अल-मुजादिला · 6/22
अनुवाद उच्चारण — अल-मुजादिला
يَوْمَ يَبْعَثُهُمُ اللَّهُ جَمِيعًا فَيُنَبِّئُهُم بِمَا عَمِلُوا ۚ أَحْصَاهُ اللَّهُ وَنَسُوهُ ۚ وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدٌ ۝٦
Yawma yab`asuhumul laahu jamee`an fayunabbi`uhum bimaa `amiloo; ahsaahul laahu wa nasooh; wallaahu `alaa kulli shai`in shaheed
📖 हिंदी अर्थ
जिस दिन ख़ुदा उन सबको दोबारा उठाएगा तो उनके आमाल से उनको आगाह कर देगा ये लोग (अगरचे) उनको भूल गये हैं मगर ख़ुदा ने उनको याद रखा है और ख़ुदा तो हर चीज़ का गवाह है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَوْمَ يَبْعَثُهُمُ اللهُ جَمِيعًا: जिस दिन अल्लाह उन सबको (क़ब्रों से) उठाएगा।
  • فَيُنَبِّئُهُم: फिर उन्हें ख़बर देगा / बताएगा।
  • أَحْصَاهُ اللهُ: अल्लाह ने उसे (उनके आमाल को) गिन रखा है / संरक्षित किया है।
  • وَنَسُوهُ: और वे उसे भूल गए।
  • وَاللهُ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدٌ: और अल्लाह हर चीज़ पर गवाह है।

तफ़सीर:

ऐ नबी! उस दिन को याद करो जब अल्लाह तआला सभी लोगों को एक साथ उठाएगा—कोई भी उनमें से पीछे नहीं बचेगा, न कोई छूटेगा। फिर वह उन्हें उन सभी कर्मों की ख़बर देगा जो उन्होंने दुनिया में किए—चाहे वे अच्छे हों या बुरे। अल्लाह ने उनके हर अमल को गिनकर लौह-ए-महफ़ूज़ में दर्ज कर रखा है और उनके आमाल के पन्नों में उसे सुरक्षित कर दिया है, जबकि वे लोग उन कर्मों को भूल चुके हैं। उनकी नज़र में उनके काम बेहद मामूली थे, इसलिए उन्होंने उन्हें याद नहीं रखा, लेकिन अल्लाह ने उन्हें नहीं भुलाया। वहाँ वे अपने किए हुए हर छोटे-बड़े काम को अपने सामने लिखा हुआ पाएँगे, और अल्लाह हर चीज़ पर गवाह है—उससे कोई चीज़ छिपी नहीं है, न छोटी और न बड़ी।

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह का इल्म हर चीज़ पर हावी है। हमारे हर क़दम, हर बात, हर नीयत का हिसाब उसके पास है। हम भले ही अपने गुनाह भूल जाएँ, लेकिन अल्लाह की किताब में वे सब दर्ज हैं। यह हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि हम अपनी ज़िंदगी में सावधानी से चलें, क्योंकि एक दिन हमें अपने हर अमल का सामना करना है। यही वह दिन होगा जब हर इंसान अपने किए पर पछताएगा, लेकिन पछतावा उस वक़्त काम नहीं आएगा।

इसलिए, प्यारे भाइयों और बहनों! आज ही अपने आमाल की जाँच कर लें। अल्लाह की रहमत का दरवाज़ा खुला है—तौबा करें, नेक कामों में जल्दी करें, और उस दिन की तैयारी करें जब हमें अपने रब के सामने खड़ा होना है। अल्लाह हम सबको अपनी रहमत से नवाज़े और हमारे गुनाहों को माफ़ फ़रमाए। आमीन।



