अल-अनआम · 123/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
وَكَذَٰلِكَ جَعَلْنَا فِي كُلِّ قَرْيَةٍ أَكَابِرَ مُجْرِمِيهَا لِيَمْكُرُوا فِيهَا ۖ وَمَا يَمْكُرُونَ إِلَّا بِأَنفُسِهِمْ وَمَا يَشْعُرُونَ ۝١٢٣
Wa kazaalika ja`alnaa fee kulli qaryatin akaabira mujrimeehaa liyamkuroo feehaa wa maa yamkuroona illaa bi anfusihim wa maa yash`uroon
📖 हिंदी अर्थ
(कि भला ही भला नज़र आता है) और जिस तरह मक्के में है उसी तरह हमने हर बस्ती में उनके कुसूरवारों को सरदार बनाया ताकि उनमें मक्कारी किया करें और वह लोग जो कुछ करते हैं अपने ही हक़ में (बुरा) करते हैं और समझते (तक) नहीं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَكَابِرَ (अकाबिर): बड़े लोग, सरदार, नेता।
  • مُجْرِمِيهَا (मुजरिमीहा): उस बस्ती के अपराधी, गुनाहगार।
  • لِيَمْكُرُوا (लियमकुरू): ताकि वे चालें चलें, धोखा दें, साज़िश करें।
  • يَشْعُرُونَ (यश्उरून): महसूस करना, समझना, अहसास होना।

तफ़सीर (व्याख्या):

जिस प्रकार मक्का के बड़े-बड़े सरदार और अपराधी नेता सत्य के मार्ग से लोगों को रोकने के लिए चालें चल रहे थे, उसी प्रकार अल्लाह ने हर बस्ती में उसके बड़े अपराधियों को ही प्रमुख बनाया है। यह अल्लाह की सुन्नत (क़ानून) है कि वह हर युग और हर बस्ती में ऐसे लोगों को सत्ता और प्रभाव देता है जो सत्य का विरोध करें, रसूलों को झुठलाएँ और लोगों को ईमान से दूर रखने की साज़िशें रचें। ये बड़े लोग अपनी चालों से यह समझते हैं कि वे दूसरों को नुकसान पहुँचा रहे हैं, लेकिन वास्तव में उनकी ये चालें और साज़िशें उन्हीं के खिलाफ जाती हैं। उनका कुफ़्र, उनका झूठ और उनकी बुराइयाँ उन्हीं के लिए विनाश का कारण बनेंगी। वे अपने इस अंधेपन और अहंकार के कारण यह महसूस नहीं कर पाते कि उनका मक्र (धोखा) उन्हीं पर वापस लौटेगा और उन्हीं को इसका बुरा परिणाम भुगतना पड़ेगा।

यह आयत हमें एक बड़ी सच्चाई से अवगत कराती है कि बुराई और साज़िश का अंजाम हमेशा बुरा ही होता है। जो लोग सत्य के मार्ग में रुकावटें डालते हैं, वे वास्तव में अपने ही नुकसान का सामान करते हैं। अल्लाह की यह सुन्नत है कि वह ज़ालिमों को मोहलत देता है, लेकिन उन्हें कभी नहीं छोड़ता। इसलिए हमें कभी भी बुराई और साज़िश का रास्ता नहीं अपनाना चाहिए, बल्कि सत्य और नेकी पर स्थिर रहना चाहिए। अल्लाह का वादा है कि सत्य की जीत होगी और बुराई का अंत निश्चित है। यही ईमानवाले की असली ताकत है — यह विश्वास कि अल्लाह हर चाल और हर साज़िश से ऊपर है और वही सबसे बेहतर योजना बनाने वाला है।

