Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- سَبَّحَ: पवित्रता का वर्णन करना, हर कमी और दोष से अल्लाह को पाक-साफ़ बताना।
- مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ: आसमानों और ज़मीन की हर चीज़, यानी सारी मख़लूक़ात (सृष्टि)।
- الْعَزِيزُ: वह ज़ात जो सबसे शक्तिशाली है, जिसे कोई हरा न सके।
- الْحَكِيمُ: वह जो हर काम में पूर्ण ज्ञान और समझदारी से काम करता है, हर चीज़ को उसके सही मुकाम पर रखता है।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत हमें बताती है कि आसमानों और ज़मीन की हर चीज़ — चाहे वह ज़िंदा हो या बेजान, इंसान हो, फ़रिश्ते हों, जानवर हों, पेड़-पौधे हों, पहाड़ हों, समुद्र हों — सब कुछ अल्लाह की पाकी और पवित्रता का एलान कर रहा है। हर मख़लूक़ अपनी फ़ितरत (स्वभाव) के अनुसार अल्लाह की तस्बीह (पवित्रता का वर्णन) करती है, चाहे हम उसे सुनें या न सुनें। यह तस्बीह किसी ज़बान से नहीं, बल्कि अपने वजूद (अस्तित्व) से करती है — क्योंकि हर चीज़ का बनना और उसका अस्तित्व में होना ख़ुद अल्लाह की क़ुदरत और कमाल की गवाही देता है।
अल्लाह अज़ीज़ है, यानी वह ऐसा शक्तिशाली है जिसे कोई मात नहीं दे सकता, उसके इरादे के आगे कोई नहीं चल सकता। और वह हकीम है, यानी उसका हर फ़ैसला, हर क़ानून, हर तक़दीर पूरी हिकमत (समझदारी) पर आधारित है। वह हर चीज़ को उसके सही मौके पर रखता है, न कुछ बेकार है और न कुछ बेहूदा।
दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):
यह आयत हमें ग़ौर करने की दावत देती है कि जब पूरी कायनात — जिसमें हम भी शामिल हैं — अपने रब की तस्बीह कर रही है, तो हम इंसानों को भी चाहिए कि हम अपनी ज़बान, अपने दिल और अपने अमल से अल्लाह की तस्बीह करें। जब हम अल्लाह की पाकी बयान करते हैं, तो हमारा दिल उसकी महानता से भर जाता है, हमारे अंदर उसका खौफ़ और उसकी मुहब्बत पैदा होती है। यही तस्बीह हमें गुनाहों से दूर रखती है और नेकी की तरफ ले जाती है। अल्लाह की अज़्ज़त (शक्ति) हमें हिम्मत देती है कि हम किसी और के आगे झुकें नहीं, और उसकी हिकमत हमें यक़ीन दिलाती है कि उसका हर फ़ैसला हमारे भले के लिए है। इसलिए हमें अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की तस्बीह और उसकी इबादत से सजाना चाहिए, क्योंकि यही हमारी फ़ितरत है और यही हमारी कामयाबी का रास्ता है।
📜 आयत 1-3 — सूरा अल-हश्र
अनुवाद — अल-हश्र 1
सूरा अल-हश्र आयत 1 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जो चीज़ आसमानों में है और जो चीज़ ज़मीन में…सूरा आयत 1/24 — सूरा अल-हश्र الحشر (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हश्र सुनें, सूरा अल-हश्र अनुवाद, सूरा अल-हश्र mp3, सूरा अल-हश्र pdf. आयत 1–3. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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