अल-हश्र · 1/24
अनुवाद उच्चारण — अल-हश्र
سَبَّحَ لِلَّهِ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۖ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ ۝١
Sabbaha lillaahi maa fissamaawaati wa maa fil ardi wa Huwal `Azeezul Hakeem
📖 हिंदी अर्थ
जो चीज़ आसमानों में है और जो चीज़ ज़मीन में है (सब) ख़ुदा की तस्बीह करती हैं और वही ग़ालिब हिकमत वाला है
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • سَبَّحَ: पवित्रता का वर्णन करना, हर कमी और दोष से अल्लाह को पाक-साफ़ बताना।
  • مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ: आसमानों और ज़मीन की हर चीज़, यानी सारी मख़लूक़ात (सृष्टि)।
  • الْعَزِيزُ: वह ज़ात जो सबसे शक्तिशाली है, जिसे कोई हरा न सके।
  • الْحَكِيمُ: वह जो हर काम में पूर्ण ज्ञान और समझदारी से काम करता है, हर चीज़ को उसके सही मुकाम पर रखता है।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत हमें बताती है कि आसमानों और ज़मीन की हर चीज़ — चाहे वह ज़िंदा हो या बेजान, इंसान हो, फ़रिश्ते हों, जानवर हों, पेड़-पौधे हों, पहाड़ हों, समुद्र हों — सब कुछ अल्लाह की पाकी और पवित्रता का एलान कर रहा है। हर मख़लूक़ अपनी फ़ितरत (स्वभाव) के अनुसार अल्लाह की तस्बीह (पवित्रता का वर्णन) करती है, चाहे हम उसे सुनें या न सुनें। यह तस्बीह किसी ज़बान से नहीं, बल्कि अपने वजूद (अस्तित्व) से करती है — क्योंकि हर चीज़ का बनना और उसका अस्तित्व में होना ख़ुद अल्लाह की क़ुदरत और कमाल की गवाही देता है।

अल्लाह अज़ीज़ है, यानी वह ऐसा शक्तिशाली है जिसे कोई मात नहीं दे सकता, उसके इरादे के आगे कोई नहीं चल सकता। और वह हकीम है, यानी उसका हर फ़ैसला, हर क़ानून, हर तक़दीर पूरी हिकमत (समझदारी) पर आधारित है। वह हर चीज़ को उसके सही मौके पर रखता है, न कुछ बेकार है और न कुछ बेहूदा।

दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें ग़ौर करने की दावत देती है कि जब पूरी कायनात — जिसमें हम भी शामिल हैं — अपने रब की तस्बीह कर रही है, तो हम इंसानों को भी चाहिए कि हम अपनी ज़बान, अपने दिल और अपने अमल से अल्लाह की तस्बीह करें। जब हम अल्लाह की पाकी बयान करते हैं, तो हमारा दिल उसकी महानता से भर जाता है, हमारे अंदर उसका खौफ़ और उसकी मुहब्बत पैदा होती है। यही तस्बीह हमें गुनाहों से दूर रखती है और नेकी की तरफ ले जाती है। अल्लाह की अज़्ज़त (शक्ति) हमें हिम्मत देती है कि हम किसी और के आगे झुकें नहीं, और उसकी हिकमत हमें यक़ीन दिलाती है कि उसका हर फ़ैसला हमारे भले के लिए है। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की तस्बीह और उसकी इबादत से सजाना चाहिए, क्योंकि यही हमारी फ़ितरत है और यही हमारी कामयाबी का रास्ता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 1-3 — अल-हश्र

1سَبَّحَ لِلَّهِ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ ۖ وَهُوَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ
जो चीज़ आसमानों में है और जो चीज़ ज़मीन में है (सब) ख़ुदा की तस्बीह करती हैं और वही ग़ालिब हिकमत वाला है
2هُوَ الَّذِي أَخْرَجَ الَّذِينَ كَفَرُوا مِنْ أَهْلِ الْكِتَابِ مِن دِيَارِهِمْ لِأَوَّلِ الْحَشْرِ ۚ مَا ظَنَنتُمْ أَن يَخْرُجُوا ۖ وَظَنُّوا أَنَّهُم مَّانِعَتُهُمْ حُصُونُهُم مِّنَ اللَّهِ فَأَتَاهُمُ اللَّهُ مِنْ حَيْثُ لَمْ يَحْتَسِبُوا ۖ وَقَذَفَ فِي قُلُوبِهِمُ الرُّعْبَ ۚ يُخْرِبُونَ بُيُوتَهُم بِأَيْدِيهِمْ وَأَيْدِي الْمُؤْمِنِينَ فَاعْتَبِرُوا يَا أُولِي الْأَبْصَارِ
वही तो है जिसने कुफ्फ़ार अहले किताब (बनी नुजैर) को पहले हश्र (ज़िलाए वतन) में उनके घरों से निकाल बाहर किया (मुसलमानों) तुमको तो ये वहम भी न था कि वह निकल जाएँगे और वह लोग ये समझे हुये थे कि उनके क़िले उनको ख़ुदा (के अज़ाब) से बचा लेंगे मगर जहाँ से उनको ख्याल भी न था ख़ुदा ने उनको आ लिया और उनके दिलों में (मुसलमानों) को रौब डाल दिया कि वह लोग ख़ुद अपने हाथों से और मोमिनीन के हाथों से अपने घरों को उजाड़ने लगे तो ऐ ऑंख वालों इबरत हासिल करो
3وَلَوْلَا أَن كَتَبَ اللَّهُ عَلَيْهِمُ الْجَلَاءَ لَعَذَّبَهُمْ فِي الدُّنْيَا ۖ وَلَهُمْ فِي الْآخِرَةِ عَذَابُ النَّارِ
और ख़ुदा ने उनकी किसमत में ज़िला वतनी न लिखा होता तो उन पर दुनिया में भी (दूसरी तरह) अज़ाब करता और आख़ेरत में तो उन पर जहन्नुम का अज़ाब है ही
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अनुवाद — अल-हश्र 1

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Tuesday, August 18, 2026

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