🎧 सुनें

📜 आयत 121-125 — अल-अनआम

121وَلَا تَأْكُلُوا مِمَّا لَمْ يُذْكَرِ اسْمُ اللَّهِ عَلَيْهِ وَإِنَّهُ لَفِسْقٌ ۗ وَإِنَّ الشَّيَاطِينَ لَيُوحُونَ إِلَىٰ أَوْلِيَائِهِمْ لِيُجَادِلُوكُمْ ۖ وَإِنْ أَطَعْتُمُوهُمْ إِنَّكُمْ لَمُشْرِكُونَ
और जिस (ज़बीहे) पर ख़ुदा का नाम न लिया गया उसमें से मत खाओ (क्योंकि) ये बेशक बदचलनी है और शयातीन तो अपने हवा ख़वाहों के दिल में वसवसा डाला ही करते हैं ताकि वह तुमसे (बेकार) झगड़े किया करें और अगर (कहीं) तुमने उनका कहना मान लिया तो (समझ रखो कि) बेशुबहा तुम भी मुशरिक हो
122أَوَمَن كَانَ مَيْتًا فَأَحْيَيْنَاهُ وَجَعَلْنَا لَهُ نُورًا يَمْشِي بِهِ فِي النَّاسِ كَمَن مَّثَلُهُ فِي الظُّلُمَاتِ لَيْسَ بِخَارِجٍ مِّنْهَا ۚ كَذَٰلِكَ زُيِّنَ لِلْكَافِرِينَ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
क्या जो शख़्श (पहले) मुर्दा था फिर हमने उसको ज़िन्दा किया और उसके लिए एक नूर बनाया जिसके ज़रिए वह लोगों में (बेतकल्लुफ़) चलता फिरता है उस शख़्श का सामना हो सकता है जिसकी ये हालत है कि (हर तरफ से) अंधेरे में (फँसा हुआ है) कि वहाँ से किसी तरह निकल नहीं सकता (जिस तरह मोमिनों के वास्ते ईमान आरास्ता किया गया) उसी तरह काफिरों के वास्ते उनके आमाल (बद) आरास्ता कर दिए गए हैं
123وَكَذَٰلِكَ جَعَلْنَا فِي كُلِّ قَرْيَةٍ أَكَابِرَ مُجْرِمِيهَا لِيَمْكُرُوا فِيهَا ۖ وَمَا يَمْكُرُونَ إِلَّا بِأَنفُسِهِمْ وَمَا يَشْعُرُونَ
(कि भला ही भला नज़र आता है) और जिस तरह मक्के में है उसी तरह हमने हर बस्ती में उनके कुसूरवारों को सरदार बनाया ताकि उनमें मक्कारी किया करें और वह लोग जो कुछ करते हैं अपने ही हक़ में (बुरा) करते हैं और समझते (तक) नहीं
124وَإِذَا جَاءَتْهُمْ آيَةٌ قَالُوا لَن نُّؤْمِنَ حَتَّىٰ نُؤْتَىٰ مِثْلَ مَا أُوتِيَ رُسُلُ اللَّهِ ۘ اللَّهُ أَعْلَمُ حَيْثُ يَجْعَلُ رِسَالَتَهُ ۗ سَيُصِيبُ الَّذِينَ أَجْرَمُوا صَغَارٌ عِندَ اللَّهِ وَعَذَابٌ شَدِيدٌ بِمَا كَانُوا يَمْكُرُونَ
और जब उनके पास कोई निशानी (नबी की तसदीक़ के लिए) आई है तो कहते हैं जब तक हमको ख़ुद वैसी चीज़ (वही वग़ैरह) न दी जाएगी जो पैग़म्बराने ख़ुदा को दी गई है उस वक्त तक तो हम ईमान न लाएँगे और ख़ुदा जहाँ (जिस दिल में) अपनी पैग़म्बरी क़रार देता है उसकी (काबलियत व सलाहियत) को ख़ूब जानता है जो लोग (उस जुर्म के) मुजरिम हैं उनको अनक़रीब उनकी मक्कारी की सज़ा में ख़ुदा के यहाँ बड़ी ज़िल्लत और सख्त अज़ाब होगा
125فَمَن يُرِدِ اللَّهُ أَن يَهْدِيَهُ يَشْرَحْ صَدْرَهُ لِلْإِسْلَامِ ۖ وَمَن يُرِدْ أَن يُضِلَّهُ يَجْعَلْ صَدْرَهُ ضَيِّقًا حَرَجًا كَأَنَّمَا يَصَّعَّدُ فِي السَّمَاءِ ۚ كَذَٰلِكَ يَجْعَلُ اللَّهُ الرِّجْسَ عَلَى الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ
तो ख़ुदा जिस शख़्श को राह रास्त दिखाना चाहता है उसके सीने को इस्लाम (की दौलियत) के वास्ते (साफ़ और) कुशादा (चौड़ा) कर देता है और जिसको गुमराही की हालत में छोड़ना चाहता है उनके सीने को तंग दुश्वार ग़ुबार कर देता है गोया (कुबूल ईमान) उसके लिए आसमान पर चढ़ना है जो लोग ईमान नहीं लाते ख़ुदा उन पर बुराई को उसी तरह मुसल्लत कर देता है
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अनुवाद — अल-अनआम 123

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Tuesday, August 18, 2026

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