📜 आयत 4-8 — अल-मुजादिला

4فَمَن لَّمْ يَجِدْ فَصِيَامُ شَهْرَيْنِ مُتَتَابِعَيْنِ مِن قَبْلِ أَن يَتَمَاسَّا ۖ فَمَن لَّمْ يَسْتَطِعْ فَإِطْعَامُ سِتِّينَ مِسْكِينًا ۚ ذَٰلِكَ لِتُؤْمِنُوا بِاللَّهِ وَرَسُولِهِ ۚ وَتِلْكَ حُدُودُ اللَّهِ ۗ وَلِلْكَافِرِينَ عَذَابٌ أَلِيمٌ
फिर जिसको ग़ुलाम न मिले तो दोनों की मुक़ारबत के क़ब्ल दो महीने के पै दर पै रोज़े रखें और जिसको इसकी भी क़ुदरत न हो साठ मोहताजों को खाना खिलाना फर्ज़ है ये (हुक्म इसलिए है) ताकि तुम ख़ुदा और उसके रसूल की (पैरवी) तसदीक़ करो और ये ख़ुदा की मुक़र्रर हदें हैं और काफ़िरों के लिए दर्दनाक अज़ाब है
5إِنَّ الَّذِينَ يُحَادُّونَ اللَّهَ وَرَسُولَهُ كُبِتُوا كَمَا كُبِتَ الَّذِينَ مِن قَبْلِهِمْ ۚ وَقَدْ أَنزَلْنَا آيَاتٍ بَيِّنَاتٍ ۚ وَلِلْكَافِرِينَ عَذَابٌ مُّهِينٌ
बेशक जो लोग ख़ुदा की और उसके रसूल की मुख़ालेफ़त करते हैं वह (उसी तरह) ज़लील किए जाएँगे जिस तरह उनके पहले लोग किए जा चुके हैं और हम तो अपनी साफ़ और सरीही आयतें नाज़िल कर चुके और काफिरों के लिए ज़लील करने वाला अज़ाब है
6يَوْمَ يَبْعَثُهُمُ اللَّهُ جَمِيعًا فَيُنَبِّئُهُم بِمَا عَمِلُوا ۚ أَحْصَاهُ اللَّهُ وَنَسُوهُ ۚ وَاللَّهُ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ شَهِيدٌ
जिस दिन ख़ुदा उन सबको दोबारा उठाएगा तो उनके आमाल से उनको आगाह कर देगा ये लोग (अगरचे) उनको भूल गये हैं मगर ख़ुदा ने उनको याद रखा है और ख़ुदा तो हर चीज़ का गवाह है
7أَلَمْ تَرَ أَنَّ اللَّهَ يَعْلَمُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۖ مَا يَكُونُ مِن نَّجْوَىٰ ثَلَاثَةٍ إِلَّا هُوَ رَابِعُهُمْ وَلَا خَمْسَةٍ إِلَّا هُوَ سَادِسُهُمْ وَلَا أَدْنَىٰ مِن ذَٰلِكَ وَلَا أَكْثَرَ إِلَّا هُوَ مَعَهُمْ أَيْنَ مَا كَانُوا ۖ ثُمَّ يُنَبِّئُهُم بِمَا عَمِلُوا يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۚ إِنَّ اللَّهَ بِكُلِّ شَيْءٍ عَلِيمٌ
क्या तुमको मालूम नहीं कि जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है (ग़रज़ सब कुछ) ख़ुदा जानता है जब तीन (आदमियों) का ख़ुफिया मशवेरा होता है तो वह (ख़ुद) उनका ज़रूर चौथा है और जब पाँच का मशवेरा होता है तो वह उनका छठा है और उससे कम हो या ज्यादा और चाहे जहाँ कहीं हो वह उनके साथ ज़रूर होता है फिर जो कुछ वह (दुनिया में) करते रहे क़यामत के दिन उनको उससे आगाह कर देगा बेशक ख़ुदा हर चीज़ से ख़ूब वाक़िफ़ है
8أَلَمْ تَرَ إِلَى الَّذِينَ نُهُوا عَنِ النَّجْوَىٰ ثُمَّ يَعُودُونَ لِمَا نُهُوا عَنْهُ وَيَتَنَاجَوْنَ بِالْإِثْمِ وَالْعُدْوَانِ وَمَعْصِيَتِ الرَّسُولِ وَإِذَا جَاءُوكَ حَيَّوْكَ بِمَا لَمْ يُحَيِّكَ بِهِ اللَّهُ وَيَقُولُونَ فِي أَنفُسِهِمْ لَوْلَا يُعَذِّبُنَا اللَّهُ بِمَا نَقُولُ ۚ حَسْبُهُمْ جَهَنَّمُ يَصْلَوْنَهَا ۖ فَبِئْسَ الْمَصِيرُ
क्या तुमने उन लोगों को नहीं देखा जिनको सरगोशियाँ करने से मना किया गया ग़रज़ जिस काम की उनको मुमानिअत की गयी थी उसी को फिर करते हैं और (लुत्फ़ तो ये है कि) गुनाह और (बेजा) ज्यादती और रसूल की नाफरमानी की सरगोशियाँ करते हैं और जब तुम्हारे पास आते हैं तो जिन लफ्ज़ों से ख़ुदा ने भी तुम को सलाम नहीं किया उन लफ्ज़ों से सलाम करते हैं और अपने जी में कहते हैं कि (अगर ये वाक़ई पैग़म्बर हैं तो) जो कुछ हम कहते हैं ख़ुदा हमें उसकी सज़ा क्यों नहीं देता (ऐ रसूल) उनको दोज़ख़ ही (की सज़ा) काफी है जिसमें ये दाख़िल होंगे तो वह (क्या) बुरी जगह है
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अनुवाद — अल-मुजादिला 6

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Tuesday, August 18, 2026

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