अल-मुजादिला · 18/22
अनुवाद उच्चारण — अल-मुजादिला
يَوْمَ يَبْعَثُهُمُ اللَّهُ جَمِيعًا فَيَحْلِفُونَ لَهُ كَمَا يَحْلِفُونَ لَكُمْ ۖ وَيَحْسَبُونَ أَنَّهُمْ عَلَىٰ شَيْءٍ ۚ أَلَا إِنَّهُمْ هُمُ الْكَاذِبُونَ ۝١٨
Yawma yab`asuhumul laahujamee`an fa yahlifoona lahoo kamaa yahlifoona lakum wa yahsaboona annahum `alaa shai`; alaaa innahum humul kaaziboon
📖 हिंदी अर्थ
जिस दिन ख़ुदा उन सबको दोबार उठा खड़ा करेगा तो ये लोग जिस तरह तुम्हारे सामने क़समें खाते हैं उसी तरह उसके सामने भी क़समें खाएँगे और ख्याल करते हैं कि वह राहे सवाब पर हैं आगाह रहो ये लोग यक़ीनन झूठे हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَوْمَ يَبْعَثُهُمُ اللهُ جَمِيعًا: जिस दिन अल्लाह उन सबको (क़ब्रों से) उठाएगा।
  • فَيَحْلِفُونَ لَهُ: तो वे उस (अल्लाह) के सामने क़समें खाएँगे।
  • كَمَا يَحْلِفُونَ لَكُمْ: जैसे वे तुम्हारे सामने (दुनिया में) क़समें खाया करते थे।
  • وَيَحْسَبُونَ أَنَّهُمْ عَلَى شَيْءٍ: और वे समझते हैं कि वे किसी (अच्छे) काम पर हैं।
  • أَلَا إِنَّهُمْ هُمُ الْكَاذِبُونَ: सुन लो! बेशक वही सच्चे झूठे हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उन मुनाफ़िक़ों (दिखावटी मुसलमानों) का हाल बयान कर रहा है जो दुनिया में मुसलमानों के सामने झूठी क़समें खाकर अपनी बात मनवा लेते थे और अपने असली कुफ़्र और निफ़ाक़ को छिपाते थे। अल्लाह फ़रमाता है कि जिस दिन वह उन सबको क़यामत के मैदान में ज़िंदा करके इकट्ठा करेगा, उस दिन भी वे अल्लाह के सामने क़समें खाएँगे कि हम मुसलमान थे, हम ईमानवाले थे और हमने अच्छे काम किए थे। वे उसी तरह अल्लाह के सामने झूठी क़समें खाएँगे, जिस तरह दुनिया में तुम्हारे सामने खाया करते थे।

वे यह ग़लतफ़हमी रखते हैं कि इन झूठी क़समों से उन्हें कुछ फ़ायदा मिल जाएगा, जैसे दुनिया में उन्हें मुसलमानों के सामने क़समें खाकर फ़ायदा मिलता था और लोग उन्हें सच्चा समझ लेते थे। लेकिन अल्लाह तआला फ़रमाता है: "सुन लो! बेशक वही सबसे बड़े झूठे हैं।" यानी वे झूठ में हद से बढ़ गए हैं, क्योंकि वे उस अल्लाह के सामने झूठ बोल रहे हैं जो छिपे और खुले सब कुछ जानता है, और वह उनके दिलों के भेद और उनके असली हाल से पूरी तरह वाक़िफ़ है। उस दिन उनकी झूठी क़समें उनके किसी काम न आएँगी, और न ही वे अल्लाह की पकड़ से बच सकेंगे।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला हर चीज़ का हिसाब लेने वाला है और उससे कुछ भी छिपा नहीं है। हमें चाहिए कि हम अपने जीवन में सच्चाई और ईमानदारी को अपनाएँ, क्योंकि झूठ और धोखा दुनिया में भले ही कुछ देर काम आ जाए, लेकिन आख़िरत में उसका कोई फ़ायदा नहीं होगा। अल्लाह के सामने सिर्फ़ सच्चा ईमान और अच्छे अमल ही काम आएँगे। हमें चाहिए कि हम अपने दिलों को साफ़ रखें, अपने ईमान को सच्चा बनाएँ और हर हाल में सच्चाई पर क़ायम रहें, ताकि अल्लाह की रहमत और उसकी जन्नत के हक़दार बन सकें। याद रखिए, अल्लाह उन लोगों से मुहब्बत करता है जो सच्चे और ईमानदार होते हैं, और वह उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी अता फ़रमाता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 16-20 — अल-मुजादिला

16اتَّخَذُوا أَيْمَانَهُمْ جُنَّةً فَصَدُّوا عَن سَبِيلِ اللَّهِ فَلَهُمْ عَذَابٌ مُّهِينٌ
उन लोगों ने अपनी क़समों को सिपर बना लिया है और (लोगों को) ख़ुदा की राह से रोक दिया तो उनके लिए रूसवा करने वाला अज़ाब है
17لَّن تُغْنِيَ عَنْهُمْ أَمْوَالُهُمْ وَلَا أَوْلَادُهُم مِّنَ اللَّهِ شَيْئًا ۚ أُولَٰئِكَ أَصْحَابُ النَّارِ ۖ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
ख़ुदा सामने हरगिज़ न उनके माल ही कुछ काम आएँगे और न उनकी औलाद ही काम आएगी यही लोग जहन्नुमी हैं कि हमेशा उसमें रहेंगे
18يَوْمَ يَبْعَثُهُمُ اللَّهُ جَمِيعًا فَيَحْلِفُونَ لَهُ كَمَا يَحْلِفُونَ لَكُمْ ۖ وَيَحْسَبُونَ أَنَّهُمْ عَلَىٰ شَيْءٍ ۚ أَلَا إِنَّهُمْ هُمُ الْكَاذِبُونَ
जिस दिन ख़ुदा उन सबको दोबार उठा खड़ा करेगा तो ये लोग जिस तरह तुम्हारे सामने क़समें खाते हैं उसी तरह उसके सामने भी क़समें खाएँगे और ख्याल करते हैं कि वह राहे सवाब पर हैं आगाह रहो ये लोग यक़ीनन झूठे हैं
19اسْتَحْوَذَ عَلَيْهِمُ الشَّيْطَانُ فَأَنسَاهُمْ ذِكْرَ اللَّهِ ۚ أُولَٰئِكَ حِزْبُ الشَّيْطَانِ ۚ أَلَا إِنَّ حِزْبَ الشَّيْطَانِ هُمُ الْخَاسِرُونَ
शैतान ने इन पर क़ाबू पा लिया है और ख़ुदा की याद उनसे भुला दी है ये लोग शैतान के गिरोह है सुन रखो कि शैतान का गिरोह घाटा उठाने वाला है
20إِنَّ الَّذِينَ يُحَادُّونَ اللَّهَ وَرَسُولَهُ أُولَٰئِكَ فِي الْأَذَلِّينَ
जो लोग ख़ुदा और उसके रसूल से मुख़ालेफ़त करते हैं वह सब ज़लील लोगों में हैं
अल-मुजादिलाकुरान सूची
22आयत
मदनीRevelation
18आयत

अनुवाद — अल-मुजादिला 18

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Tuesday, August 18, 2026

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