अल-हदीद · 28/29
अनुवाद उच्चारण — अल-हदीद
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اتَّقُوا اللَّهَ وَآمِنُوا بِرَسُولِهِ يُؤْتِكُمْ كِفْلَيْنِ مِن رَّحْمَتِهِ وَيَجْعَل لَّكُمْ نُورًا تَمْشُونَ بِهِ وَيَغْفِرْ لَكُمْ ۚ وَاللَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ ۝٢٨
Yaaa ayyuhal lazeena aamaanut taqullaaha wa aaminoo bi Rasoolihee yu`tikum kiflaini mir rahmatihee wa yaj`al lakum nooran tamshoona bihee wa yaghfir lakum; wallaahu Ghafoorur Raheem
📖 हिंदी अर्थ
ऐ ईमानदारों ख़ुदा से डरो और उसके रसूल (मोहम्मद) पर ईमान लाओ तो ख़ुदा तुमको अपनी रहमत के दो हिस्से अज्र अता फरमाएगा और तुमको ऐसा नूर इनायत फ़रमाएगा जिस (की रौशनी) में तुम चलोगे और तुमको बख्श भी देगा और ख़ुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • किफ़्लैन (كِفْلَيْنِ): दो हिस्से, दोहरा हिस्सा, दोगुना अज्र (पुण्य)।
  • नूर (نُورًا): रोशनी, प्रकाश, जो सीधा रास्ता दिखाने वाला हो।
  • तम्शूना (تَمْشُونَ): तुम चलो, तुम चलते रहो।

तफ़सीर:

ऐ ईमान वालो! अल्लाह से डरो और उसके रसूल (मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर ईमान लाओ। अल्लाह तआला उन लोगों से ख़िताब कर रहा है जो पहले के नबियों (मूसा और ईसा अलैहिस्सलाम) पर ईमान रखते थे, उन्हें हिदायत दी जा रही है कि वे अपने ईमान पर क़ायम रहें और अल्लाह के आख़िरी रसूल मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर भी ईमान लाएँ। यह ईमान उनके लिए किसी नई चीज़ का तक़ाज़ा नहीं, बल्कि उसी सच्चाई की तस्दीक़ है जो पहले के नबियों ने दी थी।

अल्लाह का वादा है कि जो लोग तक़वा (परहेज़गारी) अपनाएँगे और रसूल पर ईमान लाएँगे, उन्हें दोहरा अज्र मिलेगा — एक अज्र पहले के नबियों पर ईमान लाने का और दूसरा मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पर ईमान लाने का। यह अल्लाह की रहमत का ख़ज़ाना है जो वह अपने बंदों पर लुटाता है।

इसके साथ ही अल्लाह उन्हें एक ऐसा नूर (रोशनी) अता करेगा जिसके सहारे वे दुनिया में सीधे रास्ते पर चलेंगे और आख़िरत में पुल-सिरात पर भी यही नूर उनके आगे रोशनी डालेगा। यह नूर उनके ईमान और अच्छे आमाल की बरकत से मिलेगा, जो उनके चेहरों पर, उनके दिलों में और उनके आमाल में ज़ाहिर होगा।

और सबसे बड़ी ख़ुशख़बरी यह कि अल्लाह उनके गुनाह माफ़ कर देगा — वह उनके गुनाहों को ढाँप देगा और उन पर मुतआल्लिक़ा नहीं करेगा। अल्लाह बड़ा माफ़ करने वाला और बड़ा रहम करने वाला है। उसकी मग़फ़िरत (क्षमा) असीम है और उसकी रहमत हर चीज़ से बढ़कर है।

दावती पहलू:

यह आयत उन लोगों के लिए बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी है जो सच्चे दिल से अल्लाह पर ईमान रखते हैं और उसके रसूल की पैरवी करते हैं। अल्लाह ने अपने बंदों के लिए रहमत के दरवाज़े खोल दिए हैं — दोहरा अज्र, नूर और मग़फ़िरत। यह अल्लाह की तरफ़ से एक ऐसा तोहफ़ा है जो किसी और की तरफ़ से नहीं मिल सकता। जो शख्स इस दावत को क़बूल कर लेता है, वह दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हो जाता है। अल्लाह की रहमत से निराश न हों, बल्कि उसकी तरफ़ रुजू करें, उसके रसूल पर ईमान लाएँ और तक़वा अपनाएँ — यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 26-29 — अल-हदीद

