अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- الْجَلَاءَ: वतन से निकाला जाना, निर्वासन, अपने घरों और शहरों से बेदखल होना।
- كَتَبَ: यहाँ इसका अर्थ है अल्लाह का फ़ैसला कर देना, लिख देना, अनिवार्य कर देना।
- لَعَذَّبَهُمْ: वह उन्हें अज़ाब देता।
- فِي الدُّنْيَا: दुनिया में (यानी इसी दुनिया में सज़ा दे देता)।
- عَذَابُ النَّارِ: आग का अज़ाब (जहन्नम की आग)।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला ने बनी नज़ीर (यहूदियों के एक क़बीले) के उस हाल का ज़िक्र किया है, जिन्होंने अल्लाह के रसूल ﷺ से की गई अपनी संधि तोड़ दी थी और मदीना से निकाले जाने की सज़ा पाई। अल्लाह फ़रमाता है: अगर अल्लाह ने उनके हक़ में यह फ़ैसला न लिख दिया होता कि उन्हें अपने वतन से निकाला जाए और वे जिलावतन हों, तो वह उन्हें दुनिया में ही सख़्त से सख़्त अज़ाब देता — यानी उन्हें क़त्ल (मार डालने) और क़ैद (बंदी बनाने) की सज़ा देता। मगर अल्लाह ने उनके लिए यह आसान सज़ा चुनी कि वे अपने घर-बार छोड़कर निकल जाएँ, ताकि वे ज़िंदा रहकर सोचें और शायद ईमान ले आएँ।
लेकिन यह सिर्फ़ दुनिया की बात है। उनके लिए आख़िरत में आग का अज़ाब तैयार है, जो कहीं ज़्यादा सख़्त और हमेशा रहने वाला है। अगर वे दुनिया में क़त्ल से बच भी गए, तो आख़िरत की आग से नहीं बच सकते, जब तक कि वे तौबा न कर लें और अल्लाह के रसूल ﷺ पर ईमान न ले आएँ।
दावती पहलू (शिक्षाप्रद बातें):
यह आयत हमें कई अहम सबक़ सिखाती है:
- अल्लाह की रहमत: अल्लाह तआला बंदों पर रहम करने वाला है। वह चाहता तो उन्हें दुनिया में ही तबाह कर देता, मगर उसने उन्हें मौक़ा दिया, ताकि वे पलट आएँ। यह अल्लाह की मेहरबानी है कि वह जल्दी सज़ा नहीं देता, बल्कि मौक़ा देता है।
- अल्लाह का फ़ैसला टलता नहीं: जब अल्लाह किसी क़ौम के हक़ में फ़ैसला कर देता है, तो वह पूरा होकर रहता है। बनी नज़ीर को निकाला गया, उनकी ताक़त और साज़िशों के बावजूद वे अल्लाह के फ़ैसले के आगे कुछ न कर सके।
- आख़िरत की सज़ा सबसे बड़ी: दुनिया की सज़ा चाहे जितनी भी सख़्त हो, आख़िरत की सज़ा उससे कहीं बढ़कर है। इसलिए हमें दुनिया की चीज़ों पर आख़िरत को तरजीह देनी चाहिए और अल्लाह की नाफ़रमानी से बचना चाहिए।
- तौबा का दरवाज़ा खुला है: अल्लाह ने उन्हें ज़िंदा रखा, ताकि वे तौबा कर सकें। यह हमारे लिए भी पैग़ाम है कि जब तक हम ज़िंदा हैं, अल्लाह की रहमत से उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए। अल्लाह की रहमत उसके ग़ज़ब से कहीं ज़्यादा वसीअ है।
- अल्लाह की नेमतों का शुक्र: जब हम देखते हैं कि अल्लाह ने हमें अपने घरों, वतन और आज़ादी में रखा है, तो हमें उसका शुक्र अदा करना चाहिए और उसकी नाफ़रमानी से बचना चाहिए। यह बड़ी नेमत है कि हम अपने घरों में इत्मिनान से रहते हैं, जबकि कई क़ौमें अपने वतन से निकाली गईं।
अल्लाह हमें समझने की तौफ़ीक़ दे और हमें उन लोगों में शामिल करे जो उसके फ़ैसलों पर रज़ामंद रहते हैं और उसकी रहमत के तलबगार हैं। आमीन।
📜 आयत 1-5 — अल-हश्र
अनुवाद — अल-हश्र 3
सूरा अल-हश्र आयत 3 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ख़ुदा ने उनकी किसमत में ज़िला वतनी न लिखा…सूरा आयत 3/24 — अल-हश्र الحشر (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हश्र सुनें, अल-हश्र अनुवाद, अल-हश्र mp3, अल-हश्र pdf. आयत 1–5. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








