड से पाक रखना चाहिए — क्योंकि जो कुछ भी हमारे पास है, वह अल्लाह ही की देन है। और जो लोग अल्लाह की कृपा से निराश होते हैं या दूसरों को उसकी कृपा से रोकने की कोशिश करते हैं, वे वास्तव में अपनी हैसियत नहीं समझते। अल्लाह की कृपा का द्वार सबके लिए खुला है — बस ज़रूरत है सच्चे दिल से उसकी ओर रुजू करने की।
📜 आयत 27-29 — सूरा अल-हदीद
अनुवाद — अल-हदीद 29
सूरा अल-हदीद आयत 29 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ये इसलिए कहा जाता है) ताकि अहले किताब ये न…सूरा आयत 29/29 — सूरा अल-हदीद الحديد (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हदीद सुनें, सूरा अल-हदीद अनुवाद, सूरा अल-हदीद mp3, सूरा अल-हदीद pdf. आयत 27–29. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


