अनुवाद — Tafsir
يَا مَعْشَرَ الْجِنِّ وَالْإِنسِ أَلَمْ يَأْتِكُمْ رُسُلٌ مِّنكُمْ يَقُصُّونَ عَلَيْكُمْ آيَاتِي وَيُنذِرُونَكُمْ لِقَاءَ يَوْمِكُمْ هَـٰذَا ۚ قَالُوا شَهِدْنَا عَلَىٰ أَنفُسِنَا ۖ وَغَرَّتْهُمُ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا وَشَهِدُوا عَلَىٰ أَنفُسِهِمْ أَنَّهُمْ كَانُوا كَافِرِينَ
معاني الكلمات:
- يَقُصُّونَ: सुनाते हैं, बयान करते हैं।
- وَغَرَّتْهُمُ: उन्हें धोखे में डाला, उन्हें भुलावे में रखा।
- شَهِدْنَا: हमने गवाही दी, हम इक़रार करते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
क़ियामत के दिन अल्लाह तआला जिन्न और इंसानों के उन गिरोहों से जिन्होंने कुफ़्र और शिर्क का रास्ता अपनाया था, पूछेगा: "क्या तुम्हारे पास तुम्हीं में से रसूल नहीं आए थे? जो तुम्हें मेरी आयतें पढ़कर सुनाते थे, जिनमें हिदायत, अच्छे-बुरे की पहचान, हुक्म और मनाही का बयान था, और तुम्हें इस दिन की मुलाक़ात से डराते थे?"
इस पर वे लोग जवाब देंगे: "हाँ, हम अपने ऊपर गवाही देते हैं कि रसूल हमारे पास आए थे, उन्होंने हमें आपकी आयतें पहुँचा दीं और हमें इस दिन से डराया, लेकिन हमने उन्हें झुठलाया और उनकी बात नहीं मानी।"
फिर अल्लाह तआला बताता है कि इन लोगों को दुनिया की ज़िंदगी ने धोखे में रखा। उन्होंने सोचा कि यही ज़िंदगी हमेशा रहेगी, इसकी चमक-दमक और रंग-बिरंगी चीज़ों ने उन्हें भुलावे में डाल दिया, यहाँ तक कि वे आख़िरत को भूल गए। और आख़िर में वे ख़ुद अपने ऊपर गवाही देंगे कि वे काफ़िर थे, यानी उन्होंने अल्लाह की वहदानियत और उसके रसूलों की सच्चाई का इनकार किया था। मगर उस वक़्त यह इक़रार और ईमान उनके किसी काम न आएगा, क्योंकि मौका निकल चुका होगा।
फ़ायदे (सबक):
- अल्लाह तआला इंसाफ़ का मालिक है — वह किसी को बिना हुज्जत (प्रमाण) के सज़ा नहीं देता। उसने हर उम्मत की तरफ़ रसूल भेजे ताकि कोई यह न कह सके कि हमें बताया नहीं गया।
- दुनिया की ज़िंदगी का धोखा इंसान को आख़िरत से ग़ाफ़िल कर देता है। यह सबसे बड़ी वजह है कि इंसान हक़ को क़बूल नहीं करता।
- क़ियामत के दिन हर इंसान अपने ऊपर गवाही देगा — कोई झूठ नहीं बोल सकेगा, और जो लोग दुनिया में हक़ से मुँह मोड़ते हैं, वे उस दिन अपनी ही ज़बान से अपने कुफ़्र का इक़रार करेंगे।
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के रसूलों की नेमत कितनी बड़ी है — उनके आने से इंसान के पास बहाने की कोई गुंजाइश नहीं रहती। इसलिए हमें उनकी लाई हुई हिदायत को पकड़ना चाहिए और दुनिया के धोखे से बचकर आख़िरत की तैयारी करनी चाहिए।
📜 आयत 128-132 — अल-अनआम
अनुवाद — अल-अनआम 130
सूरा अल-अनआम आयत 130 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (फिर हम पूछेंगे कि क्यों) ऐ गिरोह जिन व इन्स…सूरा आयत 130/165 — अल-अनआम الأنعام (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-अनआम सुनें, अल-अनआम अनुवाद, अल-अनआम mp3, अल-अनआम pdf. आयत 128–132. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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