Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مَيْتًا (मय्यितन): कुफ्र और गुमराही की वजह से आध्यात्मिक रूप से मृत।
- فَأَحْيَيْنَاهُ (फ़अह्यैनाहु): हमने उसे ईमान और हिदायत देकर ज़िंदा कर दिया।
- نُورًا (नूरन): ईमान की रोशनी, जो दिल को रौशन कर देती है।
- الظُّلُمَاتِ (ज़ुलुमात): कुफ्र, जहालत और गुनाहों के अंधेरे।
- زُيِّنَ (ज़ुय्यिना): खूबसूरत बना दिया गया।
तफसीर:
क्या वह शख्स जो पहले कुफ्र और गुनाहों की वजह से मुर्दा था — उसका दिल अंधेरों में डूबा हुआ था, ना उसे सच्चाई की समझ थी, ना ही नेकी की तरफ रग़बत — फिर हमने उसे ईमान की हिदायत देकर ज़िंदा कर दिया, उसके दिल को रौशन कर दिया, और उसे ऐसा नूर अता किया जिसके सहारे वह लोगों के बीच चलता है, हक़ और बातिल में फर्क करता है, और अपनी ज़िंदगी की राहों को साफ़ देखता है, तो क्या वह उस शख्स के बराबर हो सकता है जो अंधेरों में फंसा हुआ है — कुफ्र के अंधेरे, जहालत के अंधेरे और गुनाहों के अंधेरे — और उन अंधेरों से निकलने का कोई रास्ता उसे नहीं मिलता? हरगिज़ नहीं! दोनों कभी बराबर नहीं हो सकते।
यह अल्लाह का फज़ल है कि वह जिसे चाहता है ईमान की रोशनी देता है और उसे ज़िंदगी की असली मंज़िल दिखाता है। जिसे अल्लाह यह नूर दे दे, उसकी ज़िंदगी बदल जाती है — वह अंधेरों से निकलकर रौशनी में चलता है, उसके अमल सुधर जाते हैं, उसकी सोच पाक हो जाती है, और वह दूसरों के लिए भी रहनुमा बन जाता है।
जिस तरह ईमानवालों के लिए हिदायत का रास्ता साफ़ किया गया, उसी तरह काफिरों के लिए उनके बुरे अमल खूबसूरत बना दिए गए — उन्हें उनके कुफ्र, शिर्क और गुनाह अच्छे लगते हैं, वे समझते हैं कि वे सही रास्ते पर हैं, हालाँकि वे सबसे बड़ी गुमराही में हैं। यह अल्लाह की तरफ से उनकी सज़ा का एक हिस्सा है कि उनके बुरे काम उन्हें अच्छे दिखते हैं, यहाँ तक कि वे हक़ के मुक़ाबले में झगड़ते हैं और बातिल को ही सच समझते हैं।
इस आयत में हमारे लिए बड़ी नसीहत है — हमें अल्लाह से यह दुआ करनी चाहिए कि वह हमें ईमान का नूर अता करे, हमारे दिलों को ज़िंदा रखे, और हमें उन अंधेरों से बचाए जिनमें काफिर फंसे हुए हैं। और जिसे अल्लाह ने यह नूर दिया है, उसे चाहिए कि वह इस नूर की क़द्र करे, उस पर अमल करे, और दूसरों को भी इस रोशनी की तरफ बुलाए। याद रखिए, ईमान की रोशनी ही असली ज़िंदगी है, और उसके बगैर यह दुनिया भी अंधेरा है और आख़िरत भी।
📜 आयत 120-124 — सूरा अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 122
सूरा अल-अनआम आयत 122 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : क्या जो शख़्श (पहले) मुर्दा था फिर हमने उसको ज़िन्दा…सूरा आयत 122/165 — सूरा अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-अनआम सुनें, सूरा अल-अनआम अनुवाद, सूरा अल-अनआम mp3, सूरा अल-अनआम pdf. आयत 120–124. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
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