अल-अनआम · 130/165
अनुवाद उच्चारण — अल-अनआम
يَا مَعْشَرَ الْجِنِّ وَالْإِنسِ أَلَمْ يَأْتِكُمْ رُسُلٌ مِّنكُمْ يَقُصُّونَ عَلَيْكُمْ آيَاتِي وَيُنذِرُونَكُمْ لِقَاءَ يَوْمِكُمْ هَٰذَا ۚ قَالُوا شَهِدْنَا عَلَىٰ أَنفُسِنَا ۖ وَغَرَّتْهُمُ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا وَشَهِدُوا عَلَىٰ أَنفُسِهِمْ أَنَّهُمْ كَانُوا كَافِرِينَ ۝١٣٠
Yaa ma`sharal jinni wal insi alam yaatikum Rusulum minkum yaqussoona `alaikum Aayaatee wa yunziroonakum liqaaa`a Yawmikum haazaa; qaaloo shahidnaa `alaaa anfusinaa wa gharrat humul hayaatud dunyaa wa shahidooo `alaa anfusihim annahum kaanoo kaafireen
📖 हिंदी अर्थ
(फिर हम पूछेंगे कि क्यों) ऐ गिरोह जिन व इन्स क्या तुम्हारे पास तुम ही में के पैग़म्बर नहीं आए जो तुम तुमसे हमारी आयतें बयान करें और तुम्हें तुम्हारे उस रोज़ (क़यामत) के पेश आने से डराएँ वह सब अर्ज करेंगे (बेशक आए थे) हम ख़ुद अपने ऊपर आप अपने (ख़िलाफ) गवाही देते हैं (वाकई) उनको दुनिया की (चन्द रोज़) ज़िन्दगी ने उन्हें अंधेरे में डाल रखा और उन लोगों ने अपने ख़िलाफ आप गवाही दीं
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अनुवाद — Tafsir

يَا مَعْشَرَ الْجِنِّ وَالْإِنسِ أَلَمْ يَأْتِكُمْ رُسُلٌ مِّنكُمْ يَقُصُّونَ عَلَيْكُمْ آيَاتِي وَيُنذِرُونَكُمْ لِقَاءَ يَوْمِكُمْ هَـٰذَا ۚ قَالُوا شَهِدْنَا عَلَىٰ أَنفُسِنَا ۖ وَغَرَّتْهُمُ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا وَشَهِدُوا عَلَىٰ أَنفُسِهِمْ أَنَّهُمْ كَانُوا كَافِرِينَ

معاني الكلمات:

  • يَقُصُّونَ: सुनाते हैं, बयान करते हैं।
  • وَغَرَّتْهُمُ: उन्हें धोखे में डाला, उन्हें भुलावे में रखा।
  • شَهِدْنَا: हमने गवाही दी, हम इक़रार करते हैं।

तफ़सीर (व्याख्या):

क़ियामत के दिन अल्लाह तआला जिन्न और इंसानों के उन गिरोहों से जिन्होंने कुफ़्र और शिर्क का रास्ता अपनाया था, पूछेगा: "क्या तुम्हारे पास तुम्हीं में से रसूल नहीं आए थे? जो तुम्हें मेरी आयतें पढ़कर सुनाते थे, जिनमें हिदायत, अच्छे-बुरे की पहचान, हुक्म और मनाही का बयान था, और तुम्हें इस दिन की मुलाक़ात से डराते थे?"

इस पर वे लोग जवाब देंगे: "हाँ, हम अपने ऊपर गवाही देते हैं कि रसूल हमारे पास आए थे, उन्होंने हमें आपकी आयतें पहुँचा दीं और हमें इस दिन से डराया, लेकिन हमने उन्हें झुठलाया और उनकी बात नहीं मानी।"

फिर अल्लाह तआला बताता है कि इन लोगों को दुनिया की ज़िंदगी ने धोखे में रखा। उन्होंने सोचा कि यही ज़िंदगी हमेशा रहेगी, इसकी चमक-दमक और रंग-बिरंगी चीज़ों ने उन्हें भुलावे में डाल दिया, यहाँ तक कि वे आख़िरत को भूल गए। और आख़िर में वे ख़ुद अपने ऊपर गवाही देंगे कि वे काफ़िर थे, यानी उन्होंने अल्लाह की वहदानियत और उसके रसूलों की सच्चाई का इनकार किया था। मगर उस वक़्त यह इक़रार और ईमान उनके किसी काम न आएगा, क्योंकि मौका निकल चुका होगा।

फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह तआला इंसाफ़ का मालिक है — वह किसी को बिना हुज्जत (प्रमाण) के सज़ा नहीं देता। उसने हर उम्मत की तरफ़ रसूल भेजे ताकि कोई यह न कह सके कि हमें बताया नहीं गया।
  2. दुनिया की ज़िंदगी का धोखा इंसान को आख़िरत से ग़ाफ़िल कर देता है। यह सबसे बड़ी वजह है कि इंसान हक़ को क़बूल नहीं करता।
  3. क़ियामत के दिन हर इंसान अपने ऊपर गवाही देगा — कोई झूठ नहीं बोल सकेगा, और जो लोग दुनिया में हक़ से मुँह मोड़ते हैं, वे उस दिन अपनी ही ज़बान से अपने कुफ़्र का इक़रार करेंगे।
  4. यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के रसूलों की नेमत कितनी बड़ी है — उनके आने से इंसान के पास बहाने की कोई गुंजाइश नहीं रहती। इसलिए हमें उनकी लाई हुई हिदायत को पकड़ना चाहिए और दुनिया के धोखे से बचकर आख़िरत की तैयारी करनी चाहिए।
🎧 सुनें

📜 आयत 128-132 — अल-अनआम

128وَيَوْمَ يَحْشُرُهُمْ جَمِيعًا يَا مَعْشَرَ الْجِنِّ قَدِ اسْتَكْثَرْتُم مِّنَ الْإِنسِ ۖ وَقَالَ أَوْلِيَاؤُهُم مِّنَ الْإِنسِ رَبَّنَا اسْتَمْتَعَ بَعْضُنَا بِبَعْضٍ وَبَلَغْنَا أَجَلَنَا الَّذِي أَجَّلْتَ لَنَا ۚ قَالَ النَّارُ مَثْوَاكُمْ خَالِدِينَ فِيهَا إِلَّا مَا شَاءَ اللَّهُ ۗ إِنَّ رَبَّكَ حَكِيمٌ عَلِيمٌ
और (ऐ रसूल वह दिन याद दिलाओ) जिस दिन ख़ुदा सब लोगों को जमा करेगा और शयातीन से फरमाएगा, ऐ गिरोह जिन्नात तुमने तो बहुतेरे आदमियों को (बहका बहका कर) अपनी जमाअत बड़ी कर ली (और) आदमियों से जो लोग (उन शयातीन के दुनिया में) दोस्त थे कहेंगे ऐ हमारे पालने वाले (दुनिया में) हमने एक दूसरे से फायदा हासिल किया और अपने किए की सज़ा पाने को, जो वक्त तू ने हमारे लिए मुअय्युन किया था अब हम अपने उस वक्त (क़यामत) में पहुँच गए ख़ुदा उसके जवाब में, फरमाएगा तुम सब का ठिकाना जहन्नुम है और उसमें हमेशा रहोगे मगर जिसे ख़ुदा चाहे (नजात दे) बेशक तेरा परवरदिगार हिकमत वाला वाक़िफकार है
129وَكَذَٰلِكَ نُوَلِّي بَعْضَ الظَّالِمِينَ بَعْضًا بِمَا كَانُوا يَكْسِبُونَ
और इसी तरह हम बाज़ ज़ालिमों को बाज़ का उनके करतूतों की बदौलत सरपरस्त बनाएँगे
130يَا مَعْشَرَ الْجِنِّ وَالْإِنسِ أَلَمْ يَأْتِكُمْ رُسُلٌ مِّنكُمْ يَقُصُّونَ عَلَيْكُمْ آيَاتِي وَيُنذِرُونَكُمْ لِقَاءَ يَوْمِكُمْ هَٰذَا ۚ قَالُوا شَهِدْنَا عَلَىٰ أَنفُسِنَا ۖ وَغَرَّتْهُمُ الْحَيَاةُ الدُّنْيَا وَشَهِدُوا عَلَىٰ أَنفُسِهِمْ أَنَّهُمْ كَانُوا كَافِرِينَ
(फिर हम पूछेंगे कि क्यों) ऐ गिरोह जिन व इन्स क्या तुम्हारे पास तुम ही में के पैग़म्बर नहीं आए जो तुम तुमसे हमारी आयतें बयान करें और तुम्हें तुम्हारे उस रोज़ (क़यामत) के पेश आने से डराएँ वह सब अर्ज करेंगे (बेशक आए थे) हम ख़ुद अपने ऊपर आप अपने (ख़िलाफ) गवाही देते हैं (वाकई) उनको दुनिया की (चन्द रोज़) ज़िन्दगी ने उन्हें अंधेरे में डाल रखा और उन लोगों ने अपने ख़िलाफ आप गवाही दीं
131ذَٰلِكَ أَن لَّمْ يَكُن رَّبُّكَ مُهْلِكَ الْقُرَىٰ بِظُلْمٍ وَأَهْلُهَا غَافِلُونَ
बेशक ये सब के सब काफिर थे और ये (पैग़म्बरों का भेजना सिर्फ) उस वजह से है कि तुम्हारा परवरदिगार कभी बस्तियों को ज़ुल्म ज़बरदस्ती से वहाँ के बाशिन्दों के ग़फलत की हालत में हलाक नहीं किया करता
132وَلِكُلٍّ دَرَجَاتٌ مِّمَّا عَمِلُوا ۚ وَمَا رَبُّكَ بِغَافِلٍ عَمَّا يَعْمَلُونَ
और जिसने जैसा (भला या बुरा) किया है उसी के मुवाफ़िक हर एक के दरजात हैं
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अनुवाद — अल-अनआम 130

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Tuesday, August 18, 2026

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