Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَوْمَ يَبْعَثُهُمُ اللهُ جَمِيعًا: जिस दिन अल्लाह उन सबको (क़ब्रों से) उठाएगा।
- فَيَحْلِفُونَ لَهُ: तो वे उस (अल्लाह) के सामने क़समें खाएँगे।
- كَمَا يَحْلِفُونَ لَكُمْ: जैसे वे तुम्हारे सामने (दुनिया में) क़समें खाया करते थे।
- وَيَحْسَبُونَ أَنَّهُمْ عَلَى شَيْءٍ: और वे समझते हैं कि वे किसी (अच्छे) काम पर हैं।
- أَلَا إِنَّهُمْ هُمُ الْكَاذِبُونَ: सुन लो! बेशक वही सच्चे झूठे हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला उन मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) का हाल बयान कर रहा है जो दुनिया में मुसलमानों के सामने झूठी क़समें खाकर अपनी बात मनवा लेते थे और अपने असली कुफ़्र और निफ़ाक़ को छिपाते थे। अल्लाह फ़रमाता है कि जिस दिन वह उन सबको क़यामत के मैदान में ज़िंदा करके इकट्ठा करेगा, उस दिन भी वे अल्लाह के सामने क़समें खाएँगे कि हम मुसलमान थे, हम ईमानवाले थे और हमने अच्छे काम किए थे। वे उसी तरह अल्लाह के सामने झूठी क़समें खाएँगे, जिस तरह दुनिया में तुम्हारे सामने खाया करते थे।
वे यह ग़लतफ़हमी रखते हैं कि इन झूठी क़समों से उन्हें कुछ फ़ायदा मिल जाएगा, जैसे दुनिया में उन्हें मुसलमानों के सामने क़समें खाकर फ़ायदा मिलता था और लोग उन्हें सच्चा समझ लेते थे। लेकिन अल्लाह तआला फ़रमाता है: "सुन लो! बेशक वही सबसे बड़े झूठे हैं।" यानी वे झूठ में हद से बढ़ गए हैं, क्योंकि वे उस अल्लाह के सामने झूठ बोल रहे हैं जो छिपे और खुले सब कुछ जानता है, और वह उनके दिलों के भेद और उनके असली हाल से पूरी तरह वाक़िफ़ है। उस दिन उनकी झूठी क़समें उनके किसी काम न आएँगी, और न ही वे अल्लाह की पकड़ से बच सकेंगे।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला हर चीज़ का हिसाब लेने वाला है और उससे कुछ भी छिपा नहीं है। हमें चाहिए कि हम अपने जीवन में सच्चाई और ईमानदारी को अपनाएँ, क्योंकि झूठ और धोखा दुनिया में भले ही कुछ देर काम आ जाए, लेकिन आख़िरत में उसका कोई फ़ायदा नहीं होगा। अल्लाह के सामने सिर्फ़ सच्चा ईमान और अच्छे अमल ही काम आएँगे। हमें चाहिए कि हम अपने दिलों को साफ़ रखें, अपने ईमान को सच्चा बनाएँ और हर हाल में सच्चाई पर क़ायम रहें, ताकि अल्लाह की रहमत और उसकी जन्नत के हक़दार बन सकें। याद रखिए, अल्लाह उन लोगों से मुहब्बत करता है जो सच्चे और ईमानदार होते हैं, और वह उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी अता फ़रमाता है।
📜 आयत 16-20 — सूरा अल-मुजादिला
अनुवाद — अल-मुजादिला 18
सूरा अल-मुजादिला आयत 18 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिस दिन ख़ुदा उन सबको दोबार उठा खड़ा करेगा तो…सूरा आयत 18/22 — सूरा अल-मुजादिला المجادلة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मुजादिला सुनें, सूरा अल-मुजादिला अनुवाद, सूरा अल-मुजादिला mp3, सूरा अल-मुजादिला pdf. आयत 16–20. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-मुजादिला
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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