26وَلَقَدْ أَرْسَلْنَا نُوحًا وَإِبْرَاهِيمَ وَجَعَلْنَا فِي ذُرِّيَّتِهِمَا النُّبُوَّةَ وَالْكِتَابَ ۖ فَمِنْهُم مُّهْتَدٍ ۖ وَكَثِيرٌ مِّنْهُمْ فَاسِقُونَ
और बेशक हम ही ने नूह और इबराहीम को (पैग़म्बर बनाकर) भेजा और उनही दोनों की औलाद में नबूवत और किताब मुक़र्रर की तो उनमें के बाज़ हिदायत याफ्ता हैं और उन के बहुतेरे बदकार हैं
27ثُمَّ قَفَّيْنَا عَلَىٰ آثَارِهِم بِرُسُلِنَا وَقَفَّيْنَا بِعِيسَى ابْنِ مَرْيَمَ وَآتَيْنَاهُ الْإِنجِيلَ وَجَعَلْنَا فِي قُلُوبِ الَّذِينَ اتَّبَعُوهُ رَأْفَةً وَرَحْمَةً وَرَهْبَانِيَّةً ابْتَدَعُوهَا مَا كَتَبْنَاهَا عَلَيْهِمْ إِلَّا ابْتِغَاءَ رِضْوَانِ اللَّهِ فَمَا رَعَوْهَا حَقَّ رِعَايَتِهَا ۖ فَآتَيْنَا الَّذِينَ آمَنُوا مِنْهُمْ أَجْرَهُمْ ۖ وَكَثِيرٌ مِّنْهُمْ فَاسِقُونَ
फिर उनके पीछे ही उनके क़दम ब क़दम अपने और पैग़म्बर भेजे और उनके पीछे मरियम के बेटे ईसा को भेजा और उनको इन्जील अता की और जिन लोगों ने उनकी पैरवी की उनके दिलों में यफ़क्क़त और मेहरबानी डाल दी और रहबानियत (लज्ज़ात से किनाराकशी) उन लोगों ने ख़ुद एक नयी बात निकाली थी हमने उनको उसका हुक्म नहीं दिया था मगर (उन लोगों ने) ख़ुदा की ख़ुशनूदी हासिल करने की ग़रज़ से (ख़ुद ईजाद किया) तो उसको भी जैसा बनाना चाहिए था न बना सके तो जो लोग उनमें से ईमान लाए उनको हमने उनका अज्र दिया उनमें के बहुतेरे तो बदकार ही हैं
28يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا اتَّقُوا اللَّهَ وَآمِنُوا بِرَسُولِهِ يُؤْتِكُمْ كِفْلَيْنِ مِن رَّحْمَتِهِ وَيَجْعَل لَّكُمْ نُورًا تَمْشُونَ بِهِ وَيَغْفِرْ لَكُمْ ۚ وَاللَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
ऐ ईमानदारों ख़ुदा से डरो और उसके रसूल (मोहम्मद) पर ईमान लाओ तो ख़ुदा तुमको अपनी रहमत के दो हिस्से अज्र अता फरमाएगा और तुमको ऐसा नूर इनायत फ़रमाएगा जिस (की रौशनी) में तुम चलोगे और तुमको बख्श भी देगा और ख़ुदा तो बड़ा बख्शने वाला मेहरबान है
29لِّئَلَّا يَعْلَمَ أَهْلُ الْكِتَابِ أَلَّا يَقْدِرُونَ عَلَىٰ شَيْءٍ مِّن فَضْلِ اللَّهِ ۙ وَأَنَّ الْفَضْلَ بِيَدِ اللَّهِ يُؤْتِيهِ مَن يَشَاءُ ۚ وَاللَّهُ ذُو الْفَضْلِ الْعَظِيمِ
(ये इसलिए कहा जाता है) ताकि अहले किताब ये न समझें कि ये मोमिनीन ख़ुदा के फज़ल (व क़रम) पर कुछ भी कुदरत नहीं रखते और ये तो यक़ीनी बात है कि फज़ल ख़ुदा ही के कब्ज़े में है वह जिसको चाहे अता फरमाए और ख़ुदा तो बड़े फज़ल (व क़रम) का मालिक है
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अनुवाद — अल-हदीद 28

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Tuesday, August 18, 2026

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